आजकल सुपरमार्केट में मिलने वाले ज्यादातर पैकेटबंद फूड्स के डिब्बों को सामने से ‘हेल्दी’, ‘No Added Sugar’ या ‘लो फैट’ देखकर खरीद लेते हैं, लेकिन जो जानकारी पैकेट के पीछे ingredients और न्यूट्रिशन फैक्ट्स में लिखी होती है, उसे देखना भूल जाते हैं। जो लोग चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, बिस्कुट, ब्रेकफास्ट सीरियल, सॉस, रेडी-टू-ईट फूड या दूसरे पैकेटबंद फूड्स लेते हैं, उन्हें सिर्फ कैलोरी ही नहीं बल्कि कुछ खास Ingredients पर भी नजर डालना जरूरी है। ऐसी कौन-सी चीजें हैं, जिसे चेक करना जरूरी है? यह जानने के लिए हमने Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।
पैकेट वाले फूड्स खरीदने से पहले चेक करें 6 चीजें
American Heart Association के अनुसार, पैकेट पर Ingredients आमतौर पर मात्रा के हिसाब से ज्यादा से कम क्रम में लिखे जाते हैं। यानी जो चीज सबसे पहले लिखी है, उसकी मात्रा आमतौर पर सबसे ज्यादा होती है।
Senior Dietitian Rhitika Sharma कहती हैं, “अक्सर लोग जब भी डिब्बाबंद चीजें खरीदते हैं, तो वे कुछ भी चेक नहीं करते कि इसमें क्या है? इसलिए मैं हमेशा सलाह देती हूं कि लोगों को डिब्बाबंद फूड्स खरीदने से पहले ये चीजें जरूर चेक करनी चाहिए।”
1. सोडियम यानी नमक
Rhitika Sharma कहती हैं, “पैकेट वाले खाने में सोडियम की मात्रा पर जरूर ध्यान दें। जरूरत से ज्यादा सोडियम लेने से शरीर में अतिरिक्त पानी या फ्लूड जमा हो सकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। लंबे समय तक ज्यादा सोडियम लेने से हार्ट और किडनी की सेहत प्रभावित हो सकती है। आमतौर पर सोडियम या साल्ट ही लिखा न देखें। कई बार नमक को सोडियम बेंजोएट (Sodium benzoate), मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG), डिसोडियम कम्पाउंड और सोडियम नाइट्रेट भी लिखा जा सकता है। इसलिए पैकेट खरीदते समय न्यूट्रिशन फैक्ट्स में सोडियम की मात्रा जरूर देखें। ज्यादा मात्रा में नमक लेने से दिल, किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है।”
American Heart Association के अनुसार, खासतौर पर प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज और दूसरे प्रोसेस्ड मीट में सोडियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल बैक्टीरिया को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है, लेकिन इससे शरीर में सोडियम की मात्रा को बढ़ा सकता है।
AHA के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 2,300 mg से ज्यादा सोडियम नहीं लेना चाहिए, जबकि 1500 mg ब्लड प्रेशर के लिहाज से बेहतर माना जाता है।
2. चीनी यानी Added Sugar
Rhitika Sharma का कहना है, “किसी पैकेट पर सिर्फ शुगर लिखा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार शुगर को अन्य नामों से भी लिखा जा सकता है, ताकि आम लोगों को इसकी चीनी की ज्यादा जानकारी न मिल सके। शुगर के नाम सुक्रोस, ग्लूकोज, माल्टोज, हाई-फ्रुकटोज कोर्न सिरप, कैन शुगर या माल्ट सिरप भी लिखे दिखें, तो इसका मतलब है कि उस पैकेट में मीठे की मात्रा है। कई बार प्रोडक्ट्स पर कम मीठा या नेचुरल लिखा होता है, लेकिन लेबल में चीनी को कुछ इन नामों से लिखा होता है, जिसकी जानकारी आम लोगों को कम होती है। लंबे समय तक ज्यादा चीनी लेने से वजन बढ़ने तथा मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर पड़ सकता है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वयस्कों और बच्चों दोनों को अपनी कुल रोजाना कैलोरी का 10% से कम फ्री शुगर्स का सेवन करना चाहिए। अगर इसे घटाकर रोजाना 5% से कम यानी 6 छोटे चम्मच कर दिया जाए, तो सेहत को बहुत फायदा मिलता है।
3. ट्रांस फैट
Rhitika Sharma कहती हैं, “पैकेट बंद फूड आइटम में ट्रांस फैट जरूर चेक करना चाहिए। कई बार इसे इसे सीधा न लिख कर Partially Hydrogenated Oil या Hydrogenated Oil जैसे शब्द लिखे दिखाई दे सकते हैं। ट्रांस फैट खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को बढ़ा सकता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL को कम कर सकता है। इससे हार्ट की बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है।”
