बॉडी लैंग्वेज: मूड और इमोशन बदलने पर भी शरीर में आते हैं कई बदलाव, ऐसे पहचानें इन्हें

हमारा मूड या इमोशन बदलने से शरीर में कई शारीर‍िक लक्षण नजर आते हैं, उन्‍हें सही समय पर पहचानकर इलाज करवाना जरूरी है 

 
Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Jul 26, 2021 17:33 IST
बॉडी लैंग्वेज: मूड और इमोशन बदलने पर भी शरीर में आते हैं कई बदलाव, ऐसे पहचानें इन्हें

मानस‍िक और शारीर‍िक दर्द में से किसमें ज्‍यादा दर्द होता है? ये सवाल अक्‍सर मरीज अपने डॉक्‍टर से पूछते हैं इसका सही जवाब बता पाना मुश्‍क‍िल है पर मानस‍िक दर्द भी शारीरिक दर्द जि‍तना तकलीफदेह हो सकता है बल्‍क‍ि मान‍स‍िक दर्द के कारण शारीर‍िक दर्द की शुरूआत हो सकती है। ये दर्द आपके मन की व्‍यथा के मुताब‍िक घट या बढ़ सकता है और छोटे या लंबे अंतराल के ल‍िए आपके शरीर के साथ बना रह सकता है। मूड या इमोशन के असर से शरीर पर पड़ने वाला असर अगर लंबे समय तक रहे तो आपको ड‍िप्रेशन का श‍िकार बना सकता है, इसके अलावा शरीर मोटापे का श‍िकार हो सकता है। कुछ लोगों का वजन च‍िंता के कारण घट भी जाता है। मूड या इमोशन का शरीर पर क्‍या असर पड़ता है इसे जानने के ल‍िए पूरा लेख पढ़ें। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

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मूड या इमोशन बदलने पर शरीर में बदलाव क्‍यों होते हैं? (Causes of physical symptoms of emotions)

हम जो भी सोचते या करते या महसूस करते हैं उसका असर हमारे शरीर पर पड़ता है। इसे ही हम माइंड और बॉडी का तालमेल कहते हैं। अगर आप परेशान हैं या तनाव में है तो आपका शरीर आपको ऐसे संकेत देगा जैसे क‍ि कुछ ठीक नहीं है। जैसे मान ल‍ीज‍िए आपको डर लग रहा है या घबराइट हो रही है तो आपके शरीर का ब्‍लड प्रेशर बढ़ सकता है। आपका मूड बदल रहा है और शरीर में कुछ लक्षण नजर आ रहे हैं तो उन पर गौर करें। मूड या इमोशन आपकी हेल्‍थ पर बुरा असर भी डाल सकते हैं इसल‍िए मूड को ठीक रखना जरूरी है।

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मूड और इमोशन बदलने से शरीर में क्‍या बदलाव या लक्षण देखने को म‍िलते हैं? (Physical symptoms of emotions)

headache due to emotions

  • मूड बदलने पर आपको पीठ में दर्द महसूस हो सकता है। 
  • कुछ लोगों को मूड बदलने पर सीने में दर्द महसूस होता है। 
  • अगर मूड खराब है तो बहुत ज्‍यादा थकान महसूस होती है। 
  • कुछ लोगों को मूड बदलने पर डायर‍िया या कान्‍सट‍िपेशन की श‍िकायत होती है।
  • मूड बदलने या खराब होने पर आपको शरीर में दर्द की श‍िकायत हो सकती है। 
  • मन दुखी होने से कुछ लोगों का ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है। 
  • मूड अगर खराब है तो सोने में परेशानी यानी इंसोम्निया की श‍िकायत हो सकती है। 
  • मूड खराब होने पर स‍िर दर्द भी हो सकता है। 
  • मूड बदलने से भूख ज्‍यादा लगना या भूख न लगने की श‍िकायत भी हो सकती है। 
  • कुछ लोगों के शरीर में मूड खराब होने पर हार्ट पल्‍प‍िटेशन बढ़ जाता है।
  • पसीना आना मूड खराब या डर का पहला शारीर‍िक लक्षण होता है। 
  • मूड बदलने या घबराहट और डर की स्‍थ‍ित‍ि में सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • कुछ लोगों को मूड खराब होने पर पेट में दर्द या गर्दन में अकड़न महसूस होती है। 
  • मूड बदलने पर सांस लेने में परेशानी हो सकती है। 
  • लंबे समय तक अगर मन अशांत या दुखी है तो वजन बढ़ने या कम होने की समस्‍या भी हो सकती है। 

