Fri Sep 11, 2026 | 09:13 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

पेरेंट्स सावधान: बच्चों की डेली डाइट में ये 5 चीजें न बनने दें आदत, वरना होंगे ढेरों नुकसान

बच्चों की डेली डाइट में छुपे कुछ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स उनकी ग्रोथ, इम्यूनिटी और गट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फ्रोजन ब्रेड्स, जैम, आइसक्रीम, ब्रेकफास्ट सीरियल और पैकेट स्नैक्स को खाने की आदतें गंभीर हेल्थ समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

आज के समय में बच्चों की हेल्थ पर सबसे बड़ा खतरा बाहर के खाने से नहीं, बल्कि घर में रोज-रोज ख‍िलाई जा रही अल्‍ट्रा-प्रोसेस्‍ड चीजों से है। ये फूड्स देखने में रंगीन, पैकिंग में आकर्षक और बच्चों को अच्‍छे लगते हैं, लेकिन इनके अंदर असली पोषण नहीं होता। नियमित रूप से ये खाद्य पदार्थ बच्चे की ग्रोथ, इम्यूनिटी, गट हेल्थ और भविष्य की मेटाबॉलिक हेल्थ पर गहरा असर डालते हैं। पेरेंट्स अक्सर सोचते हैं कि थोड़ा-सा दे देने से क्या होगा? लेकिन जब ये डेली आदत बन जाते हैं, तब नुकसान धीरे-धीरे बड़े स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। आइए समझते हैं कि कौन-सी 5 चीजें बच्चों की डेली डाइट से तुरंत हटा देनी चाहिए। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

 

 

 

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1. फ्रोजन फास्ट-फूड ब्रेड्स- Frozen Fast Food Breads

बड़े-बड़े ब्रांड्स की ब्रेड्स ताजी नहीं होतीं। इन्हें फ्रीजर में लंबे समय तक रखने के लिए प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये ज्यादातर मैदा, एडिटिव्स और जीरो र‍ियल न्‍यूट्र‍िशन से बनी होती हैं। फाइबर की कमी होने के कारण ये बच्चों के पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाती हैं और पेट तो भर देती हैं, लेकिन बच्चों के शरीर को इनका सेवन करने से पोषण नहीं म‍िलता है। अगर बच्चा रोज इन ब्रेड्स का आदी बन जाए, तो पोषण की कमी, ओवरईटिंग और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।

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2. जैम- Jam

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रंग-बिरंगी पैकिंग, फ्रूट की फोटो और मीठी खुशबू के साथ ब‍िकने वाले जैम अलस में हेल्‍दी नहीं होते। ये सिर्फ शुगर, आर्टिफिशियल कलर्स और एडिटिव्स का मिश्रण होते हैं। बच्चे इसे रोज खाने लगें, तो यह सीधा उनके इंसुलिन, गट हेल्थ और भूख के पैटर्न को प्रभावित करता है। रोज जैम खाने की आदत आगे चलकर शुगर क्रेविंग, मोटापा और इंसुलिन रेजि‍स्टेंस का कारण बनते हैं।

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3. आइस क्रीम- Ice Creams

बाजार की कई आइसक्रीम असल में आइसक्रीम होती ही नहीं हैं, इन्हें फ्रोजन डेजर्ट कहा जाता है। इनमें पॉम ऑयल, आर्ट‍िफ‍िश‍ियल फ्लेवर और हाई शुगर कंटेंट होता है। इनका म‍िश्रण बच्चे की गट हेल्‍थ, हार्मोन्‍स और मेटाबॉलिज्‍म पर बुरा असर डालता है। छोटे बच्चों की बॉडी इतनी केमिकल-लोडेड चीजों को हैंडल करने के लिए तैयार ही नहीं होती। इसल‍िए बच्‍चों को ज्‍यादा आइसक्रीम नहीं ख‍िलाना चा‍ह‍िए।

4. ब्रेकफास्ट सीरियल्स- Breakfast Cereals

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ब्रेकफास्ट सीरियल्स बच्चों को किसी सीक्रेट सुपरफूड की तरह बेचे जाते हैं, लेकिन असल में ये अल्ट्रा-प्रोसेस्‍ड फूड्स होते हैं। सुबह-सुबह बच्चे को ऐसा नाश्ता देंगे, तो ब्लड शुगर लेवल तुरंत बढ़ सकता है, जिससे जल्दी भूख लगना, चिड़चिड़ापन और एनर्जी क्रैश की समस्या बन जाती है। बढ़ते बच्‍चों के ल‍िए ब्रेकफास्‍ट सीर‍ियल्‍स खराब आदत है।

5. पैकेट स्नैकिंग- Packaged Snacking

छोटे-छोटे पैकेट बच्चों को द‍िखने में अच्‍छे लगते हैं, लेकिन इनमें नमक, अनहेल्‍दी ऑयल्‍स, एमएसजी और एड‍िट‍िव्‍स भरपूर मात्रा में होते हैं। रोजाना इसका सेवन बच्चे के टेस्‍ट बड्स को खराब करता है और उन्हें घर का खाना बोर‍िंग लगने लगता है। इनकी यह गलत आदत कम उम्र से ही मोटापा, बीपी की समस्‍या और डाइजेशन की समस्‍याओं का खतरा बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष:

बच्चों की सेहत उनकी रोजमर्रा की खाने की आदतों से बनती है। अगर आप समय रहते अल्‍ट्रा-प्रोसेस्‍ड चीजों को उनकी डेली लाइफ से हटाते हैं, तो न सिर्फ उनका मेटाबॉलिज्‍म मजबूत होगा, बल्कि हेल्‍थ र‍िस्‍क भी कम होंगे।

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यह लेख फिटनेस ट्रेनर Dr. Manan Vora की इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट से प्रेरित है।

FAQ

  • बच्‍चों को नाश्‍ते में क्‍या ख‍िलाएं?

    बच्चों को नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजें दें जैसे अंडा, दलिया, इडली, पराठा-दही, फल, पोहा, उपमा, मूंग चीला या पीनट बटर सैंडविच। 
  • बच्‍चों को नाश्‍ते में क्‍या न ख‍िलाएं?

    नाश्ते में कार्नफ्लेक्स, सीरियल्‍स, जैम-ब्रेड, फ्रोजन ब्रेड्स, पैकेट स्नैक्स और शुगर वाली ड्रिंक्स न दें। ये ब्लड शुगर बढ़ाते हैं, भूख बिगाड़ते हैं और दिनभर की एनर्जी को खराब करते हैं।
  • बच्चे के लिए स्वस्थ नाश्ता क्या है?

    स्वस्थ नाश्ता वह है जो बच्चे को लंबे समय तक एनर्जी दे जिसमें प्रोटीन, स्वस्थ कार्ब्स और फाइबर हों। जैसे अंडा-टोस्ट, उपमा-फल, दही-पोहा, मूंग चीला वगैरह।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 01, 2025 18:54 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Published By : Yashaswi Mathur
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