Doctor Verified

कोविड के कारण बढ़ रही है मेंटल हेल्थ रोगियों की समस्याएं, डॉक्टर से जानें कैसे पड़ रहा है प्रभाव

कोविड का डर एक बार फिर मेंटल हेल्थ रोगियों की लाइफ को प्रभावित कर रहा है। वे इस बारे में जानकर खुद को संभाल सकते हैं।

Meera Tagore
Written by: Meera TagoreUpdated at: Apr 03, 2023 15:49 IST
कोविड के कारण बढ़ रही है मेंटल हेल्थ रोगियों की समस्याएं, डॉक्टर से जानें कैसे पड़ रहा है प्रभाव

मलेरिया और डेंगू दिवस 2023: बुखार के कारण, लक्षण और रोकथाम गाइड - Onlymyhealth

How Covid 19 Impacts Mental Health Patients In Hindi: कोविड की बीमारी को दो-तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। हम सबने देखा कि किस तरह कोविड-19 ने लोगों की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी है। कोविड की पहली वेव के दौरन, तो शायद ही कोई ऐसा घर रहा हो, जहां लोगों ने अपने करीबियों को न खोया हो। इन परिस्थितियों को देखने के बाद कोविड से डरना स्वाभाविक है। हालांकि, कोविड के मामले कम होने के कारण, जिंदगी सामान्य पटरी पर चल रही थी। लेकिन, हाल के दिनों में इसके मामले फिर से बढ़ रहे हैं। नतीजतन लोगों में डर बढ़ रहा है। ऐसे में, मेंटल हेल्थ रोगी भी इसके प्रभावों से अछूते नहीं हैं। आज हम इस लेख में अलग-अलग एक्सपर्ट से जानेंगे कि कोविड का डर मेंटल हेल्थ के मरीजों को कैसे प्रभावित कर रहा है और इससे मरीज किस तरह से बच सकते हैं।

how covid 19 impacts mental health patients in hindi

मेंटल हेल्थ रोगियों पर प्रभाव

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कोविड ने सबकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया है। ऐसे में, जाहिर है कि मेंटल हेल्थ के रोगी आम लोगों से ज्यादा डरे और सहमे हुए हैं और इससे उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है। इस बारे में न्यू दिल्ली स्थित, दी लाइफस्टाइल क्लीनिक की सलाहकार मनोचिकित्सक, डॉ. वर्षा महादिक, एमबीबीएस डीएनबी मनोरोग, विस्तार से बता रही हैं-

ओसीडी

ओसीडी के मरीज वो होते हैं, जिन्हें हमेशा यह डर सताता है कि उन्हें किसी किस्म की बीमारी न हो जाए, इस डर की वजह से वे अक्सर चीजों की सफाई करते रहते हैं। सफाई उनके लिए एक तरह की सनक बन जाती है। ऐसे में कोविड के डर ने उनकी इसी सनक को और भी बढ़ा दिया है। अगर हम गौर करें, तो पाएंगे कि कोविड से बचने के लिए हाथ-मुंह धोना, साफ रहने की सलाह दी गई थी। ये सब सूचनाएं एक तरह से अवेयरनेस बढ़ाने के लिए थी। लेकिन ओसीडी के मरीजों ने इसे अवेयरनेस के रूप में नहीं, बल्कि थ्रेट यानी धमकी के रूप में लिया। इस डर की वजह से मरीज का कंपल्शन बढ़ता चला गया, जैसे वह क्लीनिंग, वॉशिंग आदि कामों में बहुत ज्यादा समय बिताता है। इस वजह से उनकी डेली लाइफ भी प्रभावित होती है, वह रोजमर्रा के काम भी आसानी से नहीं कर पाते। धीरे-धीरे यह स्थिति उनके लिए गंभीर होती जाती है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना से ठीक हो चुके लोग कैसे रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) का ध्यान?

