
सर्दियों का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है। इस मौसम में अक्सर लोगों को आंखों से जुड़ी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, जिसमें ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या भी शामिल है। सर्दियों में अक्सर ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या (dry eye kya hai) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिसके कारण लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या के होने के कारण हमें काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। ड्राई आई सिंड्रोम के कारण भी आंखों में ड्राइनेस, जलन, चुभन, रेडनेस और थकान की समस्या महसूस हो सकती है। हालांकि, लोगों के मन में अक्सर ये सवाल आता है कि सर्दियों में ड्राई आई की समस्या क्यों (aankho me dryness kyu hoti hai) बढ़ जाती है? आइए इस लेख में हम ग्वालियर के रतन ज्योति नेत्रालय के फाउंडर और डायरेक्टर, सर्जन डॉ. पुरेंद्र भसीन (Dr. Purendra Bhasin, Surgeon, Founder and Director of Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior) से जानते हैं।
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सर्दियों में ड्राई आई सिंड्रोम क्यों बढ़ जाती है?
डॉ. पुरेंद्र भसीन का कहना है कि सर्दियों में गांव से ज्यादा शहरों में रहने वाले लोगों में ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या (dry eye kyu hota hai) की शिकायत ज्यादा देखी जाती हैं, जिसके पीछे कई कारण शामिल हैं, जैसे।
1. हवा में नमी की कमी
सर्दियों के मौसम में तापमान में गिरावट के साथ-साथ हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी भी कम हो जाती है। हवा में नमी की कमी के कारण आंखों से निकलने वाले आंसू तेजी से वाष्पीकृत हो जाते हैं और आंखें लंबे समय तक नम नहीं रह पाती हैं। इसके अलावा ठंडी और तेज हवाएं सीधे आंखों पर असर डालती हैं, जिससे आंखों की बाहरी परत और ज्यादा ड्राई हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या बढ़ जाती है।
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2. हीटर और ब्लोअर का उपयोग
सर्दियों में ठंड से बचने के लिए लोग हीटर, ब्लोअर और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं। इन चीजों का उपयोग कमरे की हवा को ड्राई बना देते हैं, जिससे आंखों की नमी तेजी से कम या खत्म होने लगती है, जो ड्राई आई सिंड्रोम का कारण बन सकता है।
3. स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल
सर्दियों में लोग घर के बाहर निकलना कम पसंद करते हैं और अपना ज्यादातर समय सोकर या लेटकर गुजारते हैं। ऐसे में लंबे समय तक बंद कमरों में रहना और मोबाइल, लैपटॉप या टीवी जैसी स्क्रीन पर लगातार काम करने से भी यह समस्या बढ़ जाती है। दरअसल, स्क्रीन देखने के दौरान पलकें कम झपकती हैं और आंखें सही तरह से नम नहीं हो पाती हैं।

4. एलर्जी और इंफेक्शन
सर्दी के मौसम में आंखों में एलर्जी और इंफेक्शन का जोखिम भी बढ़ जाता है। धूल, धुआं और प्रदूषण के महीन कण आंखों में जमा होकर आंसुओं की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसके कारण आंखों में जलन, खुजली, रेडनेस और बार-बार पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं।
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5. थायराइड और ऑटोइम्यून
थायराइड डिजीज और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी सर्दियों में अपनी आंखों का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इन मरीजों में ड्राई आई की समस्या पहले से होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है और ठंड का मौसम आंखों में ड्राइनेस की समस्या को और बढ़ा सकती है। इसलिए, ऐसे लोगों को आंखों की नमी बनाए रखने और नियमित आई टेस्ट पर फोकस करना बहुत जरूरी है।
निष्कर्ष
सर्दियों में ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या होना काफी आम है। इसके पीछे कई कारण शामिल है, जिसमें मौसम में नमी की कमी, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, हीटर और ब्लोअर का इस्तेमाल है। इतना ही नहीं, उम्र बढ़ने के साथ ड्राई आई की समस्या सर्दियों में ज्यादा परेशान कर सकती है। बुजुर्गों में आंसू बनने की प्रक्रिया पहले से ही धीमी हो जाती है। ठंडा और ड्राई मौसम इस स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ देता है। इसके अलावा, कई दवाओं का सेवन, हार्मोनल बदलाव और पहले से मौजूद आंखों की बीमारियां भी ड्राई आई सिंड्रोम के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
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FAQ
सूखी आंखों का इलाज क्या है?
ड्राई आंखों की समस्या का इलाज करने के लिए आर्टिफिशियल आंसू और चिकनाई वाले जेल का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर कर सकते हैं।सूखी आंखों का कारण क्या है?
ड्राई आंखों की समस्या होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें उम्र बढ़ना, हार्मोनल बदलाव, स्क्रीन टाइम बढ़ाना, कॉन्टैक्ट लेंस और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण हो सकता है।सूखी आंखों के क्या लक्षण हैं?
ड्राई आंखों की समस्या के लक्षणों में जलन, किरकिरापन, खुजली, रेडनेस, आंखों में पानी आना, धुंधलापन, भारीपन और रोशनी को लेकर सेंसिटिविटी की समस्या शामिल है।
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Jan 02, 2026 12:49 IST
Modified By : Katyayani TiwariJan 02, 2026 12:49 IST
Published By : Katyayani Tiwari
