
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाने वाली जरूरत बन चुकी है। देर रात तक मोबाइल स्क्रॉल करना, ओटीटी पर एक एपिसोड और देखना, काम का दबाव या फिटनेस को लेकर जरूरत से ज्यादा जुनून, इन सबके बीच हम अक्सर नींद को पीछे छोड़ देते हैं। कई लोग सोचते हैं कि अगर वे रोज जिम जा रहे हैं, प्रोटीन ले रहे हैं और नियमित वर्कआउट कर रहे हैं, तो नींद थोड़ी कम भी हो जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन क्या वाकई ऐसा है? अक्सर आपने देखा होगा कि पूरी मेहनत के बावजूद मसल्स में दर्द बना रहता है, शरीर जल्दी थक जाता है या फिर पहले जैसी ताकत महसूस नहीं होती। कई बार लोग इसे ओवरट्रेनिंग या गलत डाइट का नतीजा मान लेते हैं, जबकि असली वजह कुछ और ही होती है। इस लेख में पारस हेल्थ, गुरुग्राम के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एचओडी, डॉ आरआर दत्ता (Dr. RR Dutta, HOD, Internal Medicine, Paras Health, Gurugram) से जानिए, क्या नींद पूरी न होने से मसल रिकवरी धीमी हो जाती है?
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क्या नींद पूरी न होने से मसल रिकवरी धीमी हो जाती है? - Does lack of sleep affect muscle recovery
डॉ आरआर दत्ता बताते हैं कि जब हम एक्सरसाइज करते हैं, खासकर वेट ट्रेनिंग या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट, तो मसल फाइबर में छोटे-छोटे नुकसान होते हैं। इन्हें ठीक करने और मसल्स को मजबूत बनाने का काम शरीर आराम की स्थिति में करता है। इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त नींद बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसी दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है।
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- जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब शरीर ग्रोथ हार्मोन रिलीज करता है। यही हार्मोन मसल्स की मरम्मत, नई मसल्स के निर्माण और टिशू रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है।
- इसके अलावा नींद के दौरान कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का लेवल कम होता है, जिससे शरीर को हील होने का मौका मिलता है।
- अगर नींद पूरी नहीं होती, तो ये हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर मसल रिकवरी पर पड़ता है।
नींद की कमी का मसल रिकवरी पर असर
नींद की कमी से शरीर पर्याप्त मात्रा में ग्रोथ हार्मोन नहीं बना पाता। इससे मसल्स की मरम्मत धीमी हो जाती है और मसल्स में दर्द ज्यादा समय तक बना रह सकता है। इसके अलावा नींद कम होने पर कोर्टिसोल का लेवल बढ़ जाता है, जो मसल ब्रेकडाउन को बढ़ावा देता है। इसका मतलब है कि जितनी मसल्स आप मेहनत से बनाते हैं, उतनी ही तेजी से वे टूटने भी लगती हैं।
परफॉर्मेंस और स्ट्रेंथ पर असर
जो लोग पूरी नींद नहीं लेते, उनमें वर्कआउट के दौरान थकान जल्दी महसूस होती है। स्ट्रेंथ, स्टैमिना और फोकस कम हो जाता है। ऐसे में एक्सरसाइज के दौरान चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, क्योंकि शरीर पहले से थका हुआ होता है और रिफ्लेक्स धीमे हो जाते हैं।
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अच्छी मसल रिकवरी के लिए कितनी नींद जरूरी है? - How much sleep for muscle recovery
डॉ आरआर दत्ता के अनुसार, एक्टिव लाइफस्टाइल या रेगुलर वर्कआउट करने वाले लोगों को रोजाना 7 से 9 घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए। सोने का समय नियमित रखना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और कैफीन से दूरी बनाना नींद की क्वालिटी सुधारने में मदद करता है। साथ ही दिनभर बैलेंस डाइट और पर्याप्त पानी पीना भी रिकवरी को सपोर्ट करता है।
निष्कर्ष
नींद की कमी मसल रिकवरी को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। बिना पर्याप्त नींद के न तो मसल्स ठीक से रिपेयर हो पाती हैं और न ही मजबूत बनती हैं। इसका असर परफॉर्मेंस, स्ट्रेंथ, दर्द, सूजन और चोट के जोखिम तक दिखाई देता है। अगर आप वाकई फिट रहना चाहते हैं और वर्कआउट का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो नींद को अपनी फिटनेस रूटीन का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है।
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FAQ
मसल्स में दर्द क्यों होता है?
मसल्स में दर्द आमतौर पर ज्यादा एक्सरसाइज, नई वर्कआउट रूटीन, मसल फाइबर में माइक्रो टियर की वजह से होता है।मसल रिकवरी में कितना समय लगता है?
हल्की एक्सरसाइज के बाद मसल्स 24 घंटे में रिकवर हो सकती हैं, जबकि हैवी वेट ट्रेनिंग के बाद 48-72 घंटे तक का समय लग सकता है।मसल्स में क्रैम्प क्यों आता है?
पानी की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, थकान और मसल ओवरयूज की वजह से मसल्स में खिंचाव हो सकता है।
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Jan 05, 2026 09:07 IST
Published By : Akanksha Tiwari
