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गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु के हो सकते हैं ये 5 कारण, प्रेग्नेंसी में न करें लापरवाही

Possible Causes Of Stillbirth In Hindi: गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु होने के कई कारण हो सकते हैं। यह गंभीर समस्या है, इस पर हर गर्भवती महिला को सतर्कता बरतनी जरूरी है।
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गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु के हो सकते हैं ये 5 कारण, प्रेग्नेंसी में न करें लापरवाही


Possible Causes Of Stillbirth In Hindi: हर गर्भवती महिला के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि गर्भ में शिशु स्वस्थ है या नहीं। इसकी सही जांच के लिए महिलाएं समय-समय पर अपना चेकअप करवाती हैं, अल्ट्रा साउंड करवाती हैं। साथ ही, बच्चे की ग्रोथ के लिए क्या-क्या जरूरी है, इस तरह की अहम जानकारी भी रखती है। इसके बावजूद, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि स्टिल बर्थ या गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु के मामले कम नहीं होते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार 98 फीसदी तक स्टिल बर्थ के मामले लो टू मिडिल इंकम देशों में होते हैं। वहीं, भारत में स्टिल बर्थ के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। डब्लूएचओ की रिपोर्ट की मानें, तो हमारे देश में 1000 में से 22 स्टिल बर्थ के मामले देखे जाते हैं। हालांकि, भारत सरकार ने भी ओर ध्यान दिया है, तथा कुछ जरूरी कदम उठाए हैं। इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि स्टिल बर्थ की समस्या काफी गंभीर है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं इसके कारणों को जाने और जरूरी सावधानियां बरतें। इस बारे में हमने वृंदावन और नई दिल्ली स्थित मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की चिकित्सा निदेशक, स्त्री रोग और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु के कारण- Causes Of Stillbirth In Hindi

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प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएं

प्रेग्नेंसी अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया होती है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इसके साथ, कुछ जटिलताएं भी जुड़ी होती हैं। जैसे गर्भकालीन मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर आदि। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो जाए, तो ऐसे में गर्भ के अंदर शिशु की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए आवश्यक है कि प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताओं के बारे में जागरूक रहें और समय-समय पर अपना चेकअप जरूर करवाएं।

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भ्रूण का विकास बाधित होना

गर्भ में भ्रूण की प्रॉपर ग्रोथ होना जरूरी है। जब गर्भ में शिशु की ग्रोथ सही होती है, तो डिलीवरी के बाद उसके बीमार होने की आशंका कम हो जाती है। यहां तक कि उसका इम्यून सिस्टम भी बेहतर तरीके से काम करता है। वहीं, अगर गर्भ में भ्रूण का विकास बाधित होता है, तो ऐसे में स्टिल बर्थ का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को अपने गर्भ में पल रहे शिशु की ग्रोथ पर पूरी नजर रखनी चाहिए।

गर्भवती महिला का संक्रमित होना

संक्रमण कई तरह के होते हैं, जैसे यूटीआई। यह ऐसा संक्रमण है, जिसे इलाज के जरिए ठीक किया जा सकता है। वहीं, अगर महिला को सिफलिस, एचआईवी और मलेरिया जैसे संक्रमण होते हैं, तो इसका भ्रूण पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसी स्थिति न सिर्फ गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य खराब हो सकता है, बल्कि उसके संक्रमित होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। यह स्टिल बर्थ का एक बड़ा कारण बनकर उभरता है।

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गर्भवती महिला की मेडिकल कंडीशन

यह बात आप सभी जानते होंगे कि गर्भावस्था में डायबिटीज, हाइपरटेंशन या थायराइड जैसी मेडिकल कंडीशंस होना सही नहीं हे। इसकी वजह से डिलीवरी में दिक्कत आती है, भ्रूण के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। यहां तक कि स्टिल बर्थ के जोखिम और डिलीवरी के बाद बच्चे में बर्थ डिफेक्ट का रिस्क भी बढ़ जाता है। इसलिए, अगर किसी महिला को ऐसी कोई मेडिकल कंडीशन है, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही प्रेग्नेंसी प्लान करनी चाहिए।

प्लेसेंटा से जुड़ी प्रॉब्लम

गर्भवती महिला के गर्भ में शिशु को प्लेसेंटा ही मां से जोड़ती है। इसी के जरिए बच्चे तक सभी जरूरी पोषक तत्व पहुंचते हैं। अगर किसी वजह से प्लेसेंटा में दिक्कत आती है, तो बच्चे तक ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई सही तरह से नहीं होती है। ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई बाधित पर होने पर बच्चे को पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है। ऐसी कंडीशन में जरूरी है कि महिलाएं तुरंत डॉक्टर को अपना इलाज करवाएं। ऐसा न किए जाने पर स्टिल बर्थ का जोखिम भी बढ़ सकता है।

All Image Credit: Freepik

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