क्या हमेशा व्यस्त रहना खुद को खुश रखने का सही तरीका है? मनोवैज्ञानिक से जानें खुश रहने के आसान टिप्स

खुश रहने का कोई पैमाना नहीं है। पर हमेशा व्यस्त रहकर भी खुश नहीं रहा जा सकता है। आपकी खुशियां आपकी परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jul 06, 2021Updated at: Jul 06, 2021
क्या हमेशा व्यस्त रहना खुद को खुश रखने का सही तरीका है? मनोवैज्ञानिक से जानें खुश रहने के आसान टिप्स

21वीं सदी में हर व्यक्ति खुद को मल्टीटास्किंग मानता है। एक तरफ ऑफिस का काम, दूसरी तरफ वॉट्सऐप नोटिफिकेशन, तीसरी तरफ काम के नोट्स बनाना आदि....ऐसे कई काम होते हैं जो मनुष्य एक साथ करता है। लेकिन क्या वाकई मल्टीटास्किंग होना खुद को खुश रखने का सही तरीका है। कई लोगों का मानना है कि खुद को हमेशा व्यस्त रखकर खुद को व्यस्त रखा जा सकता है। हर व्यक्ति खुद को हमेशा व्यस्त रखकर खुश रह सकता है, यह सभी पर अलग-अलग निर्भर करता है। इस सवाल के जवाब के लिए हमने बात की गुरुग्राम के अवेकनिगं रिहैब में मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा मलिक से।

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क्या कहती हैं एक्सपर्ट

मनोवैज्ञानिक प्रज्ञा मलिक का कहना है कि हमेशा व्यस्त रहना खुश रहने का पैमाना नहीं है। जो व्यक्ति एक समय में कई काम कर रहा होता है और खुद को व्यस्त मानता है, वह किसी काम को अपना पूरा 100 फीसद देकर नहीं कर पाता। ऐसे में उसके काम की क्षमता कम होने लगती है। वह कन्फ्यूजन में रहने लगता है। डिसिजन मेकिंग पर असर पड़ता है। इसलिए एक समय में एक काम करके आप अपनी प्रोडक्टिविट बढ़ा सकते हैं। लेकिन हमेशा व्यस्त रहकर आप हमेशा खुश नहीं रह सकते है, इससे आपको मानसिक थकान जरूर महसूस हो सकती है। 

खुश रहने के टिप्स

मनोवैज्ञानिक प्रज्ञा मलिक के मुताबिक खुश रहने के टिप्स-

खुद का विश्लेषण करना

डॉक्टर का कहना है कि आप खुश तभी रह सकते हैं, जब आप यह जान लें कि आप परेशान किस बात से हैं। आपकी परेशानी की वजह क्या है। दूसरा अगर आपके पास कई विकल्प हैं तो उस विकल्प में से आपके लिए कौन सा बेहतर होगा। आपकी परिस्थितियों के अनुसार फैसला लें। जब आप खुद का विश्लेषण करते हैं तो उससे आप अपने उद्देश्य स्पष्ट कर पाते हैं। फिर उद्देश्य के लिए बिना किसी कन्फ्यूजन के आगे काम कर सकेत हैं।

आपकी आज की स्थिति

मनोवैज्ञानिक का मानना है कि आपकी आज की स्थिति क्या है, जब आप इसका विश्लेषण कर लेते हैं तो उससे आपको फैसला लेने में आसानी हो जाती है। अपनी परिस्थितियों का आकलन करते हुए अपने गोल सैट करिए। इससे आपको तनाव नहीं होगा। आप जो कर सकते हैं, उस पर फोकस करें। पर अगर आप हमेशा व्यस्त रहेंगे तो उससे आपकी काम की क्षमता पर असर पड़ेगा।

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लक्ष्य का डायरेक्शन

मनोवैज्ञानिक प्रज्ञा का मानना है कि हमारी डायरेक्शन पर हमारी खुशी निर्भर करती है। हमारी खुशी हमारे लक्ष्य पर निर्भर करती है। हम चाहते क्या हैं, इस पर हमारी डायरेक्शन कैसी है, इस पर निर्भर करती है। जिस काम से संतुष्टि नहीं मिलती है, वह काम नहीं करना चाहिए। जो आपकी जरूरत है, उसको हमेशा चेक करते रहें। साथ ही हमें हमेशा यह भी जांच करते रहना चाहिए कि क्या हमारी डायरेक्शन ठीक है या नहीं? इस तरह अपने आगे के फैसले लें।

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मोटिवेशन

अपने काम के प्रति अपना मोटिवेशन बनाएं रखें। दूसरों से सीखते रहें। आपका मोटिवेशन ही आपको सफलता पर पहुंचाएगा, जिससे आपकी खुशी जुड़ी है। आपकी खुशी का कोई पैमाना नहीं है। यह छोटी या बड़ी कैसी भी हो सकती है। बस शर्त यह है कि आपका जो भी लक्ष्य है, उस पर अपना मोटिवेशन बनाएं रखें। 

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सहयोग

जो काम आप कर रहे हैं उसके लिए सपोर्ट सिस्टम बनाएं। अव्वल तो आपका परिवार आपका सपोर्ट सिस्टम होता है, पर अगर परिवार से आपको पूरा सपोर्ट नहीं मिल रहा है तो अपना सपोर्ट सिस्टम क्रिएट करें। सपोर्ट सिस्टम से आपके काम आसान हो जाते हैं। सपोर्ट सिस्टम से आपको मदद मिलती रहती है।

खुश रहने का कोई पैमाना नहीं है। पर हमेशा व्यस्त रहकर भी खुश नहीं रहा जा सकता है। आपकी खुशियां आपकी परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। आपके डायरेक्शन आपकी खुशियां तय करते हैं। 

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