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नसों में कमजोरी और खून की कमी सिर्फ Vitamin B12 की कमी नहीं, हो सकता है पर्निशियस एनीमिया

Pernicious Anemia: जब Vitamin B12 गंभीर रूप से कम होने लगता है और शरीर  Vitamin B12 को ऑब्जर्ब नहीं कर पाता, तो पर्निशियस एनीमिया हो सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने बीमारी से होने वाले नुकसान और कारणों के बारे में विस्तार से बताया है। 
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नसों में कमजोरी और खून की कमी सिर्फ Vitamin B12 की कमी नहीं, हो सकता है पर्निशियस एनीमिया

Pernicious Anemia: आजकल लोग थकान और कमजोरी की शिकायत आमतौर पर करते हैं, लेकिन लोग इसे स्ट्रेस, नींद की कमी या बढ़ती उम्र की समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं। कई बार लोग नसों की कमजोरी या खून की कमी को Vitamin B12 कमी मान लेते हैं और सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन सप्लीमेंट्स के बावजूद ये समस्याएं कम नहीं होती। ये समस्या पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anemia) हो सकता है। इस एनीमिया में शरीर Vitamin B12 की गंभीर कमी से जूझ रहा होता है, जिसमें Vitamin B12 शरीर को ऑब्जर्ब नहीं कर पाता और इस वजह से सप्लीमेंट लेने के बावजूद भी Vitamin B12 की कमी पूरी नहीं हो पाती। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने पीएसआरआई हॉस्पिटल के हेमाटोलॉजी और ऑनकोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमित उपाध्याय (Dr. Amit Upadhyay, Senior Consultant Hematologist and Oncologist, PSRI Hospital) से बात की। उन्होंने बताया कि अगर पर्निशियस एनीमिया की समय रहते पहचान और इलाज न किया जाए, तो यह नर्व सिस्टम को परमानेंट नुकसान भी पहुंचा सकता है।


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पर्निशियस एनीमिया क्या है? - What is Pernicious Anemia In Hindi

डॉ. अमित कहते हैं, “पर्निशियस एनीमिया में शरीर पर्याप्त मात्रा में हेल्दी रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता। इसका मुख्य कारण Vitamin B12 की कमी है। दरअसल Vitamin B12 रेड ब्लड सेल्स बनाने का काम करता है, नर्व सिस्टम को सेहतमंद रखता है और DNA बनाने में मदद करता है। जब B12 की कमी होती है, तो ऑक्सीजन को शरीर के अंगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे थकान और कमजोरी शुरू हो जाती है।”

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क्या पर्निशियस एनीमिया ऑटोइम्यून समस्या है?

डॉ. अमित कहते हैं, “पर्निशियस एनीमिया में एक खास प्रोटीन इंट्रिंसिक फैक्टर (Intrinsic Factor) बनना बंद हो जाता है। यह प्रोटीन पेट की अंदरूनी परत से बनता है और छोटी आंत में Vitamin B12 के आब्जर्ब में मदद करता है। कई मामलो में पर्निशियस एनीमिया एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है। इसमें शरीर की इम्युनिटी गलती से पेट की उन टिश्यू को टारगेट करने लगती है, जो इंट्रिंसिक फैक्टर बनाती हैं। इस वजह से Vitamin B12 की गंभीर रूप से कमी होने लगती है।

पर्निशियस एनीमिया के लक्षण - Symptoms Of Pernicious Anemia In Hindi

डॉ. अमित ने बताया कि पर्निशियस एनीमिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए शुरुआत में लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं। अगर समय पर इलाज न हो, तो मरीज का नर्व सिस्टम डैमेज हो सकता है, इसलिए इस तरह के लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

  1. लगातार थकान और कमजोरी
  2. चक्कर आना
  3. सांस फूलना
  4. स्किन पीली पड़ना
  5. हार्ट बीट तेज महसूस होना
  6. हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्न होना
  7. शरीर का बैलेंस न रहना
  8. चलने में परेशानी होना
  9. याददाश्त कमजोर होना
  10. मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन या डिप्रेशन

