स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कराने वाली महिलाओं को व्रत रखना चाहिए या नहीं? जानें न्यूट्रीशनिस्ट से

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को उपवसा अपने सामर्थ्य के अनुसार रखने चाहिए। लंबे समय तक व्रत नहीं रखने चाहिए। 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jul 19, 2021Updated at: Jul 19, 2021
स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कराने वाली महिलाओं को व्रत रखना चाहिए या नहीं? जानें न्यूट्रीशनिस्ट से

बच्चे के लिए मां का दूध सबसे सेहतमंद माना जाता है। जन्म के 6 महीने के अंदर मां को शिशु को दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कई बार स्तनपान कराने वाली माताओं के मन में यह असमंजस रहती है कि वे नवजात शिशु को स्तनपान कराने के दौरान व्रत रख सकती हैं या नहीं। कई महिलाओं की धार्मिक आस्था इतनी प्रबल होती है कि वे नवरात्रों में 9 दिन के व्रत रखना चाहती हैं। लेकिन इस पर नमामी लाइफ में न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर की राय अलग है। न्यूट्रीशनिस्ट से जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली माताओं को व्रत रखने चाहिए या नहीं? आइए विस्तार से जानते हैं।

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क्या स्तनपान कराने वाली माताओं को व्रत रखना चाहिए?

इस सवाल के जवाब में न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि स्तनपान के दौरान महिलाओं को अधिक कैलोरी की जरूरत पड़ती है। इस दौरान उन्हें लगभग 400 से 500 कैलोरीज की मांग ज्यादा होती है। जन्म के 6 माह तक बच्चा पूरी तरह मां के दूध पर निर्भर रहता है। ऐसे में मां को व्रत रखना अवोइड करना चाहिए या नहीं करना चाहिए।

व्रत की अवधि रखती है मायने

न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि भारत एक धार्मिक देश है। यहां महिलाएं धार्मिक आस्था के चलते व्रत रखती हैं। कुछ व्रत 1 दिन के तो कुछ 9 दिन के होते हैं। तो वहीं, रोजे महीने के होते हैं। ऐसी परिस्थितयों में गर्भवती महिला या स्तनपान कराने वाली महिला का भूखा रहना महिला और शिशु में कमजोरी ला सकता है। न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि लगभग 8-10 घंटे तक व्रत रखना स्तनपान करानी वाली माताों में ब्रेस्ट मिल्क की सप्लाई को बाधित नहीं करता है, बशर्त मां की डाइट अच्छी होनी चाहिए। पर स्तनपान कराने वाली मां को शुरूआत के 6 महीने तक व्रत को अवोइड करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। 

स्तनपान कराने वाली माताएं कब रख सकती हैं व्रत?

इस सवाल के जवाब में न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि  कई धर्मों में ब्रेस्टफीडिंग के दौरान व्रत रखने को मना कर दिया जाता है। जब बच्चा 6 महीने से ऊपर हो जाए और खिचड़ी, रागी माल्ट, दाल का पानी, चावल का पानी, सूप आदि पीने लग जाए तब मां व्रत के बारे में सोच सकती है। लेकिन व्रत रखना क्यों है, इसके बारे में भी उन्हें मालूम होना चाहिए। तो वहीं, अगर नवरात्रि जैसे व्रत आप रख रही हैं तो आपको फल और व्रत-फ्रैंडली फूड्स जैसे मखाना या मूंगफली का सेवन करना चाहिए। नवरात्रि में पोषक तत्त्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। इसके अलावा छाछ भी ले सकते हैं, ताकि आपके शरीर में बराबर मात्रा में पानी रहे। शरीर में पानी की सही मात्रा दूध के निर्माण में मदद करता है। साधारण से पानी के अलावा, मेथी-सौंफ की चाय पी सकते हैं। मेथी और सौंफ के बीज दूध का निर्माण करते हैं। बादाम, सेसेम सीडिस आदि का सेवन भी मिलक की सप्लाई को बूस्ट करता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पानी पीना जरूरी है। फास्टिंग से पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें, साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जब बच्चा 6 महीने का हो जाए तभी फास्ट के बारे में सोचें। 

क्या स्तनपान के दौरान व्रत रखना शिशु के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है?

