Fri Sep 11, 2026 | 08:47 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

पेट में बार-बार गैस बनना ल‍िवर की गड़बड़ी तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें कारण

पेट में बार-बार गैस, ब्लोटिंग या थोड़ा खाने पर भारीपन होता है? इसे सिर्फ पाचन की समस्या न समझें। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि लगातार गैस लिवर की गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। जानें कारण, लक्षण और समय पर जांच क्यों जरूरी है?

पेट में लगातार गैस, जैसे पेट फूलना, बार-बार गैस निकलना या थोड़ा सा खाने के बाद ही भारीपन की शिकायतें आम होती जा रही हैं। ज्‍यादातर लोग इसे सामान्य पाचन समस्या मान लेते हैं जैसे ज्‍यादा खाना, अपच या किसी खाने से न पचना। हालांकि ये कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार गैस होना हमेशा सिर्फ पेट की बीमारी नहीं होता। कई मामलों में यह लिवर की अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करने से इलाज में देर हो सकती है। इस लेख में जानेंगे पेट में गैस बनने जैसे लक्षण और ल‍िवर की बीमारी के बीच का संबंध और डॉक्‍टर से जानेंगे सही इलाज। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist, Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

पेट की गैस ल‍िवर की बीमारी का संकेत है: Dr. K. S. Somasekhar Rao

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लिवर हमारे शरीर का अहम अंग है, जो पित्त (Bile) बनाता है। पित्त फैट को पचाने में मदद करता है। Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि जब लिवर ठीक से काम नहीं करता जैसे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, सिरोसिस या शुरुआती लिवर फाइब्रोसिस में, तो पित्त के बनने की प्रक्र‍िया प्रभावित हो जाती है। इससे फैट सही से नहीं पचता और आंतों में खाना सड़ने लगता है, जिससे ज्यादा गैस बनती है। इसके लक्षण पेट फूलना, डकार आना, पेट में असहजता और शौच की आदतों में बदलाव जैसे हो सकते हैं, जो आम पाचन समस्याओं जैसे लगते हैं।

लिवर से जुड़ी गैस अक्सर-

  • थकान
  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
  • गहरे रंग का पेशाब
  • बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षणों के साथ भी दिखाई देती है, जो सामान्य एसिडिटी या आईबीएस में नहीं होते।

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नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज हो सकती है कारण

आजकल नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) बहुत आम हो गई है, खासकर शहरी भारत में, जहां मोटापा, डायबिटीज और कम शारीरिक गतिविधि बढ़ रही है। कई बार यह बीमारी सिर्फ गैस के रूप में ही सामने आती है। इसके अलावा वायरल हेपेटाइटिस या अल्‍कोहल से हुआ नुकसान भी जोखिम बढ़ाता है।

गैस दो हफ्ते से ज्‍यादा बनी रहे तो जांच कराएं

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि बार-बार एंटासिड लेने या खुद से अंदाजा लगाने के बजाय, अगर गैस दो हफ्ते से ज्यादा बनी रहे या ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम बढ़ना, अल्ट्रासाउंड में फैट जमा होना या फाइब्रोस्कैन में लिवर की सख्ती जैसे लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। साधारण जांच जैसे स्टूल टेस्ट, पेट का अल्ट्रासाउंड या लिवर फंक्शन टेस्ट से कारण पता चल सकता है।

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सही डाइट और एक्‍सरसाइज से फैटी ल‍िवर ठीक हो सकता है

अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान होने पर इलाज बहुत असरदार होता है। सही डाइट, वजन कम करना और नियमित व्यायाम से 70 से 80% मामलों में फैटी लिवर (Fatty Liver) ठीक हो सकता है। ल‍िवर इंफेक्‍शन या सूजन होने पर दवाओं और आधुनिक इलाज से लाभ मिलता है।

न‍िष्‍कर्ष:

अपने लिवर का ध्यान रखें। अगर गैस लगातार बनी हुई है, तो यह लिवर की चेतावनी हो सकती है। बेहतर सेहत और मानसिक शांति के लिए जांच करवाने में देर न करें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Dec 24, 2025 16:24 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Dec 24, 2025 16:24 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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