डिप्रेशन

पहले भी देखा गया है कि जिन लोगों को डिप्रेशन था, कोविड की वजह से उनके डिप्रेशन का स्तर बढ़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि कोविड होने के कारण लोगों को खुद को आइसोलेट करना पड़ता है। यह आइसोलेशन का दौरान डिप्रेशन के मरीजों को डराता है। हाल के दिनों में, जब फिर से कोविड के मामले बढ़ रहे हैं, तो यह डिप्रेशन के मरीज एक बार से इसी तरह के डर से जूझ रहे हैं। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। नतीजतन उनके डिप्रेशन के संकेत और लक्षण ज्यादा उभर रहे हैं। अगर समय रहते मरीज खुद को कोविड के डर से बाहर न निकाले, तो इससे उसकी स्थिति और बिगड़ सकती है।

एंग्जाइटी

कोविड और एंग्जाइटी बहुत गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दअरसल, कोविड की वजह से लेगों में एंग्जाइटी बढ़ जाती है। जैसा कि हमने कोरोनाकाल के दौरान देखा भी था कि एंग्जाइटी की वजह से लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ गए थे। ऐसा इसलिए हुआ था, क्योंकि उनका एंग्जाइटी का स्तर बढ़ रहा है। अब दोबारा यही सब चीजें फिर से देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा, टीवी में कोविड के बढ़ते केसेज की खबरें भी एंग्जाइटी के मरीजों की स्थिति को खराब कर रही है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना के प्रकोप में घर पर कुछ इस तरह रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल, WHO की ये सलाह आएगी काम

इससे कैसे बचें

किसी भी तरह की मेंटल हेल्थ इश्यूज से गुजर रहे लोगों को कोविड काल में कुछ बातों पर गौर करना चाहिए और अमल में भी लाना चाहिए जैसे-

सहज रहें

सुकून साइकोथैरेपी सेंटर की फाउंडर, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और साइकोथैरेपिस्ट दीपाली बेदी का कहना है, ‘सिर्फ मेंटल हेल्थ के रोगियों को ही नहीं, बल्कि सामान्य लोगों को भी यह समझना चाहिए कि स्थितियां हमारे कंट्रोल में नहीं होती हैं। जिंदगी में जो भी घट रहा है, उसे सहजता से लेना सीखना होगा। कोशिश करिए कि अपनी प्रेजेंट लाइफ को हेल्दी और एक्साइटिंग बनाने की कोशिश करें। फ्यूचर में क्या होगा, इसकी चिंता न करें।’

जिंदगी के मायने बदलें

मेंटल हेल्थ के मरीज अक्सर स्थिति के नकारात्मक पहलू को देखते हैं। कई बार नेगेटिविटी की वजह से कुंठा से घिर जाते हैं। दीपाली बेदी कहती हैं, ‘मेंटल हेल्थ के मरीज अगर सुकून की जिंदगी चाहते हैं, तो उन्हें अपनी जिदंगी के मायने को बदलना होगा। उन्हें चाहिए कि चीजों को देखने का नजरिया बदलें। आज क्या करना है, इस पर फोकस करें। भविष्य में क्या होगा, इसके डर से प्लानिंग न करें। इसके बजाय, आज को ध्यान में रखते हुए जिंदगी जीने की कोशिश करें।’

शिड्यूल मेंटेन करें

डॉक्टर वर्षा कहती हैं कि किसी भी तरह की मेंटल हेल्थ इश्यू के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी है कि आप अपने डेली शिड्यूल को मेंटेन जरूर करें। फिजीकल एक्टिविटीज करें, सही समय पर उठें, अच्छा भोजन करें और समय पर खाना खाए। आप जितना अच्छा खाना खाएंगे, आपका स्वास्थ्य उतना ही बेहतर रहेगा। इससे आपकी इम्युनिटी बढ़ेगी, जिससे कोविड होने का खतरा कम होगा।

कुल मिलाकर कहने की बात ये है कि किसी भी तरह के मेंटल हेल्थ रोगी कोविड से डरे नहीं, अपनी लाइफस्टाइल बैलेंस रखें, यार-दोस्तों से मिलते-जुलते रहें और लाइफ को सहज रखें। ऐसा करके आप हेल्दी-बैलेंस्ड लाइफ जी सकते हैं।

image credit: freepik

Disclaimer