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दिल के मरीजों के लिए आम खाना कितना सही? जानें एक्सपर्ट की राय

आम स्वाद के साथ-साथ पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन हार्ट पेशेंट्स के लिए यह कितना सुरक्षित है, यह जानना जरूरी है।

गर्मियों में जब धूप तेज होती है और शरीर ठंडी ताजगी चाहता है, तब आम का मीठा स्वाद जैसे मन को सुकून देता है। लेक‍िन सवाल उठता है क‍ि क्या यह स्वाद से भरा फल, हार्ट के मरीजों के लिए भी उतना ही सुरक्षित है? जब कोई व्यक्ति हार्ट पेशेंट होता है, तो उसे अपने खानपान में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है, खासकर शुगर, फैट और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी चीजों को लेकर। ऐसे में आम, जो कि प्राकृतिक रूप से मीठा होता है, लोगों में मन में यह भ्रम पैदा करता है क‍ि उसे खाएं या नहीं। क्या इसकी मिठास, हार्ट को नुकसान पहुंचा सकती है? या इसके पोषक तत्व हार्ट को फायदा भी दे सकते हैं? कुछ लोग आम को नेचुरल शुगर बम कहते हैं, तो कुछ न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना मानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर आम का प्रकार, उसकी मिठास और पोषण लेवल अलग हो सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि हार्ट पेशेंट्स के लिए आम खाना पूरी तरह सुरक्षित है या उन्हें कुछ न‍ियमों के साथ ही इसका आनंद लेना चाहिए। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थ‍ित‍ न्‍यूट्र‍िवाइज क्‍लीन‍िक की न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट नेहा स‍िन्‍हा से बात की।

क्‍या हार्ट पेशेंट्स आम खा सकते हैं?- Can Heart Patients Eat Mangoes

न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट नेहा स‍िन्‍हा ने बताया क‍ि हार्ट पेशेंट्स आम का सेवन कर सकते हैं। आम न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो हार्ट की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसमें विटामिन-ए, सी, पोटैशियम और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। आम में मौजूद एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मैंगि‍फेरिन भी हार्ट की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। ये तत्व शरीर में सूजन को कम करने, ब्लड प्रेशर को संतुलित करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ने में मदद करते हैं। खासकर पोटैशियम हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में फायदेमंद माना जाता है, जो कि हार्ट हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। हार्ट और डायब‍िट‍िक मरीजों को ज्‍यादा पका हुआ आम या केला नहीं खाना चाह‍िए, इससे शुगर लेवल बढ़ सकता है।

इसे भी पढ़ें- डायबिटीज और वेट लॉस करने वाले कैसे खाएं आम? एक्सपर्ट से जानें सही तरीका और फायदे

आम खाने से ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस कम होता है: स्‍टडी

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सैन डिएगो शहर में स्‍थ‍ित सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी में हुई एक स्टडी 12 हफ्तों तक चली, जिसमें 27 ओवरवेट लोगों ने रोजाना 100 कैलोरीज के आम खाने के ल‍िए द‍िए गए। स्टडी का मकसद यह देखना था कि आम खाने से हार्ट और शरीर में सूजन व ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस से जुड़े मार्कर्स पर क्या असर पड़ता है। नतीजों में यह पाया गया कि आम खाने से एक अहम सूजन संबंधी प्रोटीन वीसीएएम-1 की मात्रा 4 से 12 हफ्तों में कम हो गई, जिससे संकेत मिलता है कि आम, ब्‍लड वेसल्‍स की सेहत में सुधार कर सकते हैं। इसके अलावा, आम खाने से एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम्स जैसे सीएटी, जीपीएक्‍स और सीओडी के लेवल भी बढ़े, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर, यह स्टडी बताती है कि रोजाना थोड़ी मात्रा में आम खाना दिल की सेहत और ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस को कम करने में मददगार हो सकता है और यह लो-फैट स्नैक का एक बेहतर विकल्प बन सकता है।

आम में क‍ितनी शुगर होती है?- Sugar Content in Mango

आम से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल उसकी नेचुरल मिठास का है। एक मध्यम आकार के आम में लगभग 45 ग्राम नेचुरल शुगर हो सकती है। हार्ट पेशेंट्स को अक्सर ब्लड शुगर और वजन कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है। इसलिए अगर आप डायबिटिक भी हैं, तो ज्यादा आम खाना नुकसान कर सकता है। लेकिन अगर सीमित मात्रा में खाया जाए, तो इसका बुरा असर नहीं होता।

आम का संतुलित सेवन है फायदेमंद- Eat Mango in a Balanced Approach

आम में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। साथ ही इसमें बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो हार्ट की धमनियों में जमे फैट को साफ करने में मदद कर सकते हैं। रिसर्च बताती हैं कि सीमित मात्रा में आम का सेवन हार्ट के लिए नुकसानदायक नहीं होता, जब तक वह संतुलित डाइट का हिस्सा हो।

हार्ट पेशेंट्स आम का सेवन कैसे करें?- How to Eat Mangoes With Heart Disease

  • एक दिन में आधा या छोटा आम खाना पर्याप्त है। आम में आयरन होता है, ज्‍यादा सेवन से पेट दर्द व अन्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • खाली पेट आम का सेवन नहीं करना चाह‍िए। आम को अन्‍य फाइबर युक्‍त चीजों के साथ खाने से शुगर स्पाइक कम होता है।
  • आपको फ्रेश आम चुनना चाह‍िए। केमिकल राइप्ड आम या कोल्‍ड स्‍टोरेज वाले आम खाने से बचें।
  • मैंगो शेक या मैंगो आइसक्रीम का सेवन न करें। इनमें अतिरिक्त शुगर और फैट होता है।

अगर शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन कंट्रोल में है, तो सीमित मात्रा में आम खाने से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि आम के कुछ पोषक तत्व हार्ट को फायदा भी पहुंचा सकते हैं। लेकिन ज्‍यादा मात्रा, प्रोसेस्ड फॉर्म या बिना सलाह के सेवन करने से जोखिम बढ़ सकता है।

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study link:

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2589936823000324

study source: sciencedirect

FAQ

  • हार्ट के मरीज को कौन सा फल नहीं खाना चाहिए?

    हार्ट पेशेंट्स को ज्‍यादा मीठे फल जैसे चीकू, पका हुआ केला या बहुत ज्यादा मात्रा में अंगूर खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर ज्‍यादा होती है।
  • कौन सी बीमारी में आम नहीं खाना चाहिए?

    डायबिटीज, लिवर संबंधी समस्याएं या पाचन से जुड़ी बीमारियों में पके हुए आम का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्‍यादा पके हुए आम में शुगर की मात्रा भी ज्‍यादा होती है।
  • 1 दिन में कितने आम खा सकते हैं?

    एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में 1-2 मीडियम साइज का आम खा सकता है। लेकिन अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह से ही मात्रा तय करें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 27, 2025 10:57 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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