Who Should Avoid Sitopaladi Churna: आयुर्वेद में सितोपलादि चूर्ण को एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जो खासतौर पर खांसी, सांस संबंधी समस्याओं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि, सितोपलादि चूर्ण के फायदे तभी मिलते हैं जब इसे सही तरीके और उचित मात्रा में लिया जाए। बिना सही जानकारी के या आयुर्वेदाचार्य की सलाह के बिना इसका सेवन करने से शरीर पर उल्टा असर पड़ सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, एसिडिटी, पेट में जलन या पित्त संबंधी समस्याएं होती हैं, उन्हें इसका सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। इस लेख में रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से जानिए, सितोपलादि चूर्ण किसे नहीं खाना चाहिए?
सितोपलादि चूर्ण किसे नहीं खाना चाहिए? - Who Should Avoid Sitopaladi Churna
आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि सितोपलादि एक शीतवीर्य (ठंडी तासीर वाली) रसायन औषधि है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करती है और उन्माद (मानसिक तनाव) में भी लाभकारी मानी जाती है। लेकिन हर आयुर्वेदिक दवा की तरह, सितोपलादि चूर्ण का भी सेवन हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता। सितोपिलादि चूर्ण विभिन्न हर्बल सामग्री से मिलकर तैयार किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से वंशलोचन, पिप्पली और अन्य औषधियां शामिल होती हैं। इसकी तासीर ठंडी (शीतवीर्य) होने के कारण यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है और इससे खांसी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। आयुर्वेद में इसे उन्माद, कास, कंठ रोग जैसी समस्याओं के लिए बेहद लाभकारी (Who can take Sitopaladi Churna) माना जाता है।
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चूंकि यह चूर्ण ठंडी तासीर वाला होता है, इससे शरीर की पाचन अग्नि पर असर पड़ सकता है और पाचन विकार बढ़ सकते हैं। ऐसे में चिकित्सक की सलाह पर ही इसका सेवन (sitopaladi churna kise nahi khana chahiye) करना चाहिए। सितोपिलादि चूर्ण की तासीर शीतवीर्य होती है, इसलिए इसका सेवन सर्दी-जुकाम जैसी समस्या में नहीं करना चाहिए। सर्दी-जुकाम के दौरान शरीर में पहले से ठंडक होती है, और ऐसे में ठंडी तासीर वाले चूर्ण का सेवन स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इससे शरीर में कफ बढ़ सकता है और समस्या बढ़ सकती है।
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मिलावटी सितोपिलादि चूर्ण से बचें
आयुर्वेदाचार्य श्रेय शर्मा बताते हैं, यदि सितोपिलादि चूर्ण में वंशलोचन की गुणवत्ता सही नहीं है, तो इसकी तासीर गर्म हो सकती है। इससे शरीर में पित्त का असंतुलन हो सकता है, जिससे पित्त संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, अगर सितोपिलादि चूर्ण का वंशलोचन मिलावटी हो, तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
सितोपलादि चूर्ण कितनी मात्रा में लेना चाहिए? - Sitopaladi Churna Dosage
आयुर्वेद में सितोपिलादि चूर्ण की सेवन मात्रा उम्र के अनुसार निर्धारित की जाती है।
- 10 साल से छोटे बच्चे – 1.5 ग्राम
- 10-20 साल के बच्चे – 2 ग्राम
- 20 साल से अधिक उम्र के लोग – 2.5 से 3 ग्राम
यह मात्रा आयुर्वेदाचार्य की सलाह से बढ़ाई या घटाई जा सकती है और बच्चों को यह केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
सितोपिलादि चूर्ण एक प्रभावी और लाभकारी आयुर्वेदिक औषधि है, लेकिन इसका सेवन करते वक्त उचित सावधानी बरतनी चाहिए। इसके मिलावटी रूप से बचें, सर्दी-जुकाम में इसका सेवन न करें और पाचन समस्याओं वाले व्यक्तियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। सही सलाह और सही मात्रा में इसका सेवन करने से यह आपके स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, लेकिन चिकित्सक की देखरेख में ही इसका उपयोग करें।
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