अपराध बोध पावरफुल इमोशन है। यह हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह का हो सकता है। अपराध बोध अगर लंबे समय तक रहे तो गंभीर परेशानियों होती हैं।

 

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अपराध बोध (Guilt Feeling) से बाहर कैसे निकलें? डॉक्टर से जानें आसान टिप्स

अपराध बोध पावरफुल इमोशन है। यह हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह का हो सकता है। अपराध बोध अगर लंबे समय तक रहे तो गंभीर परेशानियों होती हैं।

 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiUpdated at: Jul 26, 2021 11:18 IST
अपराध बोध (Guilt Feeling) से बाहर कैसे निकलें? डॉक्टर से जानें आसान टिप्स

ईर्ष्या, गुस्सा, गर्व, अचीवमेंट की तरह ही अपराध बोध (Guilt Feeling) भी एक पावरफुल इमोशन है। अपराध बोध में सेल्फ डाउट और शर्म की भावना आ जाती है। गिल्ट में हम अपनी गलती को नहीं देखते। या तो हम सामने वाली की पूरी गलती देखते हैं या अपनी देखते हैं। गिल्ट में जाने का मतलब है कि खुद को नकारात्मक विचारों से घेर लेना। गिल्ट बढ़ने के साथ एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ओसीडी, आत्महत्या जैसी परेशानियां भी बढ़ती हैं। माइंडफुल टीएमएमस जीके2 में क्लीनिकल साइकॉलोजिस्ट प्रज्ञा मलिक का कहना है कि अपराध बोध की फीलिंग जब 6 महीने से ज्यादा हो जाती है तब वह एंग्जाइटी और स्ट्रेस में बदल जाती है। यह भावना अगर 2 साल से ज्यादा बढ़ जाए तो आत्महत्या और डिप्रेशन तक की सिचुएशन आ जाती है। डॉ. प्रज्ञा मलिक ने अपराध बोध से बाहर निकलने के कुछ आसान तरीके बताएं हैं। आइए डॉक्टर से जानते हैं वो तरीके। 

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अपराध बोध (Guilt) के लक्षण

  • इमोशन (शर्म)
  • एंग्जाइटी
  • तिरस्कार (humiliation)
  • कुंठा (frustration)
  • स्ट्रेस
  • डिप्रेशन के लक्षण
  • स्वयं को दोष

अपराध बोध के प्रकार

डॉ. प्रज्ञा मलिक ने अपराध के दो प्रकार बताए हैं, जो निम्न हैं-

स्वस्थ अपराध बोध फीलिंग (Healthy Guilt Feeling)

हेल्दी गिल्ट फीलिंग उसे कहा जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति गलती करके स्वीकार कर लेता है कि उससे गलती हो गई है। उसके लिए यह गिल्ट अलार्म का काम करती है। डॉ. प्रज्ञा मलिक ने उदाहरण देकर बताया कि कभी-कभी चिल्लाने के बाद हमें गिल्ट महसूस होता है कि हमने किसी पर क्यों चिल्लाया। जब हम इसे महसूस कर लेते हैं तो कोशिश करते हैं कि अगली बार किसी पर नहीं चिल्लाएंगे। इस फीलिंग को हेल्दी गिल्ट कहते हैं। अपनी गलती मान लेना हेल्दी गिल्ट के अंदर आता है। जो लोग अपनी गलती मान लेते हैं वे गिल्ट से निकल जाते हैं। जो लोग नहीं बताते हैं कि वे गिल्ट में रहते हैं और कुछ महीनों बाद किसी मानसिक बीमारी का शिकार भी हो सकते हैं। 

हेल्दी गिल्ट से बाहर के तरीके-

समस्या को सुधारना

डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि अगर आपसे कोई गलती हो गई है तो उसे सुधारने की कोशिश करें। अपनी गलती को स्वीकार करे। उसमें आपकी कितनी गलती थी, आप गलती थी भी या नहीं। इन सब का विश्लेषण करें। जितनी जल्दी आप गलती को सुधार लेंगे उतनी जल्दी उस फीलिंग से बाहर निकल जाएंगे। अगर किसी से गलती हुई है तो उसे माफ करें, ताकि आप भी खुश रह सकें।

अपना व्यवहार बदलें

जब आपको परेशानी समझ आ गई है तो उसे सुधारें। साथ ही अपना बिहेवियर भी बदलें। डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि बहुत सारे काम हमारे गलत बिहेवियर की वजह से होते हैं। इस गलत बिहेवियर में  चिटिंग, शराब पीना आदि आता है। बिहेवियर बदलने से आपकी वजह से दूसरों की परेशानी भी नहीं होगी साथ ही आप गिल्ट में भी नहीं जाएंगे।  ऐसी परिस्थितियों में मूड स्विंग्स की वजह से भी आपका बिहेवियर बदलता है, उसे समझें और मूड स्विंग्स से बचें।

स्वीकार करें और आगे बढ़ें

डॉ. प्रज्ञा मलिक कहना है कि अपनी गलतियों को स्वीकार करने से गलतियां कुंठा नहीं बनती हैं। कुंठा नहीं बनने से गिल्ट नहीं आती। गलतियां स्वीकार करने के लिए माइंडफुल टेक्नीक को अपनाएं। माइंडफुल टेक्नीक में खुद की अच्छाइयां और बुराइयां दोनों को साथ रखें। माइंडफुल टेक्नीक के अलावा इमोशनल इंटेलिजेंस को भी अपनाएं। इमोशनल इंटेलिजेंस में आता है कि अगर हमसे अभी गलती हो गई है तो अगली बार वह गलती नहीं होगी, ऐसा खुद से तय करें। समस्या को स्वीकार करके आगे बढ़ें और देखें कि आगे क्या ठीक हो सकता है।

