क्या आप जानते हैं कोविड के कारण चर्चा में आए इन 7 शब्दों का सही मतलब?

कोरोना से जुड़े जरूर शब्‍दों को आप हर द‍िन पढ़ रहे हैं पर क्‍या इनका असली मतलब आपको पता है, चल‍िए समझते हैं आसान भाषा में कोरोना की टर्मिनोलॉजी 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: May 19, 2021
क्या आप जानते हैं कोविड के कारण चर्चा में आए इन 7 शब्दों का सही मतलब?

कोरोना अभी हमारे ल‍िए एक नया शब्‍द है। बीते एक साल से हम इससे जुड़े शब्‍दों के बारे में सुन चुके हैं। कुछ लोगों को मेड‍िकल शब्‍दों को समझने में मुश्‍क‍िल होती है पर इस समय आपके ल‍िए कोव‍िड टर्मि‍नोलॉजी (Terminology) को समझना जरूरी है क्‍योंक‍ि आपको या आपके पर‍िवार को कभी भी क‍िसी मेडिकल हेल्‍प की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपके पास सही जानकारी होगी तो आप गंभीर स्‍थ‍ित‍ि को टाल सकते हैं। बहुत से लोगों को रैप‍िड टेस्‍ट, ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर जैसे शब्‍दों का मतलब नहीं पता होता। इसल‍िए इस लेख में आप कोरोना से जुड़े उन सभी जरूरी शब्‍दों के मतलब समझेंगे ज‍िनसे आपको कोरोना काल के दौरान इलाज करवाने में मदद म‍िल सकती है। एस‍िप्‍मटोमैट‍िक, हाइपोक्‍ज़‍िमा, एसपीओ2, आर-पीसीआर जैसे टर्म्स को इस लेख में आसान भाषा में बताया गया है। कोरोना से जुड़े जरूरी टर्म्स और उसका मतलब जानने के लिए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की। 

corona related terms

1. क्‍वारंटीन (Quarantine)

क्‍वारंटीन होने पर व्‍यक्‍त‍ि खुद को वायरस होने की आशंका से अलग कर लेता है। अगर आपके घर में कोई बीमार है और उसे कोविड होने की आशंका है तो र‍िपोर्ट आने तक आप उस व्‍यक्‍त‍ि को घर में क्‍वारंटीन कर सकते हैं। जो लोग क्‍वारंटीन रहते हैं वो दूसरों से दूरी बनाकर रखते हैं और लक्षण खत्‍म होने तक या र‍िपोर्ट आने तक घर के अलग ह‍िस्‍से में खुद को रखते हैं। 

क्‍वारंटीन और आइसोलेशन में क्‍या फर्क है? (Difference between quarantine and isolation)

क्‍वारंटीन और आइसोलेशन दो अलग शब्द हैं। जो व्‍यक्‍त‍ि क्‍वारंटीन होता है उसमें वायरस होने की आशंका होती है और ये संक्रमण दूसरों को न हो इसल‍िए वो खुद को अलग कर लेता है वहीं आइसोलेशन का मतलब जो व्‍यक्‍त‍ि संक्रम‍ित है वो खुद को घर में दूसरों से अलग कर लेता है। 

2. आरटी-पीसीआर टेस्‍ट (RT-PCR test)

rt-pcr test

आरटी-पीसीआर RT-PCR का मतलब होता है Real-Time reverse transcription-polymerase Chain Reaction (RT-PCR) जो ये बताता है क‍ि आप कोरोना संक्रम‍ित हुए हैं या नहीं। इसके ल‍िए आपके गले या नाक से स्‍वैब ल‍िया जाता है। इसके बाद इसे लैब में टेस्‍ट क‍िया जाता है। अगर र‍िपोर्ट पॉज‍िट‍िव आती है तो मतलब आपको कोरोना है। 

आरटी-पीसीआर और रैप‍िड एंटीजन टेस्‍ट में क्‍या फर्क है? (Difference between RT-PCR and rapid antigen test)

कोविड के ल‍िए एक और टेस्‍ट क‍िया जाता है जि‍से हम रैप‍िड एंटीजन टेस्‍ट कहते हैं। इसका र‍िजल्‍ट तुरंत पता चल जाता है। ये टेस्‍ट ज्‍यादातर तब क‍िया जाता है जब मरीज को इस बात का पता हो क‍ि उसे कोरोना हुआ है। हालांक‍ि ये टेस्‍ट आरटी-पीसीआर से कम इफेक्‍ट‍िव माना जाता है। अगर आपकी रैप‍िड एंटीजन र‍िपोर्ट पॉज‍िट‍िव है तो मतलब आपको कोरोना है और अगर नेग‍ेट‍िव है तो आपको आरटी-पीसीआर टेस्‍ट करवाना चाह‍िए।

3. ऐसिम्पटोमैटिक (Asymptomatic)

डॉ सीमा यादव ने बताया क‍ि अगर डॉक्‍टर आपको बोलते हैं क‍ि आप ऐसिम्पटोमैटिक हैं तो इसका मतलब ये है कि आप कोरोना से संक्रम‍ित हो गए हैं पर आपकी बॉडी में कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं। ऐसे मरीज इस बात से अंजान रहते हैं क‍ि उन्‍हें कोरोना हुआ है और वो एहत‍ियात नहीं बरत पाते जि‍सके चलते दूसरे लोगों को भी कोव‍िड हो जाता है। ऐस‍िम्‍पटोमैट‍िक होने पर कोरोना तो बॉडी में रहता है पर उसकी मौजूदगी के लक्षण बॉडी को पता नहीं चलते। ऐस‍िम्‍पटोमैट‍िक मरीजों को 14 द‍िनों तक संक्रमण रह सकता है।