Rhitika Sharma ने बताया कि कई बार न्यूट्रिशन लेबल पर 0g ट्रांस फैट लिखा होता है, लेकिन कुछ मामलों में 0g लेबल के बावजूद प्रति सर्विंग बहुत कम मात्रा में ट्रांस फैट मौजूद हो सकता है और अगर आप कई सर्विंग खा लेते हैं तो कुल मात्रा बढ़ सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, ट्रांस फैट ज्यादा लेने से आर्टरी में रुकावट हो सकती है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए WHO कहता है कि रोजाना की कुल एनर्जी का 1% से कम ट्रांस फैट लेना चाहिए। अगर कोई रोजाना 2000 कैलोरी रोजाना लेता है, तो यह रोजाना का 2.2 ग्राम से भी कम होता है।
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4. सैचुरेटेड फैट
Rhitika Sharma ने कहा, “हर फैट खराब नहीं होता, क्योंकि शरीर को कुछ प्रकार के फैट्स की जरूरत होती है, लेकिन सैचुरेटेड फैट का ज्यादा इस्तेमाल हार्ट की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। अगर पैकेट में पॉम ऑयल, बटर, मिल्क सॉलिड या हाईड्रोजिनेटिड फैट्स लिखा है, तो इसका ध्यान रखना चाहिए। कई बार पैकेट पर फैट फ्री या लो फैट लिखा होता है। ऐसे में न्यूट्रिशन लेबल में सेचुरेटेड फैट की मात्रा को जरूर देखना चाहिए।”
AHA के अनुसार, लोगों को अनसैचुरेटेड फैट्स वाले ऑप्शन को चुनना चाहिए, क्योंकि ये हार्ट हेल्थ के लिए बेहतर होते हैं।
5. फूड्स में प्रिजर्वेटिव चेक करना
Rhitika Sharma ने बताया कि पैकेट वाले भोजन को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने, उसका रंग बनाए रखने, स्वाद या टेक्सचर बेहतर करने के लिए अलग-अलग फूड प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें BHA, BHT, सोडियम नाइट्रेट और कुछ आर्टिफिशल कलर और स्वीटनर इस्तेमाल किए जाते हैं। किसी भी प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल और उसकी मात्रा को नियमों के तहत ही इस्तेमाल होनी चाहिए।”
6. फोर्टिफिकेशन
Rhitika Sharma कहती हैं, “कई प्रोडक्ट्स में प्रोटीन से भरपूर या ग्लूटिन फ्री लिखा होता है, लेकिन पैकेट के पीछे प्रतिशत वैल्यू चेक करना जरूरी होता है, क्योंकि कई बार ग्लूटिन फ्री के बावजूद 2% या 5% गेहूं लिखा होता है। प्रोटीन के पैकेट के पीछे 1000k कैलोरी के प्रोडक्ट में 10 ग्राम लिखा होता है, तो ऐसे में प्रोटीन से भरपूर कहना गलत हो सकता है। इसलिए फोर्टिफिकेशन चेक करना चाहिए।
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
Senior Dietitian Rhitika Sharma लोगों को सलाह देती है कि अगली बार जब भी सुपरमार्केट से पैकेट बंद फूड लें, तो सिर्फ सामने लिखे दावों पर भरोसा न करें, बल्कि पैकेट के पीछे लिखे ingredients को जरूर चेक करें। इसमें सोडियम, शुगर, ट्रांस फैट, सैचुरेटेड फैट और प्रिजर्वेटिव्स को जरूर चेक करें। इसके साथ सर्विग्स साइज और कैलोरी भी देखें।
निष्कर्ष
पैकेट वाला खाना पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन फूड लेबल पढ़ने की आदत डालना बहुत जरूरी है। नमक, चीनी और ट्रांस फैट हार्ट, किडनी और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए इसे ध्यान से खाएं। अगर किसी को हाई बीपी, डायबिटीज, हार्ट या किडनी की समस्या है, तो पैकेट बंद फूड्स को पढ़ना और भी जरूरी हो जाता है।
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FAQ
पैकेटबंद फूड्स (जैसे चिप्स, बिस्किट, नूडल्स) खरीदते समय न्यूट्रिशन लेबल पर सबसे पहले क्या देखना चाहिए?
सबसे पहले सर्विंग साइज और प्रति सर्विंग कैलोरी देखें। अक्सर पैकेट छोटा दिखता है, लेकिन उसमें 2 से 3 सर्विंग्स होती हैं, जिससे आप अनजाने में दोगुनी कैलोरी खा लेते हैं।'Whole Wheat' या 'Multi-Grain' लिखे बिस्किट-ब्रेड का सच कैसे पता करें?
फ्रंट लेबल पर 'ब्राउन ब्रेड' या 'गेहूं' लिखा हो सकता है, लेकिन पीछे सामग्री में देखें कि गेहूं का आटा कितने प्रतिशत है। अक्सर इनमें केवल 20-30% गेहूं और बाकी मैदा व रंग होता है।
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Current Version
Aug 26, 2026 19:19 IST
Modified By : Aneesh Rawat Aug 26, 2026 19:19 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Rhitika Sharma