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मुखर बनें

जब भी आप गिल्ट में हैं तो अपनी गलतियों को और दूसरों की गलतियों को भी देखें। दूसरों को भी गलतियों की वजह से उन्हें जिम्मेदार न ठहराएं। दूसरों को भी प्रेज करें। ताकि वो भी मोटिवेट हो सकें। 

प्रतिज्ञान लें

खुद से सकारात्मक प्रतिज्ञान लें। खुद से तय करें कि आपमें जो कमियां हैं, उन्हें आप सुधारेंगे। उदाहरण के लिए जिसको शराब पीने की आदत है वो खुद को अफर्मेशन दे सकता है कि वो दोबारा ऐसे नहीं करेगा। 

खुद से बात करें

खुद से बात करने से हम खुद की परेशानियों समझ सकते हैं। खुद से बात करके खुद को समझाते हैं। स्वयं से बात करने से आप खुद के लिए अभद्र न बनें। सेल्फ टॉक में जरूरी है कि कोई आप पर विश्वास करे। जिससे आप खुद से बाहर निकलते हैं। खुद से बात करने से अपनी परेशानियों को ठीक से एनालाइस कर लेते हैं।

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अस्वस्थ अपराध बोध (Unhealthy Guilt Feeling)

अस्वस्थ अपराध बोध उसे कहते हैं जिसमें बिना सोचे समझे गिल्ट आ जाती है। किसी भी वजह से गिल्ट आ जाती है। इस गिल्ट का कोई कारण नहीं होता। इसका आउटकम अनहेल्दी हो सकता है। भविष्य में या पास्ट में कोई गलती हो गई तो उसके लिए भी अनहेल्दी गिल्ट फीलिंग आ सकती है। डॉ. प्रज्ञा मलिक ने उदाहरण देकर बताया कि जो सिचुएशन हमारे हाथ में नहीं होती, और उसकी वजह से कोई अनहोनी हो जाए तो उस वजह से भी गिल्ट हो जाती है। अगर बॉस डांट दे तब भी गिल्ट आ जाती है। किसी की डेथ हो गई तो उस वजह से भी गिल्ट आ जाती है। अगर किसी का एक्सीडेंट हो गया तब भी हम खुद को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। जिस वजह से हमारे मन में गिल्ट आ जाती है। डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि अनहेल्दी गिल्ट फीलिंग में खुद की आलोचना का व्यवहार आ जाता है।  

अनहेल्दी गिल्ट से बाहर निकलने के तरीके

सच्चाई के साथ जीएं

आपके परिवार या आसपास में कोई घटना घट गई है या घट चुकी है तो वह आपकी वजह से घटी है या आप उस परिस्थिति में किसी मदद करके उस घटना को होने से बचा सकते थे, अगर ऐसे भाव मन में आ रहे हैं तो उसे बाहर निकाल दें। वर्तमान में आपके सामने जो सच्चाई है, उसें देखें। पीछे क्या हुआ उसको लेकर खुद को जिम्मेदार ठहराकर कोसते न रहें। जो घट गया है उसे आप ठीक नहीं कर सकते थे, ऐसा सोचें। जिससे आप गिल्ट से बाहर निकल पाएंगे।

आकलन करें

खुद से आकलन करें कि इन परिस्थितियों से बाहर निकलने का आउटकम क्या होगा। अगर अच्छा होगा तो जरूर निकलें। खुद को जज करें ताकि आप परिस्थिति को अपने अनुसार समझ सकें। साथ ही यह भी देखें कि कोई घटना घटी है तो उसमें आपकी क्या स्थिति थी, आपके हाथ में कितना कंट्रोल था। उदाहरण के लिए अगर किसी को कोविड हुआ तो आपने उनकी दवा, वैक्सीन, हॉस्पिटल सब करवाया,लेकिन फिर भी किसी मृत्यु हो गई तो उसमें आपकी गलती नहीं है। ऐसे में खुद को ब्लेम न करें कि हम किसी की जान बचा सकते थे। आपके बस में क्या करना है, उसे देखें।

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माइंडसेट पर काम करें

डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि गिल्ट से बाहर निकलने की चाबी माइंडसेट पर काम करना होता है। माइंडसेट अगर सेट है तो सब सेट होता है।  

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सपोर्ट लें

जब आप गिल्ट में हों तो सपोर्ट ले। अगर तुम्हें लगता है कि मेरी वजह से कोई परेशानी हुई तो उसके बारे में बाकियों से बात करें। अपना सपोर्ट सिस्टम बनाएं। ताकि आपको गिल्ट से बाहर निकलने में आसानी हो। 

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से मन खुश रहता है। आपके निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही गुड हार्मोन बनते हैं। इस वजह से आपकी प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। 

डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि अगर हम अनहेल्दी गिल्ट से बाहर नहीं निकल पाते हैं तब ट्रामा, आत्महत्या के लक्षण ज्यादा दिखने लग जाते हैं। इसलिए आपके आपके आसपास हेल्दी लोगों को होना जरूरी है। अपराध बोध पावरफुल इमोशन है। यह हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह का हो सकता है। अपराध बोध अगर लंबे समय तक रहे तो गंभीर परेशानियों होती हैं।

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