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कमजोर पाचन तंत्र को बनाना है मजबूत? जानें डाइजेशन सुधारने वाले 10 इंडियन मसालों का सही इस्तेमाल

भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले कई मसाले न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी फायदेमंद होते हैं। बड़ी इलायची, लौंग, काली मिर्च, जीरा और सौंफ जैसे 10 मसालों का सही उपयोग कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है।

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Spices For Better Digestion: भारतीय घरों में खाना पकाने के दौरान कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। जीरा, हींग, अजवाइन आदि जैसे मसालों का इस्तेमाल न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। खासकर पाचन से जुड़ी समस्याओं में भारतीय मसालों का सेवन काफी असरदार माना जाता है। इसलिए, अगर आपको भी बार-बार कब्ज, दस्त, एसिडिटी, गैस और पाचन से जुड़ी अन्य समस्याएं होती हैं तो इनसे बचाव के लिए आप अपनी डाइट में कुछ इंडियन मसालों को शामिल कर सकते हैं। आइए इस लेख में हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि कमजोर पाचन को बेहतर बनाने रोज कौन-सा मसाला खाना चाहिए?

पाचन को बेहतर रखने के लिए 10 इंडियन मसाले

साल 2019 में Evidence Based Complementary And Alternative Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पाचन से जुड़ी बीमारियों को ठीक करने, भोजन को अच्छी तरह से पचाने और शरीर द्वारा उसे एब्जॉर्ब करने में कुछ मसाले ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं हल्दी, अदरक, पिपली और काली मिर्च। आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, पाचन को मजबूत रखने के लिए आप अपनी डाइट में इन मसालों को शामिल कर सकते हैं:

1. पाचन के लिए बड़ी इलायची के फायदे

बड़ी इलायची गर्म मसाले का एक अहम हिस्सा होती है, जो कमजोर पाचन और अपच की समस्या से राहत दिलाने में फायदेमंद हो सकता है। इसकी तासीर गर्म होती है और यह जल्दी असर करने वाली मानी जाती है। यह पित्त को बढ़ाती है और पाचन में मदद करती है।

बड़ी इलायची कैसे खाएं?

बड़ी इलायची को खाने में मसाले के रूप में शामिल किया जा सकता है। चाय या काढ़े में भी थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे गर्मियों में आप इसे सीमित मात्रा में खाएं।

2. पाचन के लिए लौंग के फायदे

लौंग को शीत वीर्य यानी ठंडी तासीर वाला मसाला माना जाता है। इसे बहुत अच्छा अम्लपित्त यानी एसिडिटी से राहत पाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। गर्मियों में इसका इस्तेमाल खासतौर पर किया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर रखने में लाभकारी है।

लौंग कैसे खाएं?

अपने खाने में 1 से 2 लौंग मसाले के रूप में मिला सकते हैं। इसे चबाकर भी खाया जा सकता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से बचें।

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3. पाचन के लिए छोटी इलायची के फायदे

छोटी इलायची को आयुर्वेद में त्रिदोषघ्न माना जाता है, यानी यह हमारे शरीर में तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद करती है। इसके अलावा, यह शीत वीर्य और रसायन माना जाता है। छोटी इलायची को खाने या चबाने से पाचन क्रिया तेज होती है और पेट की गैस या भारीपन की समस्या से राहत मिलती है। इसका इस्तेमाल मीठी और नमकीन दोनों तरह के भोजन के साथ किया जा सकता है। छोटी इलायची को बहुत अच्छा एंटी-एलर्जिक भी माना जाता है।

छोटी इलायची कैसे खाएं?

रोजाना 1 से 2 छोटी इलायची का उपयोग आप चाय या दूध में डालकर कर सकते हैं। इसके अलावा खाना बनाने या कोई मीठी चीज में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

4. पाचन के लिए काली मिर्च के फायदे

काली मिर्च लगभग हर तरह के मसाले के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पिपेरिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करती है। इतना ही नहीं यह बायो-इन्हान्सर (Bioenhancer) की तरह काम करती है, जो शरीर में कुछ पदार्थों और दवाओं के अवशोषण को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

काली मिर्च कैसे खाएं?

काली मिर्च का सेवन आप खाने में खड़े मसाले के रूप में या सलाद पर थोड़ी-सी ताजी पिसी काली मिर्च डाल सकते हैं। इसे गर्म या चाय में भी थोड़ी मात्रा में इसे मिला सकते हैं।

5. पाचन के लिए पिपली के फायदे

पिपली का इस्तेमाल भारतीय खानों में गर्म मसाले के रूप में किया जाता है। इसकी तासीर गर्म मानी जाती है और यह एक रसायन होता है। पिपली का इस्तेमाल पाचन को बेहतर रखने और पाचन अग्नि को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। खाने में पिपली मिलाने से भोजन को आसानी से पचता है और भूख में सुधार होता है।

पिपली कैसे खाएं?

पिपली को बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए। इसे आप खाने में उपयोग कर सकते हैं या फिर अपने रोजाना के चूर्ण में मिलाकर खा सकते हैं।

6. पाचन के लिए सोंठ के फायदे

सोंठ यानी सूखी अदरक को जिंजिबर ऑफिसिनेल भी कहा जाता है, जो एक रसायन होता है और पाचन अग्नि को कमजोर होने से बचाने में मदद करता है। यह भी रस धातु को शुद्ध और साफ करती है, अग्नि को मंद होने से बचाती है। इसलिए, सोंठ का सेवन पाचन को बेहतर रखने के लिए उपयोगी माना जाता है।

सोंठ कैसे खाएं?

