पेट में कीड़े होना एक आम लेकिन परेशानी भरी समस्या है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर दूषित भोजन या पानी के सेवन, खराब पाचन, शरीर की कमजोर इम्यूनिटी और पेट की नियमित सफाई न होने के कारण होती है। इसके लक्षणों में पेट दर्द, भूख न लगना या अधिक लगना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, वजन घटना और कभी-कभी उल्टी या दस्त भी शामिल हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसके कई प्राकृतिक और घरेलू उपचार बताए गए हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को अंदर से शुद्ध करते हैं। इन्हीं में से एक प्रभावशाली उपाय है मोरिंगा (सहजन) के फूलों का उपयोग। इस लेख में नोएडा के सेक्टर-12 में स्थित, अर्चित आयुर्वेदिक क्लिनिक के डॉ. अनंत त्रिपाठी से जानिए, पेट की समस्याओं के लिए मोरिंगा के फूलों का उपयोग कैसे करें?
पेट की समस्याओं के लिए मोरिंगा के फूल - Moringa flowers for stomach problems
डॉ. अनंत त्रिपाठी जैसे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि मोरिंगा का फूल कृमिनाशक के रूप में काम करता है और साथ ही यह आंतों में होनी वाले सूजन और ट्विस्ट (गुल्म) जैसी स्थितियों में भी लाभकारी हो सकता है। इसके नियमित उपयोग से गट हेल्थ सुधरती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। मोरिंगा का फूल कटु रस (कड़वे स्वाद) वाला, तीक्ष्ण और ऊष्ण प्रकृति का होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से पाचन तंत्र की कई जटिल समस्याओं में लाभदायक पाया गया है, जिसमें आंतों का मुड़ जाना (इंटेस्टाइनल ट्विस्ट), पेट में कृमि (वर्म्स) और अन्य पाचन विकार शामिल हैं।
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आंतों के ट्विस्ट में कैसे काम करता है मोरिंगा का फूल?
गंभीर पाचन विकारों में आंतों का आपस में उलझ जाना या मुड़ जाना (गुल्म की समस्या) एक जटिल स्थिति होती है, जिसे अगर समय पर ठीक न किया जाए तो यह ऑपरेशन तक की नौबत ला सकती है। डॉ. अनंत के अनुसार मोरिंगा का फूल अपने तीक्ष्ण गुणों के कारण आंतों की गतिशीलता को सक्रिय करता है और पाचन तंत्र की गड़बड़ियों को सामान्य करता है। यह फूल आंतों में जमी गैस, विकार और सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे आंतों की नेचुरल मूवमेंट सुधरती है और ट्विस्ट जैसी स्थिति में राहत मिलती है।
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कृमिनाशक गुण
मोरिंगा का फूल सिर्फ आंतों की संरचना पर ही नहीं, बल्कि उनके भीतर पनपने वाले कीड़ों (कृमियों) पर भी प्रभावी होता है। विशेषकर बच्चों में कृमि की समस्या आम है, जिससे उन्हें पेट दर्द, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसी दिक्कतें होती हैं। मोरिंगा के फूल का सेवन करने से यह कीड़े नष्ट होते हैं और पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है।
गट हेल्थ बेहतर करे
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते सेवन के कारण गट हेल्थ एक बड़ी चिंता बन चुकी है। कब्ज, गैस, एसिडिटी, सूजन और आंतों की इंफ्लेमेशन जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में मोरिंगा का फूल एक नैचुरल डिटॉक्स एजेंट की तरह कार्य करता है। इसके ऊष्ण गुण पाचन अग्नि को प्रबल करते हैं, जिससे आहार जल्दी पचता है और आंतों में अपशिष्ट नहीं रुकता। यह गट माइक्रोबायोम को संतुलित करने में भी सहायक होता है।
मोरिंगा फूल का सेवन कैसे करें?
मोरिंगा सूखे फूलों का चूर्ण सुबह गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। कुछ लोग मोरिंगा फूल की चाय बनाकर भी इसका उपयोग करते हैं। डॉक्टर अनंत सलाह देते हैं कि इसकी मात्रा और विधि किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की निगरानी में तय की जानी चाहिए, ताकि यह शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार अनुकूल हो।
मोरिंगा का फूल जहां कई समस्याओं का समाधान है, वहीं कुछ स्थितियों में इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, अत्यधिक पित्त प्रकृति वालों और जिन्हें पहले से आंतों में सूजन या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसके तीक्ष्ण और ऊष्ण गुण कुछ लोगों में जलन, एसिडिटी या गैस बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
चाहे आंतों के ट्विस्ट जैसी गंभीर समस्या हो या आम कृमि संक्रमण, यह फूल अपनी नेचुरल गर्मी और तीव्रता से शरीर के भीतर संतुलन कायम करता है। यदि सही तरीके से और उचित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो मोरिंगा का फूल पेट से जुड़े रोगों के लिए एक वरदान सिद्ध हो सकता है।
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FAQ
पेट में कीड़े होने से क्या दिक्कत होती है?
पेट में कीड़े होने पर शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। आम लक्षणों में पेट दर्द, भूख कम लगना या अचानक बहुत अधिक लगना, दस्त या कब्ज, वजन का घटना, पेट में सूजन, गुदा में खुजली, चिड़चिड़ापन और थकान शामिल हैं। समय रहते उपचार न होने पर यह पाचन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।पेट के कीड़े कैसे साफ होते हैं?
पेट के कीड़े आमतौर पर दूषित भोजन, पानी या खराब पाचन के कारण होते हैं। इन्हें साफ करने के लिए आयुर्वेद में कई प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं। त्रिफला, अजवाइन, नीम की पत्तियां और मोरिंगा के फूल जैसे प्राकृतिक तत्व कृमिनाशक गुणों से भरपूर होते हैं। इनका सेवन करने से आंतों में मौजूद कीड़े खत्म होते हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। साथ ही, उबला हुआ पानी पीना और हल्का, सुपाच्य भोजन करना भी जरूरी होता है।आंतों की सफाई कैसे करें?
आंतों की सफाई के लिए गर्म पानी के साथ त्रिफला चूर्ण या फाइबर युक्त भोजन का नियमित सेवन करें।