ये 4 जड़ी बूटियां लिवर को बनाएंगी हेल्दी, हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में भी आएगी कमी

हेपेटाइटिस सी लिवर से जुड़ी एक समस्या है। यह स्थिति काफी गंभीर होती है। ऐसे में आप कुछ जड़ी-बूटियों का सेवन कर सकते हैं।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jun 09, 2022Updated at: Jun 09, 2022
ये 4 जड़ी बूटियां लिवर को बनाएंगी हेल्दी, हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में भी आएगी कमी

Ayurvedic Treatment for Hepatitis C: हेपेटाइटिस एक गंभीर बीमारी है। इसी का एक प्रकार हेपेटाइटिस सी है। हेपेटाइटिस सी वायरल इंफेक्शन है, जो लिवर को क्षतिग्रस्त करता है। हेपेटाइटिस सी से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं यह लिवर फेलियर या लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है। हेपेटाइटिस सी का वायरस संक्रमित खून से फैलता है। थकान, कमजोरी, त्वचा व आंखों में पीलापन, पेशाब का गहरा रंग, खुजली होना, पैरों में सूजन, चक्कर आना, अचानक से वजन कम होना और आसानी से खरोंच या चोट लग जाना हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में शामिल हैं। आप कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की मदद से हेपेटाइटिस सी के लक्षणों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।  

तो चलिए रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदाचार्य श्रेय शर्मा से विस्तार से जानते हैं हेपेटाइटिस सी के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां-

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1. कटुकी

आयुर्वेद में कटुकी जड़ी-बूटी का उपयोग कई रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। यह हेपेटाइटिस जैसे लिवर रोगों के लक्षणों को कम करने में मदद करती है। कटुकी का सेवन गोली के रूप में किया जा सकता है। लेकिन इस दवा को लेने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

2. कालमेघ 

कालमेघ पित्त को साफ करने में काफी उपयोगी माना जाता है। हेपेटाइटिस सी के लक्षणों को कम करने के लिए कालमेघ का काढ़ा पीना फायदेमंद हो सकता है। यह जडी-बूटी पाचन तंत्र में भी सुधार करती है। कालमेघ शारीरिक कमजोरी को दूर करता है, एसिडिटी से भी राहत दिलाता है। इसके अलावा पीलिया रोग में भी कालमेघ का इस्तेमाल किया जाता है। कालमेघ लिवर से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने में फायदेमंद हो सकता है।

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3. पुनर्नवा

आयुर्वेद में पुनर्नवा जड़ी-बूटी को काफी फायदेमंद माना गया है। यह जड़ी-बूटी कई रोगों से लड़ने में मदद करती है। साथ ही आपको स्वस्थ भी रखती है। हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में कमी करने के लिए भी पुनर्नवा का उपयोग किया जा सकता है। पुनर्नवा की पत्तियों का रस इसके लिए फायदेमंद हो सकता है। आप चाहें तो इसका सेवन काढ़ा, जूस, पेस्ट और पाउडर के रूप में भी कर सकते हैं।

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4. गुडूची

गुडूची का उपयोग हेपेटाइटिस जैसे लिवर विकारों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। गुडूची शारीरिक कमजोरी, पीलिया की समस्या को दूर करता है। साथ ही पाचन में भी सुधार करता है। गुडूची का सेवन अर्क, पाउडर के रूप में लिया जा सकता है। गुडूची लिवर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है। यह खून को साफ करता है। साथ ही लिवर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। नियमित रूप से गुडूची का सेवन करने से लिवर संबंधी गंभीर रोगों को दूर किया जा सकता है

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हेपेटाइटिस सी से बचाव के उपाय- hepatitis c prevention tips

  • हेपेटाइटिस सी से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के निजी सामान का इस्तेमाल करने से बचें। 
  • संक्रमित व्यक्ति के नीडल, सूई, रेजर आदि को उपयोग में न लाएं। 
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से बचें। असुरक्षित यौन संबंध से भी बचें।
  • हेपेटाइटिस सी से संक्रमित व्यक्ति के रक्त को छून से बचें। क्योंकि रक्त से यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

अगर आपको भी हेपेटाइटिस सी का कोई लक्षण नजर आता है, तो इस स्थिति को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। क्योंकि हेपेटाइटिस सी की वजह से लिवर पूरी तरह से डैमेज हो सकता है। इतना ही नहीं हेपेटाइटिस जानलेवा भी हो सकता है। आप ऊपर बताए गए जड़ी-बूटियों को आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। इससे हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में कमी हो सकती है।

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