बिन बात बार-बार 'Sorry' बोलना हो सकता है 'मानसिक विकार', एक्सपर्ट से जानें कारण और बचाव

हमारे आसपास ऐसे लोग मौजूद होते हैं जो बात बात पर सॉरी बोलते हैं। हो सकता है वह किसी मानसिक विकार का शिकार हों। जानें इसके बारे में...

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jun 23, 2021Updated at: Jun 23, 2021
बिन बात बार-बार 'Sorry' बोलना हो सकता है 'मानसिक विकार', एक्सपर्ट से जानें कारण और बचाव

अगर कोई व्यक्ति गलती न होने पर भी माफी मांग ले तो ये उसका बड़प्पन कहा जाता है। लेकिन अगर व्यक्ति हर बात के लिए खुद को दोषी मानना शुरू कर दे और बार-बार सॉरी बोले तो ऐसा करना स्वाभाविक नहीं है। ये आदत व्यक्तित्व और रिश्ते दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। ये एक प्रकार का मानसिक विकार होता है, जिसमें व्यक्ति खुद को दूसरों से छोटा आंकने लगता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो वह पूरी बात सुने बिना ही माफी मांगना शुरू कर देते हैं। ऐसा करने से भी इंसान का व्यक्तित्व कमजोर बनने लगता है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि खुद को दोषी मान लेने से या बार-बार सॉरी बोलने से व्यक्तित्व पर कैसे प्रभाव पड़ता है और क्या है इसके लक्षण, कारण और बचाव का तरीका। इसके लिए हमने गेटवे ऑफ हीलिंग साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी (Dr. Chandni Tugnait, M.D (A.M.) Psychotherapist, Lifestyle Coach & Healer) से भी इनपुट्स मांगे हैं। पढ़ते हैं आगे...

 

खुद को दोषी समझने का कारण?

जब इंसान हर बात के लिए खुद को दोषी समझता है तो इससे उसका मनोबल कमजोर पड़ने लगता है और वह व्यक्ति आत्महीनता से ग्रस्त हो जाता है। इसके पीछे कारण होता है बचपन से उस व्यक्ति के साथ की गई सख्।ती जब माता-पिता ज्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं तो बच्चों के मन में यह भावना आ जाती है कि कहीं उनके किसी एक्शन या काम से सामने वाला व्यक्ति नाराज ना हो जाए, जिसके कारण उनका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। इसके अलावा ऐसे लोग अपनी खुशी के बारे में सोचना छोड़ देते हैं और आसपास मौजूद लोगों को खुश रखने और उनसे प्रशंसा पाने जैसी सोच रखना शुरू कर देते हैं और जब इन्हीं लोगों से व्यक्ति को दुख पहुंचता है तो उस व्यक्ति के मन में यह भावना आती है कि मैं लोगों के लिए इतना करता हूं लेकिन कोई मेरी परवाह नहीं करता। ऐसे लोग हर वक्त अपराध बोध से घिरे रहते हैं और उनका सामाजिक, पारिवारिक और प्रोफेशनल जीवन नकारात्मक असर पड़ता है।

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व्यक्तित्व पर पड़ता नकारात्मक असर 

1 - आत्मविश्वास का कमजोर होना।

2 - हर बात पर दूसरों से तुलना करना।

3 - हर वक्त ये सोचना कि लोग आपसे नाराज हो सकते हैं।

4 - किसी भी प्रतियोगिता में हारने का डर।

5 - परिवार या दोस्तों के सामने अज्ञानता महसूस करना।

6 - दबाव में आकर दूसरे लोगों की हर बात मानना।

7 - अपने आसपास मौजूद लोगों को खुश रखने का प्रयास रखना।

8 - लोगों से अपनी प्रशंसा पाने की लालसा

9 - किसी व्यक्ति से अपनी बुराई सुनने पर अधिक दुखी हो जाना। 

10 - डिप्रेशन का शिकार हो जाना

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कैसे करें इस स्थिति से बचाव?

अगर व्यक्ति को लग रहा है कि उसके मन में अपराध बहुत की भावना पैदा हो रही है तो निम्न बातों को अपनाएं-

    1. किसी भी व्यक्ति के दबाव में आकर उसकी हर बात मानने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति से मना करना भी सीखें।
    2. हर बात पर सॉरी बोलना बंद करेंकवल जब आपको लगे कि सच में आपकी गलती है तब इस शब्द का प्रयोग करें।
    3. दुसरों से अपनी तुलना करना बंद करें।
    4. आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए अपनी मनपसंद चीजें या अपने दोस्तों से मिलें।
    5. खुद की इज्जत करें और खुद पर गर्व महसूस करें।
    6. अपने गुणों को पहचानें।
    7. दूसरों के सामने अपना नजरिया रखें।
    8. महान पुरुषों के जीवन परिचय पढें।
    9. भरपूर नींद लेना
    10. आप सॉरी की बजाए थैंक्स का भी प्रयोग कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आप किसी से मिलने जा रहे हैं और आप देरी से पहुंचते हैं तो सॉरी बोलने के बजाय आप कह सकते कि थैंक्स आपने मेरा इंतजार किया।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि हर वक्त सॉरी कहना या खुद को दोषी मानना आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट द्वारा सुझाए गए बचाव को अपनाएं। अगर इन सब के बावजूद भी आपको अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव नजर ना आए तो आप एक्सपर्ट की सलाह पर बिहेवियर थेरेपी और संबंधित ट्रीटमेंट भी ले सकते हैं। इसके अलावा एक्सपर्ट माहौल बदलने या जिन लोगों के कारण यह भावना पैदा होती है उनसे दूरी बनाए रखने की सलाह भी देते हैं।

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ये लेख गेटवे ऑफ हीलिंग साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी (Dr. Chandni Tugnait, M.D (A.M.) Psychotherapist, Lifestyle Coach & Healer) से बातचीत पर आधारित है। 

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