मूड और इमोशन हमारे शरीर पर क्‍या असर डालते हैं? (How emotions affects body)

crying

कई कारणों से मूड बदलना है और हमारी भावना या इमोशन चेंज होता है। अगर मूड अच्‍छा है तो च‍िंता की बात नहीं है पर खराब मूड या दुखी होने से शरीर पर बुरे प्रभाव पड़ते हैं जैसे- 

  • अगर आप दुखी हैं तो और कई द‍िनों तक आपका मूड खराब ही रहता है तो इसका बुरा असर आपकी डाइट पर हो सकता है, कमजोरी महसूस हो सकती है। कई लोगों को बुखार भी आ जाता है। 
  • अगर आपको क‍िसी बात पर बहुत गुस्‍सा आ रहा है तो आपको सांस लेने में परेशानी, स‍िर में दर्द की समस्‍या, द‍िल का तेज धड़कना महसूस हो सकता है। 
  • क‍िसी बात से डर लग रहा है तो च‍िंता हो रही है तो पसीना आना सबसे कॉमन लक्षण है। 
  • अगर आप अपनी क‍िसी हरकत या बात पर शर्म‍िंदा हैं तो आपको पेट में गुदगुदी महसूस हो सकती है जो आगे चलकर गुस्‍सा या च‍िड़च‍िड़ेपन में बदल सकती है पर इससे पहले ही आप अपनी बात बोलकर मन हल्‍का कर लें। 

नकारात्‍मक व‍िचार आने पर शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कम कैसे करें? (How to control physical symptoms)

  • अगर आपको मन अशांत महसूस हो रहा है तो आप क‍िसी से बात करें, अपनी बात बोलकर हम अपने मूड को बदल सकते हैं। 
  • आपको मूड खराब लगे तो कसरत करना अच्‍छा विकल्‍प है इससे शरीर में होने वाली शारीर‍िक परेशानी से भी न‍िजात म‍िलेगा। 
  • खुद को मूड बदलने के शारीर‍िक लक्षणों से बचाना चाहते हैं तो नींद पूरी करें, अगर आप ज्‍यादा सोचेंगे तो जल्‍द ही अन‍िद्रा की श‍िकायत होने लगेगी।
  • हेल्‍दी डाइट फॉलो करें और पानी का सेवन न छोड़ें, पानी पीने से शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी नहीं होती और शरीर में होने वाली परेशानी से भी राहत म‍िलती है। 
  • अगर आप इमोशनली मजबूत नहीं है तो इससे आपकी इम्‍यून‍िटी भी कमजोर हो सकती है ज‍िसके कारण आप जल्‍दी-जल्‍दी बीमार पड़ सकते हैं इसल‍िए अपनी इम्‍यून‍िटी अच्‍छी रखने के ल‍िए इम्‍यूनिटी बूस्‍ट‍िंग फूड का सेवन करें।

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शारीर‍िक लक्षणों को कम करने के ल‍िए माइंडफुलनेस मेड‍िटेशन करें (Practice mindfulness meditation to control physical symptoms)

meditation for body

अगर आपको कोई शारीर‍िक लक्षण नजर आ रहे हैं तो उन्‍हें कंट्रोल करने के ल‍िए आप माइंडफुलनेस मेड‍िटेशन कर सकते हैं। इससे आपका मन शांत होगा, शरीर में होने वाली तकलीफ कम होगी और आप अंदर से पॉज‍िट‍िव महसूस करेंगे। माइंडफुलनेस मेड‍िटेशन करने के ल‍िए इन स्‍टेप्‍स को फॉलो करें-

  • जमीन पर बैठ जाएं और सांस को अंदर-बाहर करें। 
  • आपको सांस के उतार-चढ़ाव को महसूस करना है। 
  • अपने मन को केंद्र‍ित करें और सांस लेते रहें। 
  • आपको इस समय कुछ सोचना नहीं है केवल अपने अंदर जा रही सांस को महसूस करें। 
  • माइंडफुलनेस मेड‍िटेशन करने के ल‍िए क‍िसी शांत जगह को चुनें।
  • शुरूआत में इसे 5 म‍िनट के ल‍िए करें फ‍िर समय बढ़ाते जाएं।

अगर आपको लग रहा है क‍ि इन उपायों से मूड नहीं ठीक हो पा रहा है या शार‍ीर‍िक लक्षण बढ़ते जा रहे हैं तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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