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पर्निशियस एनीमिया और नार्मल Vitamin B12 की कमी में फर्क

डॉ. अमित कहते हैं कि दोनों में फर्क होता है, अगर नार्मल Vitamin B12 की कमी होती है, तो यह खाने-पीने से जुड़ी होती है और ज्यादातर वेजिटेरियन लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन पर्निशियस एनीमिया में Vitamin B12 का सही तरीके से ऑब्जर्ब न होना है और इस वजह से सिर्फ सप्लीमेंट लेने से भी राहत नहीं मिलती। अगर सप्लीमेंट लेने के बाद भी Vitamin B12 की कमी बनी रहे, तो पर्निशियस एनीमिया कारण हो सकता है।

पर्निशियस एनीमिया का इलाज - Treatment Of Pernicious Anemia in Hindi

डॉ. अमित कहते हैं, “मरीज का हीमोग्लोबिन लेवल, Vitamin B12 लेवल और इंट्रिंसिक फैक्टर एंटीबॉडीज चेक किए जाते हैं। वैसे तो पर्निशियस एनीमिया का इलाज Vitamin B12 को पूरा करना होता है, लेकिन इसमें Vitamin B12 को ऑब्जर्ब नहीं होता, इसलिए ज्यादातर मरीजों को Vitamin B12 इंजेक्शन दिए जाते हैं और इंजेक्शन की फ्रीक्वेंसी ज्यादा होती है और बाद में मेंटेनेंस डोज दी जाती है।”

निष्कर्ष

डॉ. अमित कहते हैं कि पर्निशियस एनीमिया सिर्फ एक साधारण एनीमिया नहीं है। यह एक गंभीर स्थिति है, जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए समय पर इलाज कराना जरूरी है। इंजेक्शन लगाने से मरीज की थकान और कमजोरी दूर होती है। ब्लड काउंट सामान्य होने लगता है और अगर नर्व सिस्टम के लक्षण शुरुआती स्टेज में रिवर्स हो सकते हैं। यही कारण है कि समय पर इलाज बेहद अहम है।

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FAQ

  • दूध से खून बढ़ता है या घटता है?

    दूध सीधे तौर पर हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ाता, बल्कि यह प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व देता है जो शरीर के सेहतमंद और हीमोग्लोबिन बनाने की प्रोसेस में मददगार हो सकते हैं। खून बढ़ाने के लिए अनार, चुकंदर, दालें और विटामिन C युक्त फल दूध के साथ लेने से आयरन का ऑब्जर्ब बेहतर हो सकता है।
  • एनीमिया में क्या नहीं खाना चाहिए?

    एनीमिया में नॉन हीम आयरन वाले प्रोडेक्ट्स नहीं खाने चाहिए जिसमें बहुत ज्यादा मात्रा लाल मांस और सेचुरेटिड फैट्स खाने से रिस्क बढ़ सकता है। यह मुख्य रूप से पशु प्रोडेक्ट्स में पाया जाता है।
  • 1 किलो चुकंदर खाने से कितना खून बढ़ता है?

    एक किलो चुकंदर खाने से सीधे तौर पर कितना खून बढ़ेगा यह बताना मुश्किल है क्योंकि यह व्यक्ति के शरीर, न्यूट्रिशन की कमी और चुकंदर के खाने के तरीके पर निर्भर करता है। चुकंदर आयरन और फोलेट जैसे न्यूट्रिशन से भरपूर होता है, जिससे खून की कमी दूर करने और ब्लड फ्लो सुधारने में मदद मिलती है। हालांकि यह दवाई का ऑप्शन नहीं है, लेकिन चुकंदर भी सही मात्रा में ही खाना चाहिए।

 

 

 

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  • Jan 05, 2026 15:54 IST

    Published By : Aneesh Rawat

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