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पित्त प्रकृति के लोगों को नहीं खानी चाहिए ये 4 तरह की दाल, शरीर में बढ़ सकती हैं समस्याएं

Foods to Avoid in Pitta:पित्त अग्नि और जल दोनों का तत्व है। पित्त को संतुलन में रखना जरूरी होता है। इसके लिए कुछ दालों से परहेज करना चाहिए।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Mar 23, 2022Updated at: Mar 23, 2022
पित्त प्रकृति के लोगों को नहीं खानी चाहिए ये 4 तरह की दाल, शरीर में बढ़ सकती हैं समस्याएं

What Foods Should Pitta Avoid: पित्त अग्नि और जल दोनों तत्वों से मिलकर बना है। पित्त पेट और छोटी आंत में प्रमुखता से पाया जाता है। पित्त शरीर के तापमान और पाचक अग्नि को नियंत्रित करता है। इसके अलावा पित्त (Pitta Part of Body) शरीर में बनने वाले हॉर्मोन्स और एंजाइम्स को नियंत्रित करता है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए शरीर में पित्त का संतुलन (Pitta Balance Food) में होना बहुत जरूरी होता है। जिन लोगों के शरीर की प्रकृति पित्त होती है, उन्हें अपने खान-पान पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। 

पित्त प्रकृति के लोगों को अपने आहार में ठंडी, मीठी और कसैले खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वही खट्टे, गर्म तासीर वाली चीजों से पूरी तरह से परहेज करना चाहिए। गलत आहार शरीर में पित्त दोष (Pitta Dosha) को बढ़ा सकता है। इसलिए आज हम आपको ऐसे कुछ दालों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पित्त प्रकृति के लोगों को नहीं खाना चाहिए। रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल, सिरसा के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा से जानें इसके बारे में- 

पित्त क्या होता है? (What is Pitta in Ayurveda)

आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्मांड पांच तत्वों से बना है। इसमें वायुन, जल, अग्नि, आकाश और पृथ्वी शामिल हैं। ये तत्व शरीर के प्रकार वात, पित्त और कफ बनाते हैं। वैसे तो ये तीनों प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में मौजूद होता है, लेकिन इनमें से एक प्रधान (What is Pitta in Ayurveda) होता है। इसे ही व्यक्ति की प्रकृति माना जाता है। जब किसी व्यक्ति के शरीर में अग्नि बढ़ जाती है, तो इस स्थिति को पित्त दोष (What is Pitta Dosha) कहा जाता है।

पित्त दोष के लक्षण (Pitta Dosha Symptoms)

शरीर से तेज दुर्गंध, जल्दी गुस्सा आना, पेट से जुड़ी समस्याएं रहना किसी भी व्यक्ति में पित्त दोष के लक्षणों (Pitta Prakriti Meaning) को दिखाता है। जिन लोगों की पित्त प्रकृति होती है, उन्हें अक्सर कब्ज, एसिडिटी का सामना करना पड़ता है। जानें पित्त दोष के लक्षण (Pitta Dosha Symptoms)-

  • अपच और कब्ज
  • एसिडिटी
  • उत्साह में कमी
  • जल्दी गुस्सा आना
  • त्वचा पर रैशेज
  • रूखी त्वचा
  • स्किन पर रेडनेस

पित्त प्रकृति के लोग न खाएं ये दाल (Pulses to Avoid in Pitta Dosha)

पित्त प्रधान वाले लोगों को अपने आहार में बहुत गर्म तासीर वाली दाल को शामिल करने से बचना चाहिए। गर्म तासीर की दाल खाने से शरीर में पाचक अग्नि कमजोर पड़ जाती है, इससे खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है। पित्त प्रकृति के लोग इन दालों (Pitta Dosha Foods to Avoid) को खाने से बचें।

rajma 

1. राजमा से करें परहेज (Rajma Side Effects in Hindi)

पित्त प्रकृति के लोगों को राजमा खाने से बचना चाहिए। राजमा की तासीर बहुत गर्म होती है, इससे शरीर में अग्नि बढ़ सकती है। पित्त प्रकृति के लोगों में पहले से ही पेट से संबंधित दिक्कतें रहती हैं, राजमा पेट की परेशानियों (Rajma ke Nuksan) को बढ़ाता है। राजमा पाचन तंत्र में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। पित्त प्रकृति वाले लोगों को राजमा खाने से पेट में दर्द (Stomach Pain in Hindi) और एसिडिटी की समस्या हो सकती है।

2. छोले खाने से बचें (Chickpeas Side Effects)

छोले भले ही प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, लेकिन पित्त प्रकृति के लोगों को छोले खाने से बचना चाहिए। छोले (Chickpeas Side Effects) खाने से अपच, एसिडिटी और पेट में दर्द की समस्या पैदा हो सकती है। इसके साथ ही छोले की तासीर भी गर्म होती है, जिससे पित्त प्रकृति वाले लोगों के शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। छोले को काबुली चना या सफेद चना भी कहा जाता है।

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3. कुल्थी की दाल (Kulthi ki Daal)

कुल्थी की दाल को पहाड़ों में गहत की दाल भी कहा जाता है। गहत की दाल (Kulthi ki Daal ke Fayde) पोषक तत्वों से भरपूर होती है, इससे शरीर को कई लाभ मिलते हैं। लेकिन जिन लोगों के शरीर की पित्त प्रकृति है, उन्हें कुल्थी की दाल खाने से परहेज करना चाहिए। कुल्थी की दाल की तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए इसे अक्सर सर्दियों में खाया जाता है। पित्त प्रकृति में कुल्थी की दाल खाने से पित्त दोष बढ़ सकता है। 

4. भट्ट की दाल (Bhat ki Dal)

उत्तराखंड में अक्सर लोग भट्ट की दाल खाना पसंद करते हैं। भट्ट की दाल को कई तरीकों से खाया जा सकता है। भट्ट के दाल (Bhat ki Dal in Hindi) की तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसे खाने से बचना चाहिए। पित्त प्रकृति के लोगों को भट्ट की दाल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। भट्ट की दाल शरीर में पित्त को असंतुलित कर सकती है। पित्त दोष के लक्षण पैदा कर सकती है। वात और कफ प्रकृति वाले भट्ट की दाल का सेवन कर सकते हैं। सर्दियों में भट्ट दाल खाना फायदेमंद होता है

अगर आपके शरीर की प्रकृति भी पित्त है, तो आपको राजमा, छोले, कुल्थी और भट्ट की दाल खाने से परहेज करना चाहिए। खासकर गर्मियों में इन दालों को बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ये दाल खाकर आपके शरीर में पित्त असंतुलित हो सकता है। 

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