
आज दुनिया में फैट-फ्री और हेल्दी फूड को लेकर जितनी चर्चा है, उतनी शायद पहले कभी नहीं थी। इसका कारण जंक और फास्ट फूड्स का लगातार बढ़ता बाजार और इससे होने वाली बीमारियां हैं। लेकिन समस्या ये है कि हम में से ज्यादातर लोग यह जानते हुए भी कि जंक फूड्स सेहत के लिए नुकसानदायक हैं, इसे खाते रहते हैं। कुछ लोग इससे होने वाले जोखिम को नजरअंदाज कर देते हैं, तो कुछ लोगों को इसका पता ही नहीं होता कि ये कितने खतरनाक हो सकते हैं। इसी बारे में एक नई स्टडी में हमें चेताया है। इस स्टडी के अनुसार अगर आप अपनी डाइट में हाई-फैट फूड खा रहे हैं, तो यह सिर्फ वजन पर असर नहीं डालेगा, बल्कि लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।
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यह रिसर्च कोई छोटा-मोटा लैब रिपोर्ट नहीं है। यह MIT (Massachusetts Institute of Technology) के वैज्ञानिकों ने की है और उन्होंने Cell नाम के टॉप साइंस जर्नल में इसे प्रकाशित किया है।
स्टडी कैसे की गई?
शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि लंबे समय तक हाई-फैट डाइट लेने से लिवर सेल्स के अंदर क्या बदलाव होते हैं। इसके लिए उन्होंने लिवर सेल्स के मेटाबॉलिज्म, जीन एक्टिविटी और डीएनए कंट्रोल सिस्टम को बारीकी से स्टडी किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि ज्यादा फैट वाली डाइट लिवर सेल्स में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाती है, जिससे सेल्स का नेचुरल बैलेंस बिगड़ने लगता है। इस प्रक्रिया में लिवर सेल्स ऐसे बायोलॉजिकल बदलावों से गुजरते हैं, जो उन्हें कैंसर के लिए ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं।
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खास बात यह रही कि हाई-फैट डाइट कैंसर को सीधे पैदा नहीं करती, लेकिन यह लिवर को ऐसा माहौल दे देती है, जहां कैंसर की शुरुआत पहले और तेजी से हो सकती है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने इसे लिवर कैंसर को “खतरनाक हेड-स्टार्ट” देने वाला फैक्टर बताया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह इंसानी शरीर के सेल लेवल पर हुआ शोध है, यानी इसे अनुमान या किसी मॉडल पर प्रयोग के आधार पर नहीं बताया गया है
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स्टडी में क्या पाया गया?
1. हाई-फैट फूड बदलता है Liver Cells के DNA को
डाइट में फैट ज्यादा होने पर लिवर सेल्स के अंदर मेटाबोलिक प्रॉसेस बदल जाते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे सेल के जीन नियंत्रण प्रणाली को प्रभावित करता है। जिससे होता यह है कि यह सेल कैंसर जैसे बदलावों के लिए संवेदनशील हो जाते हैं।
2. सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ते हैं
फैट ज्यादा होने पर लिवर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) की स्थिति बनती है। यह दोनों चीजें लिवर सेल्स को कमजोर बनाती हैं, जिससे उनके कैंसर की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।
स्टडी में पाया गया कि हाई-फैट डाइट की वजह से सामान्य लिवर सेल्स में पहले-से-अधिक तेजी से और खतरनाक बदलाव आते हैं, जो बाद में कैंसर की शुरुआत में बदल सकते हैं।
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हाई-फैट फूड में क्या आता है?
जब हम “हाई-फैट” कहते हैं, तो इसका मतलब यह है कि ऐसा खाना जिसे बनाने में बहुत ज्यादा तेल, घी या मक्खन का प्रयोग किय गया हो या फिर ऐसा खाना, जिसमें नेचुरल रूप से बहुत ज्यादा फैट मौजूद हो, जैसे-
- फ्राइड और जंक फूड
- प्रोसेस्ड स्नैक्स
- रेड मीट और फैटी मीट प्रोडक्ट
- पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड
- भरपूर ऑयल में पका खाना
ये सभी ऐसे फूड हैं जिनमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है। स्टडी के मुताबिक यही फैट लिवर में बायोलॉजिकल बदलावों को ट्रिगर करता है।
क्या इसका मतलब है फैट पूरी तरह से छोड़ दें?
यह स्टडी फैट ही पूरी तरह छोड़ने की सलाह नहीं देती। फैट हमारे शरीर को ऊर्जा देता है और कुछ फैटी एसिड हमारे लिए जरूरी भी हैं। फर्क सिर्फ इतना है आप किस तरह का फैट और कितनी मात्रा में ले रहे हैं। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड्स से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इसके बजाय आपको नट्स, सीड्स, एवोकाडो जैसे हेल्दी फैट वाले फूड्स और अलसी, चिया सीड्स जैसे ओमेगा-3 फैट वाले फूड्स खाने चाहिए।
हाई फैट डाइट बनती है कई अन्य बीमारियों का कारण
हाई-फैट डाइट का असर सिर्फ लिवर पर नहीं होता, बल्कि इसके कारण हार्ट-डिजीज, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है।
कुल मिलाकर आप हर दिन के खाने में जो भी खाते हैं, उसका असर आपके एनर्जी लेवल और मोटापे के साथ-साथ आपके शरीर के अंदर मौजूद अंगों की सेहत पर भी पड़ता है। डाइट से हाई फैट, हाई कोलेस्ट्रॉल वाले फूड्स को निकालकर आप खुद को रोगमुक्त रख सकते हैं और अपेक्षाकृत ज्यादा लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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Jan 02, 2026 19:39 IST
Modified By : Anurag GuptaJan 02, 2026 19:36 IST
Published By : Anurag Gupta
