Fri Sep 11, 2026 | 09:06 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

पान का पत्ता एंटीफंगल है? जानें त्वचा पर फंगल इंफेक्शन होने पर कैसे करें इसका इस्तेमाल

Betel leaf for skin infection: पान का पत्ता पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता रहा है लेकिन क्या ये स्किन के लिए भी फायदेमंद है? क्या ये एंटीफंगल है? जानते हैं इस बारे में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से।

Betel leaf for skin infection: सर्दियों में अक्सर लोग फंगल इंफेक्शन के शिकार ज्यादा हो जाते हैं। इस दौरान नमी की वजह से और कई बार हाइजीन की कमी से भी लोग इस इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में दवाओं के अलावा कुछ देसी उपचारों की मदद ली जाए तो इस स्थिति से जल्दी रिकवर किया जा सकता है। ऐसे में आप पान के पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं जो कि खाने से लेकर स्किन तक की, कई समस्याओं को कम करने में मददगार है लेकिन आज हम जानेंगे कि क्या पान का पत्ता एंटीफंगल है? क्या आप इसका इस्तेमाल स्किन इंफेक्शन के लिए कर सकते हैं जानते हैं इस बारे में Shrey Sharma (Ayurvedic doctor from Ramhans Charitable Hospital) से।

क्या पान का पत्ता एंटी-फंगल है-Is betel leaf anti-fungal?

आयुर्वेदिक डॉक्टर Shrey Sharma बताते हैं कि पान के पत्ते में एंटीफंगल गुण होते हैं। NIH की स्टडी बताती है कि पान के पत्ते में महत्वपूर्ण एंटीफंगल गुण होते हैं। यह प्रभाव मुख्य रूप से इसमें मौजूद जैवसक्रिय यौगिकों, विशेष रूप से हाइड्रोक्सीचैविकोल (hydroxychavicol) और यूजेनॉल (eugenol) जैसे पॉलीफेनॉल के कारण होता है। पान के पत्तों में जरूरी तेल और अर्क में यूजेनॉल (eugenol), चैविकोल (chavicol) और टेरपीन (terpenes) जैसे विभिन्न यौगिक होते हैं, जो एंटीफंगल गतिविधि प्रदर्शित करते हैं।

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त्वचा के फंगल इंफेक्शन में कितना कारगर है पान का पत्ता

खासतौर पर हाइड्रोक्सीचैविकोल (hydroxychavicol), एक प्रमुख यौगिक है जो अलग-अलग प्रकार के फंगल ग्रोथ को रोकते हैं। शोध से पता चला है कि पान के पत्ते के अर्क कई फंगल प्रजातियों के खिलाफ प्रभावी हैं, जिनमें कैंडिडा एल्बिकेंस जो मुंह के छाले का कारण बनता है और डर्माटोफाइट्स (dermatophytes) जो एथलीट फुट और दाद जैसे त्वचा संक्रमण का कारण बनते हैं वो भी शामिल हैं। इस प्रकार से स्किन के फंगल इंफेक्शन में पान के पत्ते का इस्तेमाल मददगार है और इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

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त्वचा पर फंगल इंफेक्शन होने पर कैसे करें इसका इस्तेमाल-How to use paan leaf on fungal infection

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि फंगल इंफेक्शन होने पर आप सबसे पहले को पान के पत्ते को पीसकर इसके अर्क का सेवन कर सकते हैं। भले ही आप कोई और दवा भी ले रहे हों लेकिन तब भी आप पान के पत्ते का अर्क ले सकते हैं। इसके अलावा आप ये कर सकते हैं त्रिफला के साथ पान के पत्ते को उबालकर इसका जूस बनाकर पी सकते हैं जो कि फंगल इंफेक्शन पर काफी असरदायक है। इसके अलावा आप

  • -पान के पत्ते को पीसकर सीधे फंगल इंफेक्शन वाली जगह पर भी लगा सकते हैं।
  • -आप पाने के पत्ते के अर्क को शहद के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं या इंफेक्शन वाली जगह पर भी लगा सकते हैं जो कि फंगल ग्रोथ को रोकने में मददगार है।
  • -आप स्किन पर पान के पत्ते का तेल लगा सकते हैं जो कि फंगल इंफेक्शन को कम करने में मददगार है। इस तेल को आप नारियल तेल, कपूर और लौंग के साथ मिलाकर बना सकते हैं और लगा सकते हैं।

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त्वचा के लिए पान के पत्ते का फायदे-Paan leaf benefits on fungal infection

त्वचा के लिए पान का पत्ता कई प्रकार से फायदेमंद है। ये एलर्जी को कम करने के साथ एक्ने कम करने में मददगार है। पान के पत्ते में एंटी बैक्टीरियल गुण होता है जो कि एक्ने को कम करने के साथ स्किन को कम करने में मददगार है। इसके अलावा ये दाग-धब्बों को भी कम करने में मददगार है जो कि स्किन की कई समस्याओं में फायदेमंद है।

तो इस प्रकार से आप त्वचा के लिए पान के पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं जो कि स्किन की कई समस्याओं को कम करने के साथ ओरल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। इन टिप्स को अपनाएं और फंगल इंफेक्शन के लिए इस पत्ते का इस्तेमाल करें।

FAQ

  • क्या पान का पत्ता खुजली वाली त्वचा के लिए अच्छा है?

    पान का पत्ता एंटीएलर्जिक है जो कि खुजली कम करने के साथ स्किन से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मददगार है। अगर आपको खुजली हो रही है तो आप पान के पत्ते को उबालकर, पानी को ठंडा करके अपने चेहरे को धो सकते हैं। 
  • क्या हम चेहरे पर पान का पत्ता लगा सकते हैं?

    जी हां, आप चेहरे पर पान का पत्ता लगा सकते हैं। आपको बस करना ये है कि पान के पत्ते को पीस लें और इसे सीधेतौर पर लगाएं। इसके अलावा आप पान के पत्ते का रस भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • खांसी और जुकाम के लिए पान के पत्ते का उपयोग कैसे करें?

    खांसी और जुकाम के लिए पान के पत्ते का उपयोग कर सकते हैं। आप इसे उबालकर काढ़े के रूप में पी सकते हैं जो कि फेफड़ों की सूजन और कंजेशन को कम करने में मददगार है।

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Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 19, 2025 14:52 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Dec 19, 2025 14:52 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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