लड़कियों की परवरिश में इंडियन पेरेंट्स अक्सर कर बैठते हैं ये 5 गलतियां, जाने इनके बारे में

बेटियों की परवरिश के दौरान भारतीय पेरेंट्स अक्सर कुछ गलतियां कर बैठते हैं, बेटी की परवरिश के दौरान इन गलतियों से बचना चाहिए।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Mar 08, 2022Updated at: Mar 08, 2022
लड़कियों की परवरिश में इंडियन पेरेंट्स अक्सर कर बैठते हैं ये 5 गलतियां, जाने इनके बारे में

आज के समय में हमारे समाज में लड़की और लड़के को लेकर लोगों के विचारों में काफी बदलाव आया है। पुराने समय की तुलना में अब लोग लड़की हो या लड़का दोनों को समान दृष्टि से देखते हैं। माता-पिता के लिए सबसे कठिन बच्चों की अच्छी परवरिश होती है। बच्चों की परवरिश के दौरान कुछ माता-पिता अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं जिसका असर बच्चों पर जीवन भर देखने को मिलता है। बच्चों की परवरिश के दौरान बेटे और बेटियों को समान अधिकार देना चाहिए। बेटे और बेटियों के बीच में भेदभाव करने या उनको समान अधिकार न देने पर इसका असर जीवनभर उनके ऊपर रहता है। आधुनिक समाज में रहने वाले लोग अक्सर इससे बचने का प्रयास करते हैं। लेकिन बेटियों की परवरिश के दौरान कुछ माता-पिता अनजाने में ये 5 गलतियां कर बैठते हैं जिसका नकारात्मक असर बेटियों पर पड़ सकता है। आइये विस्तार से जानते हैं इनके बारे में।

बेटियों की परवरिश में पेरेंट्स को नहीं करनी चाहिए ये गलतियां (Parenting Mistakes To Avoid While Raising a Child)

बेटियों की परवरिश के दौरान माता-पिता जरूर ये प्रयास करते हैं की उन्हें अच्छी परवरिश दी जाए। कई बार पेरेंट्स अनजाने में परवरिश के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका नकारात्मक असर बच्चों पर पड़ता है। इंडियन पेरेंट्स बेटियों की परवरिश में अक्सर ये गलतियां कर बैठते हैं जिसकी वजह से बेटियों पर उम्र भर इसका प्रभाव रह सकता है। इंडियन पेरेंट्स को लड़कियों की परवरिश के दौरान इन गलतियों से बचना चाहिए।

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1. बेटे और बेटियों में फर्क करना

परवरिश के दौरान कभी भी बेटियों और बेटों में फर्क नहीं करना चाहिए। कई बार ये देखा गया है की पेरेंट्स बेटे और बेटी की परवरिश के दौरान बेटों को अधिक प्राथमिकता देते हैं या उनकी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं और बेटियों के साथ ऐसा नहीं करते हैं। ऐसा करने से बेटी के मन में बुरा प्रभाव पड़ता है। बेटे और बेटियों में फर्क न करने से बच्चों में इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

2. लड़कियों की प्राथमिकता खुद तय करना

परवरिश के दौरान भारतीय माता-पिता अक्सर ये गलतियां कर बैठते हैं की वे खुद से ही लड़कियों या बेटियों की प्राथमिकता तय करने लगते हैं। उन्हें क्या पसंद करना चाहिए, कैसे खेल खेलने चाहिए आदि पेरेंट्स खुद से ही फिक्स कर देते हैं। ऐसा करने से उन पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिलता है। पेरेंट्स को परवरिश के दौरान ऐसा करने से बचना चाहिए।

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3. बेटियों के लिए सिर्फ गुड्डे-गुड़िया और खिलौने खरीदना

बेटी और बेटे में फर्क करने से इसका उनपर नकारात्मक असर पड़ता है। अक्सर पेरेंट्स बच्चों की परवरिश के दौरान यह तय कर लेते हैं की अगर बेटी है तो उसे गुड़िया या खिलौने चाहिए और लड़का है तो उसे दूसरी चीजें चाहिए। ऐसा करने से बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है। बेटे और बेटियों के बीच में इस तरह के लिंग भेद का बेटियों पर नकारात्मक असर पड़ता है।

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4. बेटी को आवाज उठाने नहीं देना

भारतीय पेरेंट्स अक्सर अपनी बेटियों को कम आवाज में या धीरे बात करना और उन्हें समाज में आवाज उठाने से मना करते हैं। पेरेंट्स को ऐसा करने से बचना चाहिए। बेटे और बेटी के बीच में फर्क और बेटियों की बातों को नजरंदाज करने से इसका नकारात्मक असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। बेटियां अगर अपनी आवाज उठाती हैं तो पेरेंट्स को उन्हें और प्रेरित करना चाहिए जिससे उन्हें समझ में बराबरी का हक मिले।

5. बेटे और बेटी में तुलना न करें

यह सबसे आम पेरेंटिंग गलतियों में से एक है, जहां लगभग हर माता-पिता बेटियों की तुलना बेटों से करते हैं। ऐसा से या बेटियों की कमियां गिनाने और हर समय दूसरों से तुलना करने से उसके स्वाभिमान पर असर डाल पड़ सकता है। इसके अलावा इससे वह खुद को नालायक, नाकार या फिर अक्षम महसूस करवा सकती है। तुलना करने के बजाय, आप अपने बच्चे की उपलब्धियों की उसकी अच्‍छाईंयों के साथ बच्‍चे को समझाएं और उसके गलत काम पे सुधारने की कोशिश करें। बेटे और बेटियों की तुलना का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर जरूर पड़ता है।

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परवरिश के दौरान हर भारतीय माता-पिता को ये गलतियां नहीं करनी चाहिए। बेटे और बेटियों के बीच में फर्क करने या उनकी तुलना दूसरे से करने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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