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PCOS vs PCOD: पीसीओएस और पीसीओडी में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानें

PCOS vs PCOD: अक्सर महिलाएं पीसीओएस और पीसीओडी को एक ही समझती हैं। लेकिन इन दोनों के बीच अंतर होता है। पीसीओएस और पीसीओडी के बीच अंतर-

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Feb 14, 2022Updated at: Mar 02, 2022
PCOS vs PCOD: पीसीओएस और पीसीओडी में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानें

pcos and pcod in hindi: आजकल लड़कियों या महिलाओं में पीसीओएस और पीसीओडी सामान्य बीमारियां बन गई हैं। यह अधिकतर उन लड़कियों में देखने को मिलती हैं, जो 18 वर्ष से लेकर 35 की उम्र तक होती हैं। अनियमित पीरियड्स पीसीओएस और पीसीओडी दोनों का सामान्य लक्षण होता है। पीसीओएस की तुलना में पीसीओडी महिलाओं में अधिक आम हो गया है। मणिपाल अस्पताल ओल्ड एयरपोर्ट रोड सलाहकार-प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉक्टर हेमानंदिनी जयरामन (Dr. Hemanandini Jayaraman, Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Manipal Hospital Old Airport Road) से जानें पीसीओएस और पीसीओडी के बीच अंतर-

पीसीओएस क्या होता है? (what is pcos in hindi)

पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (polycystic ovarian syndrome) एक गंभीर बीमारी होती है। इसमें मेटाबॉलिक और हॉर्मोनल असंतुलन अधिक होता है। जिन लड़कियों या महिलाओं को लंबे समय तक पीरियड्स नहीं आते, इसमें पीसीओएस होने की संभावना अधिक रहती है। यह समस्या मेनोपॉज तक रह सकती है। पीसीओएस की स्थिति में महिलाओं में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन का रिलीज होने लगता है, इससे ओव्यूलेशन में अनियमितता होती है। यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकता है। पीसीओडी की तुलना में पीसीओएस अधिक गंभीर हो सकता है, इसमें तेजी से वजन बढ़ता है।

pcod and pcos

पीसीओडी क्या है? (what is pcod in hindi)

पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (polycystic ovary disorder symptoms) एक ऐसी चिकित्सा स्थिति है, जिसमें अंडाशय समय से पहले एग्स रिलीज कर देता है। यह सिस्ट में बदल जाते हैं। पीसीओडी की स्थिति में महिलाओं की ओवरी का आकार बड़ा हो जाता है। पीसओडी महिलाओं में एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) की अधिकता से होने वाला विकार है।

पीसीओडी और पीसीओएस के लक्षण (PCOS and PCOD Symptoms)

pcos and pcod

पीसीओएस और पीसीओडी के बीच अंतर (difference between pcos and pcod)

डॉक्टर हेमानंदिनी जयरामन बताती हैं कि पीसीओएस और पीसीओडी दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। इन दोनों के शुरुआती लक्षण और इलाज एक जैसे होते हैं। शुरुआत में दोनों तो जीवनशैली में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है। जानें पीसीओएस और पीसीओडी के बीच अंतर-

  • पीसीओएस एक गंभीर बीमारी है। जबकि पीसीओडी एक सामान्य स्थिति है, इसे जीवनशैली में बदलाव करके भी ठीक किया जा सकता है।
  • हेल्दी फूड, योगा या व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर पीसीओडी को ठीक किया जा सकता है। जबकि पीसीओएस एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। इसमें लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ ही दवाइयों का सेवन करना भी जरूरी होता है। 
  • दुनियाभर में लाखों करोड़ों महिलाएं पीसीओडी की समस्या का सामना कर रही हैं। यानी यह एक सामान्य समस्या है। जबकि पीसीओएस, पीसीओडी की तुलना में काफी कम महिलाओं में देखा जाता है।
  • पीसीओएस की स्थिति में कंसीव करने में परेशानी होना या कंसीव के बाद मिसकैरेज होने का खतरा बना रहता है। पीसीओडी में कंसीव किया जा सकता है।
  • पीसीओएस होने पर प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है। अगर पीसीओएस का इलाज समय पर न किया गया, तो यह यूटरस कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • पीसीओएस एक endocrine system का विकार है। यह हार्मोनल डिसऑर्डर का कारण बन सकता है। जबकि पीसीओडी इसका शुरुआती लक्षण हो सकता है।

पीसीओडी और पीसीओएस से कैसे बचें? (how to prevent pcos and pcod)

आजकल के बढ़ते तनाव, व्यस्त जीवनशैली की वजह से महिलाओं में कई समस्याएं जन्म ले रही हैं। इन्हीं में पीसीओडी और पीसीओएस भी शामिल हैं। लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो पीसीओडी और पीसीओएस से बचा जा सकता है।

  • तनाव, चिंता कम करें।
  • वजन को नियंत्रण में रखें।
  • हेल्दी इटिंग हैबिट्स फॉलो करें।
  • योगा या व्यायाम को अपनी जीवनशैली में शामिल करें।
  • हमेशा खुश रहने की कोशिश करें।

अगर आपको पीसीओएस या पीसीओडी (PCOS and PCOD) से जुड़ा कोई भी लक्षण नजर आता है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इसके इलाज के लिए तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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