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पीसीओएस (PCOS) और फैटी लिवर के बीच क्या संबंध है? जानें एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं ये रोग

PCOS and Fatty Liver: क्या आप जानते हैं महिलाओं को होने वाली आम समस्या पीसीओएस, फैटी लिवर रोग का कारण भी बन सकता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 03, 2022Updated at: May 04, 2022
पीसीओएस (PCOS) और फैटी लिवर के बीच क्या संबंध है? जानें एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं ये रोग

PCOS and Fatty Liver: पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी पीसीओएस आजकल महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या बन गई है। अनियमित पीरियड्स, मासिक धर्म के दौरान अधिक दर्द, मुहांसे, पेल्विक क्षेत्र में दर्द, चेहरे पर अनचाहे बालों का उगना और कंसीव करने में दिक्कत आना पीसीओएस के लक्षण (PCOS Symptoms in Hindi) माने जाते हैं। पीसीओएस महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा पीसीओएस मोटापा, डायबिटीज समेत कई बीमारियों का कारण बनता है। इसमें लिवर से जुड़ा रोग फैटी लिवर भी शामिल है। जी हां, पीसीओएस लिवर को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। चलिए विस्तार से जानते हैं पीसीओएस और फैटी लिवर में क्या संबंध (Link Between pcos and Fatty Liver) है। मणिपाल अस्पताल व्हाइटफील्ड की सलाहकार-प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉ. अनीता तलवार से जानें-

फैटी लिवर क्या है? (What is Fatty Liver)

फैटी लिवर रोग, लिवर की सबसे आम बीमारी बन गई है। फैटी लिवर की समस्या एल्कोहॉलिक और नॉन एल्कोहॉलिक हो सकती है। वैसे तो माना जाता है कि फैटी लिवर रोग अधिक मात्रा में शराब पीने की वजह से होता है, लेकिन यह शराब न पीने वाले लोगों में भी हो सकती है। फैटी लिवर की समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों हो सकती है। महिलाओं को होने वाली एक आम समस्या पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और फैटी लिवर के बीच एक गहरा संबंध होता है। उल्टी महसूस होना, भूख न लगना, कमजोरी, थकान, वजन घटना, पाचन में गड़बड़ी फैटी लिवर के लक्षण (Fatty Liver Symptoms) होते हैं।

fatty liver

पीसीओएस और फैटी लिवर में संबंध (Link Between PCOS and Fatty Liver in Hindi)

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से होता है। यह ओव्यूलेशन और प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करता है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं में अकसर फैटी लिवर की समस्या देखने को मिलती है। खासकर नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग। पीसीओएस वाली महिलाओं में फैटी लिवह होने का जोखिम अधिक रहता है। नेशनल लाइब्रेरी और मेडिसिन के अनुसार नॉन एल्कोहॉलिक लिवर रोग पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रोगियों में  अकसर होता है। मोटापे और इंसुलिन प्रतिरोध को पीसीओएस में होने वाले लिवर रोग का मुख्य कारण माना जाता है। अधिक एंड्रोजन नॉन एल्कोहॉलिक लिवर रोग के विकास का कारक हो सकता है। पीसीओएस (PCOS) और फैटी लिवर के बीच संबंध होता है।

पीसीओएस, फैटी लिवर का कारण क्यों बनता (Relation Between PCOS and Fatty Liver in Hind) है? दरअसल, पीसीओएस इंसुलिन प्रतिरोध के द्वारा उत्पन्न होता है। इस विकृति के कारण पीसीओएस वाली कुछ महिलाओं में नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग देखने को मिलता है। इसके अलावा पीसीओएस की वजह से मोटापा बढ़ता है, एंड्रोजन की अधिकता होती है, इससे लिवर में फैट बढ़ता है। लिवर रोग से बचाव के लिए पीसीओएस का समय पर इलाज जरूरी है। साथ ही पीसीओएस होने पर मोटापे को भी कंट्रोल में रखना चाहिए। इससे कुछ हद तक लिवर रोग से बचा जा सकता है।

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पीसीओएस की वजह से होने वाली फैटी लिवर के लक्षण

लगातार बढ़ता वजन, हाई एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवल, कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल इसके आम लक्षण होते हैं। पीसीओएस के बाद लिवर रोग से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करना जरूरी है। इसके लिए अपनी डाइट में चीनी, परिष्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचें। साथ ही कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रण में रखने की कोशिश करें। हेल्दी डाइट लें, अनहेल्दी फूड्स से परहेज करें और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

इस तरह से आप पीसीओएस के लक्षणों में कमी कर पाएंगी और लिवर के इस गंभीर रोग से अपना बचाव कर पाएंगी। अगर आपको पीसीओएस है, साथ ही लिवर खराबी का कोई लक्षण नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। समय पर इसका इलाज संभव हो सकता है, लेकिन इसके लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।

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