मनोचिकित्सक के टिप्स: कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे प्रियजन कैसे रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल?

कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे प्रियजन मरीज से ज्यादा पीड़ा में रहते हैं। मनोचिकित्सक के ये टिप्स उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद करेंगे।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Apr 07, 2021Updated at: Apr 07, 2021
मनोचिकित्सक के टिप्स: कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे प्रियजन कैसे रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल?

‘’रात के 10 बज रहे थे, सब सो रहे थे। पति के फोन पर अस्पताल से कॉल आया कि आपकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव (Positive corona report) आई है, आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। हम एंबुलेंस आपके घर भेज रहे हैं। जब ये बात मेरे पति ने मुझे बताई उस समय मेरे हाथ पांव ढीले पड़ गए और ऐसा लग रहा था कि मेरे पति को कोई बहुत बड़ी बीमारी हो गई है’’ 34 साल की आयुशी सिंह का ये कहना है। बक्सर की रहने वाली आयुशी सिंह अपने पति को कोरोना होने के बाद उनकी मानसिक हालत कैसी थी, इसके बारे में वे बताती हैं कि ‘’हम एक ही घर में जेल की तरह रह रहे थे। मन में बहुत दया आती थी कि उनके लिए कमरे के बाहर खाना रखना पड़ता है। पर वो बुरा वक्त चला गया। अब वे पूरी तरह से ठीक हैं।’’ कोरोना का ये डर, चिंता, घबराहट, तनाव केवल आयुशी का नहीं था बल्कि हर उस व्यक्ति का था जिसके घर में कोई व्यक्ति कोविड पोजिटिव हुआ हो। कोरोना मरीजों की सेवा कर रहे प्रियजनों (Loved ones) का मानसिक स्वास्थ्य भी इस दौरान नकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ। आज विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health 2021) पर गुरुग्राम के अवेकनिंग रिहैब में मनोचिकित्सक प्रज्ञा मलिक बता रही हैं कि परिजन कैसे अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रख सकते हैं। 

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नेचर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी कलेक्शन के द्वारा 2020 में कराई गई एक स्टडी के मुताबिक 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग में 68 फीसद लोगों में कोरोना का डर बैठ गया था। एलेसवियर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के मुताबिक साल 2020 में दुनिया भर में 1,70,423  की मौत हो गई जो कोरोना के डर को संभाल नहीं पाए। इस डर, चिंता के पीछे सोशल आइसोलेशन, बीमारी की पूरी जानकारी न होना, लॉकडाउन कई कारण हो सकते हैं। ये तो मात्र आंकड़े हैं, पर ऐसे कितने लोग होंगे जो इन आंकड़ों में समाए नहीं होंगे। यही वह समय था जब मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोविड-19 ने 93 फीसद देशों में मेंटल हेल्थ सेवाओं को प्रभावित किया है। कोविड एक महामारी बनकर सभी के सामने आया।

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‘पापा फोन करके अपनी जरूरतों के बारे में बताते थे’

आयुशी बताती हैं कि मेरी दो बेटियां हैं। जो अभी 8 और 10 साल की हैं। जब पति को कोरोना हुआ तो बच्चे भी सहम गए थे। बड़ी बेटी कह रही थी कि जब लॉकडाउन लगा था तब हम सभी पापा के साथ कितने मजे से लूडो खेलते थे, लेकिन अब पापा घर में ही एक कमरे में बंद रहते हैं। दरवाजे पर खड़े होकर बात करनी पड़ती है। आयुशी बताती हैं कि मेरी सास बुजुर्ग हैं। तो हमें उनकी भी चिंता थी कि कहीं उन्हें कोई दिक्कत न हो जाए। सभी की जिम्मेदारी आयुशी पर आ गई थी। ऐसे में उन्हें अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल ज्यादा रखना पड़ा। 

आयुशी बताती हैं कि ‘’एक हफ्ते तक को पति अस्पताल में एडमिट थे। फिर घर में आइसोलेशन में आ गए। एक ही घर में उन्हें बंधा हुआ देखकर हम सभी दुखी होते थे। उन्हें कुछ भी चाहिए होता था तो फोन कर देते थे और मैं दरवाजे पर रख देती थी। मुंह पर मास्क और उचित दूरी का पालन करना पड़ता था। एक ही घर में कैदियों की तरह जी रहे थे। वो वक्त बहुत बुरा था भगवाना वैसा दिन किसी को न दिखाए।’’