ऐस‍िम्‍पटोमैट‍िक की तीन कैटेगरी होती है-

इसे भी पढ़ें- क्या पहली और दूसरी डोज में अलग वैक्सीन ली जा सकती हैं? जानकारी के लिए देखें ये वीडियो

4. ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrator)

oxygen concentrator

ऑक्‍सीजन सिलिंडर के बाद, कोरोना काल में सबसे ज्‍यादा चर्चा ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर पर हुई है। इन द‍िनों ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर का इस्‍तेमाल कोरोना मरीजों के ल‍िए क‍िया जा रहा है। ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर की मदद से वातावरण से ऑक्‍सीजन लेकर, मरीज के शरीर तक पहुंचती है। हमारे वातावरण में 21 प्रत‍िशत ऑक्‍सीजन और 78 प्रत‍िशत नाइट्रोजन पाई जाती है। कंसंट्रेटर में मौजूद एयर फ‍िल्‍टर की मदद से नाइट्रोजन बाहर न‍िकल जाता है और ऑक्‍सीजन को फ‍िल्‍टर कर मरीज तक पहुंचा द‍िया जाता है। ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर को लंबे समय तक लगातार काम कर सकते हैं। हालांक‍ि ये मरीज को गंभीर स्‍थित‍ि में ऑक्‍सीजन नहीं दे सकते। इनका इस्‍तेमाल उन मरीजों के ल‍िए क‍िया जाता है ज‍िन्‍हें सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो या कोव‍िड के माइल्‍ड लक्षण वाले मरीज हों। 

ऑक्‍सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर में क्‍या फर्क है?

ऑक्‍सीजन सिलिंडर में गैस होती है और खत्‍म होने पर इसे र‍िफिल करवाना पड़ता है। इसमें मास्‍क और नेसल ट्यूब नहीं होती जबक‍ि ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर पोर्टेबल होता है उसमें मास्‍क और नेसल ट्यूब होती है ज‍िसको सीधे मरीज से जोड़ द‍िया जाता है। कंसंट्रेटर ब‍िजली की मदद से चलता है और एक म‍िनट में केवल 5 से 10 लीटर ऑक्‍सीजन ही इससे म‍िल सकती है। जबक‍ि एक आम व्‍यक्‍त‍ि को एक म‍िनट में 7 से 8 लीटर ऑक्‍सीजन की जरूरत होती है। 

5. एसपीओ2 (SPO2)

कोरोना की दूसरी लहर में आपने देखा ही क‍ि कैसे लोगों को मेडिकल ऑक्‍सीजन की कमी से जूझना पड़ा। ऑक्‍सीजन का लेवल चेक करने के लि‍ए अब ऑक्‍सीमीटर हमारी ज‍िंदगी का ह‍िस्‍सा बन चुका है। एसपीओ2 SPO2 का मतलब होता है हमारे खून में क‍ितना ऑक्‍सीजन मौजूद है। मतलब क‍ितना प्रत‍िशत ऑक्‍सीजन हमारी ब्‍लड वैसल्‍स में मौजूद है ताक‍ि हम सांस ले सकें। नॉर्मल व्‍यक्‍त‍ि के शरीर में SPO2 का स्‍तर 95 से 100 के बीच रहता है। अगर ये स्‍तर 90 के नीचे जाता है तो व्‍यक्‍त‍ि को तुरंत डॉक्‍टर के पास ले जाएं।

इसे भी पढ़ें- कितना होना चाहिए शरीर का सामान्य तापमान? जानें वयस्कों, बच्चों और शिशुओं में बदलते तापमान का कारण और संकेत 

6. ब्‍लड ऑक्‍सीजन लेवल कम होने को कहते हैं हाइपोक्‍ज‍़िमा (Hypoxemia) 

हाइपोक्‍ज‍़िमा (Hypoxemia) चिंता का व‍िषय है। जब हमारा नॉर्मल ब्‍लड ऑक्‍सीजन लेवल नॉर्मल से कम होता है तो उसे हाइपोक्‍ज‍़िमा कहा जाता है। ऑक्‍सीजन का स्‍तर ज‍ितना कम होगा, बीमारी उतनी गंभीर होती जाती है। हाइपोक्‍ज‍़िमा होने पर चेस्‍ट में दर्द, कंफ्यूजन, स‍िर दर्द या हार्टबीट तेज महसूस हो सकती है। 

7. सॉर्स क्‍या है? (SARS)

सॉर्स का मतलब होता है सीव‍ियर एक्‍यूट र‍ेस्‍प‍िरेट्ररी स‍िंड्रोम ज‍िसे हम शॉर्ट फॉर्म में सॉर्स (SARS) कहते हैं। ये वायरल र‍ेस्‍प‍िरेट्ररी ड‍िस्‍ऑर्डर है जो कोरोना वायरस के कारण होता है। सॉर्स एक एयरबॉर्न वायरस है जो सलाईवा की छोटी ड्रापलेट्स के जर‍िए भी फैल सकता है। कुछ भी छूने से ये वायरस एक से दूसरे में फैल सकता है। सॉर्स वैसे तो 2 से 7 द‍िन तक रहता है पर ये 10 या उससे ज्‍यादा द‍िनों के ल‍िए भी बॉडी में रह सकता है। 

कोरोना से जुड़ी जानकारी को हास‍िल करने के ल‍िए व‍िश्‍वसनीय सूत्रों की मदद लें, कोरोना को लेकर कई अफवाहें सोशल मीड‍िया पर आपको देखने म‍िलेंगी पर क‍िसी को भी आधार मानकर अधूरी जानकारी के फेर में न पड़ें। 

Read more on Miscellaneous in Hindi 

Disclaimer