फंगल इंफेक्शन एक गंभीर समस्या है खासतौर पर बरसात के मौसम में नमी बढ़ने के कारण ये दिक्कत ज्यादा बढ़ जाती है। फंगल इंफेक्शन के कारण स्किन पर लाल चकत्ते, खुजली, स्किन पर घाव, महिलाओं में बार-बार होने वाला यीस्ट इंफेक्शन और गंभीर मामलों में फेफड़ों या दिमाग तक इंफेक्शन हो सकता है। आमतौर पर ये इंफेक्श जानलेवा नहीं होते, लेकिन डायबिटीज, एचआईवी, कैंसर या लंबे समय तक ICU में भर्ती मरीजों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। फंगस धीरे-धीरे दवाओं के प्रति रेजिस्टेंस (प्रतिरोधक क्षमता) विकसित कर लेता है, जिसके चलते इलाज और कठिन हो जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार ऐसे नए इलाज खोजने में जुटे हैं जो ज्यादा असरदार हों और जिनका असर लंबे समय तक बना रहे। इस लेख में मेडिकल रिसर्च और मेट्रो अस्पताल, नोएडा, कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन, डॉ. अक्षय चुघ (Dr. Akshay Chugh, Consultant - Internal Medicine, Metro Hospital, Noida) से जानिए, फंगल इंफेक्शन से छुटकारा दिलाने में कौन से विटामिन सहायक हो सकते हैं?
फंगल इंफेक्शन से छुटकारा दिलाने वाले विटामिन - Vitamin to fight fungal infections
NCBI की एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कई विटामिन pathways की जांच की और पाया कि विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन), B3 (पैंटोथेनिक एसिड) और B9 (फोलेट) से जुड़ी प्रक्रियाएं फंगल इंफेक्शन रोकने के लिए सबसे बेहतर लक्ष्य हो सकती हैं। ये सभी विटामिन्स फंगस के जीवित रहने और उसकी वृद्धि के लिए बेहद जरूरी हैं। अगर इन विटामिन्स के बनने वाली प्रक्रिया को बीच में ही रोका जाए, तो फंगस कमजोर पड़ जाएगा और उसका इंफेक्शन फैल नहीं पाएगा।
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फोलेट यानी विटामिन B9 का बायोसिंथेसिस पाथवे पहले से ही कई माइक्रोबियल और एंटिफंगल दवाओं में इस्तेमाल किया जा चुका है। इसका मतलब है कि वैज्ञानिकों को इस रास्ते पर पहले से ही अनुभव है और इसे आगे और भी बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है। जब फोलेट का निर्माण फंगस के अंदर रुक जाता है, तो उसकी सेल डिविजन यानी कोशिका विभाजन की प्रक्रिया ठप हो जाती है और फंगस जीवित नहीं रह पाता। यही वजह है कि इसे एंटिफंगल ड्रग टारगेट के तौर पर सबसे ज़्यादा अहम माना जा रहा है।
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क्यों खास हैं ये विटामिन्स?
राइबोफ्लेविन (B2) और पैंटोथेनिक एसिड (B3) दोनों ही फंगस के मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय के लिए बेहद जरूरी हैं। अगर इनके बनने की प्रक्रिया बाधित कर दी जाए तो फंगस एनर्जी नहीं बना पाएगा और उसका विकास रुक जाएगा। यह तरीका इंसानों के शरीर पर सीधे असर नहीं डालता क्योंकि इंसान ये विटामिन्स बाहर से डाइट के जरिए लेते हैं। यानी यह टारगेट सिर्फ फंगस को ही प्रभावित करेगा, जिससे दवाओं के साइड इफेक्ट कम होंगे।
डॉ. अक्षय चुघ बताते हैं कि रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि विटामिन B2, B3 या B9 की डाइट से ज्यादा खुराक लेने से फंगल इंफेक्शन से बचाव होगा। दरअसल, ये टारगेट फंगस के शरीर में बनने वाली प्रक्रिया पर आधारित हैं, न कि इंसानों में मिलने वाले विटामिन्स पर। यानी फंगल इंफेक्शन के इलाज में भविष्य की दवाएं इन पाथवे को रोककर काम करेंगी। आम लोगों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते फंगल इंफेक्शन की पहचान करें, डॉक्टर की सलाह लें और खुद से दवाइयों का प्रयोग न करें।
निष्कर्ष
नई रिसर्च साफ बताती है कि आने वाले समय में विटामिन B2, B3 और B9 pathways फंगल इंफेक्शन रोकने के लिए सबसे अहम साबित हो सकते हैं। खासकर फोलेट (B9) पाथवे, जिसकी पहले से मौजूद दवाओं में सफलता मिल चुकी है, भविष्य में भी एंटिफंगल उपचार का मजबूत आधार बन सकता है। आधुनिक तकनीकों जैसे कंप्यूटर बेस्ड ड्रग डिजाइन और जीनोमिक्स की मदद से जल्द ही ऐसी नई दवाएं बाजार में आ सकती हैं जो न सिर्फ फंगल इंफेक्शन को रोकेंगी बल्कि उसकी रेजिस्टेंस को भी खत्म करने में सहायक होंगी।
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