रत्ती (गुंजा) के पौधे में होते हैं कई औषधीय गुण, आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे, प्रयोग और नुकसान

रत्ती एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद की औषधि के रूप में किया जाता है। चलिए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान

 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jul 09, 2021Updated at: Jul 09, 2021
रत्ती (गुंजा) के पौधे में होते हैं कई औषधीय गुण, आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे, प्रयोग और नुकसान

आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं, जिससे हम अबतक अंजान है। इन्हीं जड़-बूटियों में से एक है रत्ती का पौधा। रत्ती का पौधा कई आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होता है। इस पौधे को साधारण बोलचाल की भाषा में गुंजा भी कहते हैं। इसका पौधा बेल की तरह होता है और इसमें लाल रंग का बीज निकलता है, जो विषैला होता है। वहीं, इसकी पत्तियां सहजन की पत्तियों के समान होती हैं। आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में सदियों से रत्ती के पौधे का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियों को दूर किया जा सकता है। शरीर पर सफेद दाग हो या फिर अर्थराइटिस की परेशानी, हर तरह की परेशानी को दूर करने में रत्ती का पौधा गुणकारी हो सकता है। इस बारे में गाजियाबाद स्वर्ण जयंती के आयुर्वेदाचार्य राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि रत्ती के पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधि को तैयार करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह विषैली प्रवृति का होता है। इसलिए एक्सपर्ट की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में रत्ती की पत्तियों और बीजों का इस्तेमाल शुद्ध करके किया जाता है। इससे पहले अगर इसका इस्तेमाल किया जाए, तो यह जहर के समान कार्य करता है। इसलिए ध्यान रखें कि इस पौधे का इस्तेमाल डायरेक्ट न करें। आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर ही इसका सेवन करें। चलिए जानते हैं रत्ती के कुछ गुणकारी फायदे (Rosary Pea Health Benefits) और नुकसान -

बाल को झड़ने से रोकने में मददगार है रत्ती

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि अगर आप गंजेपन की समस्या के शिकार हो रहे हैं, तो रत्ती के बीजों से तैयार पाउडर आपकी इस समस्या को दूर करने में असरकारी होता है। इसके लिए तिल के तेल में 1 चम्मच रत्ती के बीज का पाउडर मिलाएं। अब इस तेल को अपने बालों में लगाएं। इससे बाल झड़ने की समस्या दूर होगी। दरअसल, रिसर्च में बताया गया है कि रत्ती के बीजों के इस्तेमाल से बाल झड़ने की परेशानी को दूर की जा सकती है। इससे बालों की ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा यह फंगल इंफेक्शन की समस्या को भी कम करता है।

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डायबिटीज की परेशानी को करे कम

रत्ती की पत्तियों का अर्क या रस डायबिटीज रोगियों के लिए प्रभावी साबित हो सकता है। हालांकि, इसके क्लीनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की जनजातियों द्वारा इसका इस्तेमाल डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। साथ ही भारत के कुछ हिस्सों में भी इसका इस्तेमाल होता है। आयुर्वेदाचार्य के मुताबिक, रत्ती की पत्तियों के अर्क में एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण पाया जाता है, जो हमारे शरीर में इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाता है। इससे काफी हद तक डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

सिरदर्द से दिलाए राहत

अगर आप माइग्रेन या फिर सिरदर्द की समस्या से जूझ रहे हैं, तो रत्ती का पौधा आपके लिए असरकारी हो सकता है। दरअसल, रत्ती का पौधा सेरोटोनिन के स्तर को प्रभावित करता है, जो माइग्रेन की वजह से होने वाले सिरदर्द से राहत दिलाता है। इतना ही नहीं, इसका बीज सिर दर्द के साथ-साथ मूड को अच्छा करने में भी असरकारी होता है। 

गठिया की परेशानी को करे कम

अगर आप गठिया की परेशानियों से निजात पाना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट की सलाहनुसार गुंजा का इस्तेमाल करें। गुंजा के इस्तेमाल से जोड़ों में दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है। इसके लिए रत्ती की पत्तियों को पानी में कुछ समय के लिए उबालें। अब इस अर्क का इस्तेमाल अपने सूजन और जोड़ों वाले स्थान पर करें। इससे आपको जोड़ों में होने वाले सूजन और दर्द से राहत मिला सकता है। 

रत्ती में है एंटी-बैक्टीरियल गुण

रत्ती की पत्तियों और बीजों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। इसमें एल्कलॉयड्स, फेनॉल, फ्लैवनॉल्स जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर हैं। इसके इस्तेमाल से दस्त, पैचिश, निमोनिया, ब्लड इंफेक्शन, यूरिन इंफेक्शन जैसी बैक्टीरियल और वायरस की परेशानियों को कम किया जा सकता है।

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कैंसररोधी गुण से भरपूर है रत्ती

रत्ती यानि गुंजा के पौधे से प्राप्त अर्क एंटीकैंसर और एंटीट्यूमर गुणों से भरपूर है। इसके बीजों के पानी में कैंसररोधी गुण होता है। यह सार्कोमा के विकास को कम करता है। साथ ही कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोक सकता है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि रत्ती कैंसर रोगियों के लिए लाभकारी हो सकता है।

कैसे करें रत्ती यानि गुंजा का सेवन? (How to Use Rosary Pea)

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि रत्ती एक विषैला पौधा होता है। इसलिए इसका कच्चा सेवन करना जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए रत्ती का सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। इसका सेवन आपको आयुर्वेदाचार्य निम्न तरीकों से करने की सलाह दे सकते हैं। 

  • रत्ती के जड़ों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, लेकिन ध्यान रखें कि बिना एक्सपर्ट की राय के इसका सेवन करना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
  • रत्ती के बीजों को डिटॉक्सिफाइडक करके ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। लेकिन पूरे दिन में 125 मिली ग्राम से अधिक इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

रत्ती के साइड-इफेक्ट्स (Side Effects of Rosary Pea)

बिना एक्सपर्ट की सलाहनुसार रत्ती की पत्तियों या बीजों का इस्तेमाल न करें। इससे आपको कई तरह के खतरे हो सकते हैं। जैसे-

  • गर्भवती महिलाओं को रत्ती का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा बढ़ता है।
  • रत्ती का पौधा शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित करता है। 
  • रत्ती के इस्तेमाल ले लो ब्लड शुगर का खतरा बढ़ता है। क्योंकि इसमें एंटीहाइपरग्लाइसेमिक प्रभाव होता है। 

ध्यान रखें कि रत्ती का बीज विषैले गुणों से भरा होता है। इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के इसका सेवन न करें। इसकी कितनी और कैसी खुराक लेनी हैं, इसके बारे में डॉक्टर से जरूरी राय लें। यह आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

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