चुटकी भर सोंठ को गर्म पानी या चाय में डाल सकते हैं। खाना बनाने में भी थोड़ी मात्रा में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

7. पाचन के लिए अजवाइन के फायदे

अजवाइन तेज असर दिखाने वाली और गर्म तासीर की होती है। यह वात दोष को शांत करने और गैस की समस्या से राहत दिलाने में उपयोगी माना जाता है। यह अनुलोमक के रूप में काम करती है यानी मल को नीचे की ओर ले जाने में मदद करती है, जिससे पेट आसानी से साफ होता है। 

अजवाइन कैसे खाएं?

पाचन को बेहतर रखने के लिए अजवाइन का सेवन आप खाने के बाद थोड़ी-मात्रा में चबाकर कर सकते हैं। अजवाइन को हल्का भूनकर भी लिया जा सकता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में इसे खाने से बचें।

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8. पाचन के लिए जीरा के फायदे

जीरा पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जीरा अनुलोमक होता है, जो शरीर में फंसे हुए और ठीक तरह से न पचने वाले मल और वायु को बिना किसी रुकावट के बाहर निकालने में मदद करती है।

जीरा कैसे खाएं?

भारतीय घरों में खाने में तड़के के रूप में जीरा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, आप जीरे के पानी का भी सेवन कर सकते हैं

9. पाचन के लिए सौंफ के फायदे

सौंफ शीत वीर्य यानी ठंडी तासीर वाला मसाला है। यह पाचन में मदद करती है और भोजन के बाद लेने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। सौंफ में मौजूद फाइबर मल त्याग को कंट्रोल करने और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में प्रभावी होता है।

सौंफ कैसे खाएं?

सौंफ का सेवन आमतौर पर खाने के बाद थोड़ी-सी मात्रा में चबाकर करना लाभकारी होता है। इसके अलावा, आप इसे अपने खाने में मिलाकर या गैस से राहत के लिए सौंफ के पानी के रूप में भी कर सकते हैं।

10. पाचन के लिए हींग के फायदे

हींग एक पौधे से मिलने वाला गोंद जैसा पदार्थ है। इसका इस्तेमाल भी लोग अक्सर खाना बनाते समय इस्तेमाल करते हैं, ताकि पाचन बेहतर हो और एसिडिटी की समस्या से राहत मिल सके। इसे वात और कफ को शांत करने और पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत के लिए उपयोग किया जाता है।

हींग कैसे खाएं?

हींग को सब्जी, दाल या अन्य भोजन में तड़के के रूप में थोड़ी मात्रा में किया जाता है। इसे सीधे ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2001 में Nutrition Research में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अदरक, अजवाइन, जीरा, पिपेरिन, धनिया और हींग में सबसे ज्यादा ऐसे गुण होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, करक्यूमिन, कैप्साइसिन (लाल मिर्च में मौजूद तत्व), पुदीना, प्याज और सौंफ भी पाचन को सही रखने में मदद करते हैं।

पाचन तंत्र कमजोर होने के कारण

डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, पाचन तंत्र कमजोर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल है-

  • खाने में फाइबर की कमी और ज्यादा जंक या प्रोसेस्ड फूड खाना।
  • रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण पाचन क्रिया धीमी होना।
  • दिनभर बैठे रहने या एक्सरसाइज न करना।
  • बहुत ज्यादा तनाव लेने के कारण पेट और आंतों के काम करने के तरीके पर असर पड़ना।
  • नींद की कमी या अच्छी नींद न आने के कारण मेटाबॉलिज्म धीमा होना और गट बैक्टीरिया का संतुलिन बिगड़ना।
  • कुछ खास तरह की दवाइयों या एंटीबायोटिक्स का पाचन पर असर पड़ना।

निष्कर्ष

कमजोर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए आप अपनी डाइट में बड़ी इलायची, छोटी इलायची, लौंग, काली मिर्च , पिपली, सोंठ, अजवाइन, जीरा और सौंफ जैसे भारतीय मसालों को शामिल कर सकते हैं। आमतौर पर इन मसालों का इस्तेमाल ज्यादातर भारतीय घरों में खाना पकाने के दौरान या अन्य तरीकों से होता है। ध्यान रहे इन मसालों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अगर आप में कब्ज, एसिडिटी, गैस या ब्लोटिंग की समस्या बनी रहती है तो जरूरी है कि आप डॉक्टर से कंसल्ट करें।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • पाचन शक्ति कमजोर होने पर क्या करना चाहिए?

    पाचन शक्ति कमजोर होने पर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना, खाना चबा-चबाकर खाना, डाइट में दही, सौंफ और त्रिफला शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, तले-भुने, मैदा और ज्यादा मिर्च-मसाले वाले फूड्स से परहेज करना चाहिए।
  • पाचन तंत्र खराब होने से कौन सी बीमारी होती है?

    पाचन तंत्र खराब होने से कब्ज, एसिडिटी, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम, फैटी लिवर और बॉडी इंफ्लेमेशन से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 04, 2026 15:15 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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