इंसुलिनोमा (Insulinoma) एक दुर्लभ ट्यूमर है जो अग्न्याशय या पैंक्रियाज में बनता है। यह ट्यूमर शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन का ज्यादा उत्पादन करने लगता है। इंसुलिनोमा के ज्यादातर मामलों में ट्यूमर कैंसर रहित होता है लेकिन समय पर पहचान और इलाज जरूरी है। यह शरीर में जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बनाता है जिससे ब्लड में शुगर बहुत कम हो जाता है और इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। आमतौर पर ट्यूमर छोटा और गांठ जैसा होता है जो पैंक्रियाज के किसी भी हिस्से में बन सकता है। इंसुलिनोमा को समझने के लिए हमने Dr. M. Sheetal Kumar, Consultant Physician & Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
इंसुलिनोमा क्या है?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि इंसुलिनोमा एक प्रकार का दुर्लभ ट्यूमर है जो अग्न्याशय या पैंक्रियाज (Pancreas) में होता है। जब भी हम कुछ खाते हैं, तो पैंक्रियाज इंसुलिन बनाता है। इंसुलिनोमा की स्थिति में अतिरिक्त मात्रा में इंसुलिन बनता है। इंसुलिनोमा के कारण ब्लड शुगर बहुत कम (Hypoglycemia) हो जाता है। इंसुलिनोमा की स्थिति में पैंक्रियाज हर समय इंसुलिन बनाता रहता है, तब भी जब आपका शुगर लेवल बहुत ज्यादा कम हो जाता है। 2018 में Clinical Endocrinology नामक जर्नल में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, इंसुलिनोमा एक दुर्लभ ट्यूमर है जो प्रति वर्ष दस लाख लोगों में चार लोगों में देखा जाता है।
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इंसुलिनोमा के लक्षण
- कंपकंपी
- पसीना आना
- भ्रम होना
- अधिक भूख लगना
- अक्सर उपवास के बाद बेहोशी
इंसुलिनोमा के कारण
- ज्यादातर मामलों में कैंसर रहित ट्यूमर (Benign Tumor) के कारण यह समस्या होती है।
- जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं।
- Johns Hopkins Medicine के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाएं इंसुलिनोमा से ज्यादा प्रभावित होती हैं। ज्यादातर मामलों में, यह 40 से 60 साल की उम्र के बीच शुरू होता है। कुछ आनुवंशिक बीमारियों से इंसुलिनोमा होने की संभावना बढ़ सकती है।
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इंसुलिनोमा का खतरा किसे ज्यादा होता है?
- 40 से 60 साल की उम्र में ज्यादा देखने को मिलता है।
- इसका संबंध जेनेटिक कारण जैसे Multiple Endocrine Neoplasia type 1 (MEN1) से भी हो सकता है।
- जिन लोगोंं को पहले से पैंक्रियाज में ट्यूमर हो।
- बच्चों में यह दुर्लभ है।
इंसुलिनोमा की जांच
- इंसुलिनोमा में इंसुलिन और ब्लड शुगर का पता लगाने के लिए फास्टिंग ब्लड टेस्ट किया जाता है।
- C-peptide और इंसुलिन लेवल की जांंच भी होती है।
- इंसुलिनोमा का पता लगाने के लिए इमेजिंग टेस्ट जैसे सीटी स्कैन या MRI भी किए जाते हैं।
- ट्यूमर का पता लगाने के लिए एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है।
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इंसुलिनोमा का इलाज
Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी पहला उपचार है। अगर सर्जरी संभव न हो, तो दवाओं की मदद से लक्षणों को कंट्रोल किया जाता है। इंसुलिनोमा का इलाज करने के लिए ट्यूमर को हटाना जरूरी है। ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है। ट्यूमर के साइज और संख्या से तय होता है कि ट्यूमर हटाने के लिए कौन सी सर्जरी की जाएगी? अगर ट्यूमर छोटा है, तो लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी में चीरा लगाकर लेप्रोस्कोप शरीर में डाला जाता है। फिर कैमरा की मदद से ट्यूमर को ढूंढकर निकाल लिया जाता है।
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इंसुलिनोमा को मैनेज कैसे करें?
इंसुलिनोमा को मैनेज करने के लिए मरीज को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है जैसे-
- छोटे मील्स खाएं।
- अगर डायबिटीज है, तो दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें।
- ब्लड शुगर लेवल को लगातार मॉनिटर करें।
- नियमित तौर पर जांच कराएं।
- लंबे समय तक खाली पेट न रहें।
- अल्कोहल का सेवन करने से बचें।
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इंसुलिनोमा में कैसी डाइट लें?
- इंसुलिनोमा में कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (ओट्स, साबुत अनाज) का सेवन करें।
- प्रोटीन और हेल्दी फैट्स युक्त आहार लें।
- हर तीन से चार घंटे में कुछ खाएं। भोजन स्किप करने से बचें।
- 2021 में Clinical Nutrition नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, इंंसुलिनोमा में लो शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए बार-बार मील्स लेने से मदद मिली। साथ ही स्टडी में बताया गया कि हेल्दी डाइट की मदद से हाइपोग्लाइसीमिया को कंट्रोल किया जा सकता है।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
दौरे पड़ना, भ्रम या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लगातार निगरानी के लिए नियमित जांच भी जरूरी है।
निष्कर्ष:
Consultant Physician & Diabetologist Dr. M. Sheetal Kumar से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है कि इंसुलिनोमा अग्नाशय में होने वाला एक ट्यूमर है। यह जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बनाता है, इतना ज्यादा कि आपका शरीर इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिनोमा की वजह से ब्लड शुगर का लेवल कम हो सकता है जिसे (हाइपोग्लाइसीमिया) कहते हैं। इंसुलिनोमा में ज्यादातर ट्यूमर कैंसर का रूप नहीं लेते हैं। ट्यूमर को हटा देने से यह बीमारी ठीक हो जाती है।
FAQ
इंसुलिनोमा का इलाज सर्जरी के बगैर संभव है?
ज्यादातर मामलों में इंसुलिनोमा का इलाज सर्जरी के बगैर संभव नहीं है। ज्यादातर कैंसर रहित ट्यूमर में लैप्रोस्कोपी जैसी सर्जरी की मदद ली जाती है।इंसुलिनोमा में एक से ज्यादा ट्यूमर भी हो सकते हैं?
इंसुलिनोमा में आमतौर पर एक ट्यूमर होता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में एक से ज्यादा ट्यूमर हो सकते हैं।इंसुलिनोमा और हाइपोग्लाइसीमिया का क्या संबंध है?
इंसुलिनोमा में ज्यादा इंसुलिन बनता है जिससे ब्लड शुगर लेवल नीचे जाता है और बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखते हैं।इंसुलिनोमा और कैंसर का क्या संबंध है?
इंसुलिनोमा में ट्यूमर हो जाता है जो कैंसर का रूप भी ले सकता है। हालांकि ज्यादातर मामले कैंसर रहित होते हैं, लेकिन शुरुआती चरण में इसका पता चल जाए, तो इलाज संभव है।
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Apr 25, 2026 17:42 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 25, 2026 17:42 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 25, 2026 17:42 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr M Sheetal Kumar