अगर कोई मां 24 घंटे से ज्यादा समय तक व्रत रख रही है तो उससे दूध में सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की थोड़ी कमी आ जाती है। ऐसे में शिशु का विकास भी बाधित होता है। हालांकि देखा गया है कि फास्ट रखने से ब्रेस्टफीडिंग पर खास फर्क नहीं पड़ता है।

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क्या स्तनापान के दौरान व्रत रखने से मां को कोई नुकसान हो सकता है?

इस सवाल के जवाब में न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि य फैसला पूरी तरह से मां पर निर्भर करता है। अगर मां पहले ही कमजोरी है तो व्रत रखने से उसके अंदर और कमजोरी हो सकती है। साथ ही लो ब्लड शुगर की परेशानी भी हो सकती है। स्तनपान कराने के दौरान व्रत रखने से मां को निम्न खतरों का सामना करना पड़ सकता है। 

वजन कम होना

ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिला अगर लंबे समय तक व्रत रख रही है तो शरीर में वसा (फैट) की कमी हो जाएगी, जिससे तेजी से वजन गिरेगा। इसिलए 8-10 घंटे तक व्रत के बारे में सोचा जा सकता है, पर इससे ज्यादा नहीं। लेकिन यह फैसला पूरी तरह से आपकी डाइट के साथ जुड़ा हुआ है। आप जितनी अच्छी डाइट लेते हैं, उतना सही मिल्क प्रोडक्शन होगा। उपवास करने से शरीर में प्रोटीन की कमी भी हो जाती है।

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ब्रेस्ट मिल्क की सप्लाई

लगातार व्रत रखने से शरीर में वसा की कमी हो सकती है, पर उससे स्तनदूध की मात्रा पर असर नहीं पड़ेगा। आप जब भी उपवास रखने के बारे में सोचें तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें। अन्यथा इस पर फैसला न लें। उपवास रखने के बाद महिलाओं को सही डाइट लेने की सलाह दी जाती है, इसके पीछे वजह सिर्फ इतनी है कि उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्त्वों की कमी न हो। 

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स्तनपान के दौरान महिलाएं कैसे रखें अपना ख्याल?

  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पूरे-पूरे व्रत नहीं रखने चाहिए। बल्कि आगे-पीछे वाल रखने चाहिए। 
  • ऐसे व्रत जो निर्जला व्रत होते हैं, वे नहीं रखने चाहिए। अगर आप रख भी रही हैं तो कड़ाई से व्रत के नियमों का पालन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें।
  • स्तनपान कराने वाली महिला को अपनी डाइट का अच्छा ख्याल रखना चाहिए। उसे जरूरी पोषक तत्त्वों से भरपूर भोजन व फलों का सेवन करना चाहिए। अधिक मसालेदार खाना न खाएं। साथ ही बहुत अधिक सोडा पेय पदार्थों का भी सेवन न करें।
  • न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि लैक्टेटिंग मदर को पानी खूब पीना चाहिए। शरीर में पानी की कमी से दूध के निर्माण में कमी आ जाती है। ऐसे में दूध ठीक से बनता नहीं है। इसलिए स्तनपान कराने वाली महिला को छाछ, नारियल पानी आदि व्रत में भी पी लेना चाहिए। 
  • यदि आप स्तनपान करा रहीं तो आपकी सेहत और बच्चे की सेहत के लिए जरूरी है कि आप सही समय पर सोएं और आराम करें। अगर आप आराम नहीं कर पाते हैं तो शरीर में दर्द और थकान हो सकती है। ऐसे में व्रत रखने की भी ऊर्जा शरीर में नहीं रह जाएगी। 

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को उपवसा अपने सामर्थ्य के अनुसार रखने चाहिए। लंबे समय तक व्रत नहीं रखने चाहिए। अगर बच्चा अपनी भूख के लिए पूरी तरह से मां पर निर्भर है तो मां को लंबे समय तक उपवास नहीं रखना चाहिए। 

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