Navratri Special: नवरात्रि व्रत में क्यों नहीं खाते हैं लहसुन-प्याज? धार्मिक नहीं, जानें 3 आयुर्वेदिक कारण

Navratri Special: नवरात्रि के नौ दिनों में लहसुन और प्याज को धार्मिक रूप से वर्जित माना जाता है। ऐसा क्यों होता है, इसका जवाब आयुर्वेद के पास है।

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Oct 04, 2019
Navratri Special: नवरात्रि व्रत में क्यों नहीं खाते हैं लहसुन-प्याज? धार्मिक नहीं, जानें 3 आयुर्वेदिक कारण

हिन्‍दुओं में मनाया जाने वाला मां दुर्गा का पावन पर्व नवरात्रि देश के अलग-अलग कोनों में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि नवरात्रि के नौं दिनों में मांस-मछली, अंडे और प्‍याज-लहसुन का सेवन नहीं किया जाता। इन नौं दिनों तक सात्विक भोजन किया जाता है, जिसमें नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत के दौरान फल, सब्जियां, कुट्टू का आटा, साबुदाना, सामक चावल, डेयरी उत्पाद और सेंधा नमक को खाने में शामिल किया जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि नवरात्रि के दिनों प्‍याज-लहसुन जो कि शाकाहारी भोजन की सूची में और सब्जियों के परिवार का एक हिस्सा हैं, इन्‍हें खाने की इजाजत भी क्‍यों नहीं होती? अगर नहीं, तो आइए हम आपको बताते हैं। 

आयुर्वेद के अनुसार 

आयुर्वेद के अनुसार, खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, जो उनकी प्रकृति और उनके उपभोग के बाद शरीर में ट्रिगर होने वाली प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। जिसमें ये तीन श्रेणियां हैं- 

  1. राजसिक भोजन 
  2. तामसिक भोजन
  3. सात्विक भोजन

व्रत या उपवास के दौरान सात्विक भोजन करने के पीछे धार्मिक पहलू होने के अलावा, एक वैज्ञानिक कारण भी है। शरद नवरात्रि अक्टूबर-नवंबर के महीने में आती है, जो शरद ऋतु से सर्दियों के मौसम तक संक्रमण काल माना जाता है। मौसमी बदलाव के कारण इस दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस प्रकार, इस मौसम में सात्विक भोजन पर स्विच करने से आपके पाचन थोड़ा आराम मिलता है और आपके शरीर की सभी अशुद्धियों को साफ करने में मदद मिलती है। 

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सात्विक भोजन क्या हैं?

सात्विक का अर्थ है- शुद्ध, प्राकृतिक, महत्वपूर्ण, स्वच्छ और ऊर्जावान। यही वजह है कि सात्विक भोजन आपके शरीर की अशुद्धियों को दूर करने और आपको ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है। सात्विक भोजन में ताजे फल, दही, सेंधा नमक, कुछ मसाले, काली मिर्च, धनिया और मौसमी सब्जियाँ शामिल हैं।

राजसिक और तामसिक भोजन

राजसिक और तामसिक भोजन को अपवित्र और विनाशकारी माना जाता है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों को एक शुद्ध और सरल जीवन अपनाने की परंपरा होती है। इस समय के दौरान राजसिक और तामसिक खाद्य पदार्थों को खाने से आपका ध्यान भंग होता है। क्‍योंकि इनमें चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, मांस, मछली, लहसुन, प्याज, अंडा, शराब, मशरूम शामिल हैं। 

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नवरात्रि में प्याज और लहसुन क्यों छोड़ा जाता हैं?

प्याज और लहसुन को प्रकृति में तामसिक माना जाता है और कहा जाता है कि यह शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। प्याज भी शरीर में गर्मी पैदा करता है और इसलिए नवरात्रि में इसकी मनायी होती है। इसके अलावा, यह माना जाता है, कि प्याज के साथ लहसुन आपके दिमाग सुस्‍त बनाते हैं। इसके अलावा, प्याज और लहसुन जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देकर  व्यक्ति की चेतना को प्रभावित करती हैं। 

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