गुब्बारे फुलाने से लंग्स और हार्ट के रोगियों को मिलते हैं कई फायदे, जानें इससे कैसे बढ़ती है फेफड़ों की क्षमता

गुब्बारे फुलाना हृदय और फेफड़े दोनों के लिए अच्छी एक्सरसाइज है। इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jul 21, 2021Updated at: Jul 21, 2021
गुब्बारे फुलाने से लंग्स और हार्ट के रोगियों को मिलते हैं कई फायदे, जानें इससे कैसे बढ़ती है फेफड़ों की क्षमता

गलियों में बिकने वाले रंग-बिरंगे गुब्बारे आपकी सेहत को भी खुशियों से रंगारंग कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि गुब्बारों की मदद से फेफड़े और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है। कोरोना काल में फेफड़ों की कार्य क्षमता बढाने के लिए डॉक्टरों ने गुब्बारों से एक्सरसाइज को बढ़ावा दिया। साथ ही गुब्बारे फुलाने की एक्सरसाइज चेहरा, मांसपेशियां और हृदय समेत शरीर के सभी अंगों को लाभ पहुंचाती हैं। राजकीय हृदय रोग संस्थान, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. अवधेश शर्मा (Cardiologist Dr. Awadhesh sharma, Kanpur) का कहना है कि गुब्बारे फुलाना फेफड़ों और हृदय दोनों के लिए लाभदायक है। इस पर डॉ. अवधेश शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी।

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गुब्बारे फुलाना क्यों है लाभदायक?

डॉक्टर अवधेश शर्मा का कहना है कि गुब्बारे फुलाना हृदय से ज्यादा फेफड़ों के लिए लाभकारी होता है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि अगर कोरोना के मामलों को देखा जाए तो इसमें मरीज को सबसे ज्यादा दिक्कत फेफड़ों में आती है। कोविड में फेफड़ों के सिकुड़ने और फैलने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कोविड के मरीज की छाती में फाइब्रोसिस बन जाता है। जिसे मेडिकली भाषा में चेस्ट फाइब्रोसिस कहा जाता है। फाइब्रोसिस होने पर फेफडे सिकड़ने और फैलने में दिक्कत होने लगती है। जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। जिस वजह से पेशेंट की सांस फूलती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में मरीज की चेस्ट फिजियोथेरेपी करवाई जाती है। चेस्ट फिजियोथेरेपी में गुब्बारे फुलाने की एक्सरसाइज भी आती है। हालांकि, डॉ. अवधेश शर्मा का यह भी कहना है कि चूंकि, फेफड़े एक चैंबर हैं जिसमें दिल भी होता है। तो ऐसे में फाब्रोसिस जमा होने से शरीर के सभी अंगों पर दबाव पड़ता है। उन अंगों में हृदय भी शामिल है। 

अगर फेफड़े पूरी तरह से फूल नहीं पाते तो हार्ट पर असर पड़ता है। जिन पेशेंट के फेफड़े खराब होते हैं। उनके फेफड़े भी सिकुड़ और फैल नहीं पाते तो उनके हार्ट पर जोर पड़ता है और हार्ट फैल्योर होता है।  

जब हम ओपन हार्ट सर्जरी करते हैं तो उसमें पूरा सीना खोलते हैं तब हार्ट को सही करते हैं। पूरा सीना बंद करते हैं तो उसमें भी ऑपरेशन के बाद गुब्बारे फुलाने के लिए कहा जाता है। गुब्बारे फुलाने से फेफड़े सुरक्षित रहते हैं। 

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क्या है चेस्ट फिजियोथेरेपी

डॉक्टर अवधेश शर्मा का कहना है कि चेस्ट फिजियोथेरेपी छाती की एक्सरसाइज है। इसमें गुब्बारे फुलाना, मोमबत्ती में फूंक मारना या शंक बजाना आदि एक्सरसाइज आती हैं। जब कोई पेशेंट डिस्चार्ज होने वाला होता है तब यह एक्सरसाइज कराई जाती हैं। फिजियोथेरेपी से फेफड़ों का इंफेक्शन कम हो जाता है। डॉक्टर के मुताबिक, छाती में दो तह की मांसपेशियां होती हैं। एक सांस अंदर लेने के लिए होती हैं, जिन्हें इंस्पाइरेटरी (inspiratory muscles) कहते हैं। दूसरी सांस छोड़ने वाली मांसपेशियां होती हैं जिन्हें एक्सपाइरेटरी मांसपेशियां (expiratory muscles) कहते हैं। ये मांसपेशियां सांस को बाहर छोड़ती हैं। सांस बाहर छोड़ने की प्रक्रिया में कार्बनडाइऑक्साइड बाहर निकलता है। चेस्ट फिजोयोथेरेपी से एक्सपाइरेटरी मसल को मजबूत बनाया जाता है ताकि फेफड़ों में कार्बनडाइऑक्साइड जमा न हो और सांस का फ्लो ठीक रहे। इसमें इंसपााइरेटरी मसल और एक्सपाइरेटरी मसल को स्ट्रांग बनाया जाता है। एक्सपाइरेटरी मसल की एक्साइज गुब्बारे के माध्यम से की जाती है। बलून भरते हुए हवा को बाहर छोड़ते हैं। जिससे एक्सपाइरेटरी मसल को मजबूत मिलती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती है।

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चेस्ट फिजियोथेरेपी की अन्य एक्सरसाइज

डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि एक्सपाइरेटरी मसल को मजबूत बनाने के लिए गुब्बारे फुलाने के अलावा मोमबत्ती बुझाना, सीटी बजाना और शंख बजाना भी शामिल है। इन सभी एक्सरसाइज से पेशेंट कार्बनडाइऑक्साइड बाहर निकालेगा। इससे co2 शरीर में जमा नहीं होगी। इससे अशुद्ध हवा शरीर में जमा नहीं होती। इससे फेफड़ों की केपेसिटी मेंटेन रहेगी। इससे फाइब्रोसिसन नहीं होगा।

गुब्बारे फुलाना सीधे तौर पर हार्ट अटैक से जुड़ा हुआ नहीं है। यह फेफड़ों के लिए अच्छी एक्सरसाइज है, लेकिन फेफड़ों के चैंबर में ही हृदय भी होता है। तो ऐसे में फेफड़ों की वजह से हृदय पर दवाब पड़ता है। 

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