Guava During Pregnancy First Trimester: अमरूद एक मौसमी फल है और सबको इसका सेवन करना चाहिए। यह हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें कई तरह के न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। जैसे अमरूद में विटामिन-सी, विटामिन-ए, मिनरल्स, फाइबर और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान भी इस फल को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। मगर सवाल ये है कि क्या प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में इस फल का सेवन किया जा सकता है? कहीं इसका शिशु के विकास पर नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ता है? Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानिए, गर्भस्थ शिशु और गर्भावस्था की पहली तिमाही में अमरूद खाने के फायदे-नुकसानों के बारे में।
क्या प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अमरूद खा सकते हैं?- Can We Eat Guava During Pregnancy First Trimester
अमरूद का सेवन निश्चित रूप से प्रेग्नेंसी में किया जा सकता है। खासकर, गर्भावस्था की पहली तिमाही की बात करें, तो इसमें भी यह फल लाभकारी साबित हो सकता है। इसकी पुष्टि करते हुए दिव्या गांधी कहती हैं, "अमरूद में फोलेट, विटामिन, फाइबर जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो इसे प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के लिए फायदेमंद बनाते हैं। ये सभी पोषक तत्व शिशु के विकास को सपोर्ट करते हैं और गर्भवती महिला की इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं।" दिव्या गांधी आगे कहती हैं, "प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस जैसी समस्या बना रहती है। अमरूद का सेवन करने से जी-मचलाना, उल्टी जैसी परेशानियों में भी कमी नोटिस की गई है।" कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अमरूद का सेवन करना अच्छा होता है।
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प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अमरूद खाने के लिए फायदे- Guava Benefits In Pregnancy First Trimester
गर्भवस्थ शिशु का विकासः अमरूद में विटामिन-बी9 यानी फोलेट होता है। यह तत्व गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें, तो फोलेट की मदद से शिशु का न्यूरल ट्यूब, ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की संरचना में मदद मिलती है।
आयरन एब्जॉर्पशन में मददगारः अमरूद में काफी ज्यादा मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो कि इम्यूनिटी को बूस्ट करता है। साथ ही, यह आयरन को अवशोषित करने में भी मदद करता है। इस तरह देखा जाए, तो गर्भावस्था की पहली तिमाही में इसका सेवन करने से एनीमिया का रिस्क कम होता है और बीमार होने के जोखिम में भी कमी आती है।
कब्ज की समस्या से राहतः जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी के दिन चढ़ते जाते हैं, महिला में कब्ज की समस्या भी बढ़ती जाती है। असल में, गर्भ का भार बढ़ने से शरीर के कई अंदरूनी अंगों पर दबाव बनने लगता है। ऐसे में सही तरह से बाउल मूवमेंट नहीं हो पाता है, जो कब्ज का कारण बनता है। वहीं, अमरूद खाने की कब्ज की समस्या से राहत मिलती है, क्योंकि यह डाइट्री फाइबर का स्रोत है। यह ब्लड शुगर को रेगुलेट करता है और इंसुलिन रेसिस्टेंस में भी सुधार करता है।
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प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अमरूद खाने के नुकसान- Side Effects Of Guava During Pregnancy First Trimester
वैसे तो प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अमरूद खाने से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अमरूद का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। साथ ही, इसे खाने से पहले अच्छी तरह धो लेना चाहिए। गंदा अमरूद खाने से पेट में बैक्टीरिया जा सकते हैं, जो गर्भवस्थ शिशु के लि हानिकार साबित हो सकता है। इसके अलावा, इस बात का भी ध्यान रखें कि अमरूद हमेशा फ्रेश खरीदें। प्रेग्नेंसी में फ्रिज में रखा पुराना अमरूद खाना सही नहीं होता है।
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निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में छिला हुआ फ्रेश अमरूद खाना काफी अच्छा होता है। इससे गर्भवस्था शिशु का बेहतर विकास होता है और गर्भवती महिला को भी जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि अगर किसी को अमरूद से एलर्जी है, तो उन्हें इसका सेवन करने से बचना चाहिए और इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
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FAQ
अमरूद कब नहीं खाना चाहिए?
अमरूद को खाली पेट नहीं खाना चाहिए। साथ ही, पेट दर्द, ब्लोटिंग और गैस जैसी समस्या में भी अमरूद खाने से बचना चाहिए।गर्भवती महिला को सबसे ज्यादा कौन सा फल खाना चाहिए?
गर्भवती महिला के हर तरह के मौसमी फल फायदेमंद होते हैं। उन्हें संतरे, सेब, जामुन, अनार, कीवी जैसे कई फलों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।अमरूद की तासीर क्या होती है?
आयुर्वेदाचार्य की मानें, तो अमरूद की तासीर ठंडी होती है, जो पाचन में सुधार के लिए लाभकारी होता है। यह कब्ज और गैस जैसी समस्या से भी राहत दिलाता है।