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मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के चरण

मनोचिकित्सक प्रज्ञा मलिक ने दिए वे टिप्स हैं जिनको अपनाकर परिजन अपना स्ट्रेस कम कर सकते हैं। उन्होंने सबसे पहले कुछ चरण बताए जिनसे इंसान की मानकिस परेशानी शुरु होती है। ये स्टेप्स निम्न हैं।

डर- जब हमारे सामने कोई भी स्थिति आती है तब हम समझ ही नहीं पाते कि क्या करें। कोरोना मामलों में देखा गया कि अपने ही प्रियजनों को हुआ। जिनसे हम दूर नहीं जा सकते थे। और उनके पास भी नहीं जा सकते थे। उन्हें खोने का डर हमेशा बना रहता था। जिस वजह से उन्हें दिक्कत हो सकती है।

चिंता- एंग्जाइटी में होता है कि लोगों को लगता है कि अगर यह कोरोना के लक्षण बढ़ गए तो क्या होगा। भविष्य को लेकर चिंता होने लगती है। वे मरीज जिन्हें पहले से कोई बीमारी है तो उनके लिए परेशानी और बढ़ जाती है। परिवार को चिंता रहती है कि अगर फैमिली का ब्रेडविनर ही चला गया तो घर कैसे चलेगा।

तनाव- वर्तमान स्थिति से मेंटल हेल्थ प्रभावित हुई। जिससे काम की प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ा। 

ओवरथिंकिंग- ओवरथिकिंग में हमारी सभी भावनाओं का कांबीनेशन हमारे सामने आ जाता है। हम भविष्य में ले जाकर खुद को बहुत परेशान कर लेते हैं।

डिप्रेशन- जब हम ओवरथिकिंग से निकल नहीं पाते या डील नहीं कर पाते तो हमारे दिमाग डिप्रेसिव मोड में चला जाता है। उस समय हमें ऐसा लगने लगता है कि दुनिया में कुछ भी अच्छा नहीं है। जिसके बाद आत्महत्या के मामले देखने को मिलते हैं। 

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मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के टिप्स 

डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि जिस व्यक्ति को कोरोना हुआ है वह तो केवल पैनिक में रहता है। पर प्रियजन दूसरे तरह के डर में रहते हैं। प्रज्ञा मलिक के मुताबिक प्रियजन इन दो उपायों को अपनाकर अपनी मानसिक स्थिति को स्थिर रख सकते हैं।

शारीरिक स्थिति में ऐसे करें सुधार 

  • दूसरे लोगों से कनेक्शन बनाएं। 
  • सही समय पर सोएं। 
  • हेल्दी डाइट लें। हेल्दी डाइट में फल और तरल पदार्थ ज्यादा हों। 
  • अच्छे हाइजीन की प्रैक्टिस करें। 
  • खुद को व्यवस्थित (Organize) करें।
  • छोटे टारगेट बनाएं और उसे फॉलो करें।

मानसिक स्थिति में ऐसे करें सुधार

  • व्यक्ति के कंट्रोल में जो चीजे हैं उनपर काम करें। उन्हें बेहतर बनाएं।
  • क्रिएटिव बनें।
  • जब भी मदद की जरूरत पड़े तब उन लोगों से बात करें जिन पर आपको भरोसा है। 
  • खुद को किसी ऐसे काम में जोड़ना जिससे आप खुद को जोड़ पाते हों। जैसे संगीत, चित्रकला, खाना बनाना, फिशिंग आदि।
  • दूसरे लोगों की मदद करना। मदद करने से हम अपनी परेशानी को भूल जाते हैं और दूसरे को खुश करने की कोशिश करते हैं।
  • कोरोना बीमारी के बारे में सही जानकारी अपने पास रखना। 
  • परिवार का सहयोग।
  • एल्कोहल या ड्रग को अवोइड करें। 
  • चिंताग्रस्त इमोशन्स को मैनेज करें। उसे दवाओं से सुलाएं नहीं।

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कोरोना काल में अनगिनत लोगों ने मानसिक और शारीरिक पीड़ा सही है। शारीरिक पीड़ा तो दिख जाती है पर मानसिक पीड़ा नहीं दिखती। इसलिए ऐसे में वे लोग जो कोरोना मरीजों की सेवा कर रहे हैं वे भी मरीज के साथ-साथ मानसिक रूप से बीमार पड़ रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए मनोचिकित्सक के ये उपाय जरूर काम आएंगे।

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