Fri Sep 11, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Dr Neeharika Jaiswal , Consultant Psychiatrist - Metro Hospital & Heart Institute, Noida

हर छोटी बात पर चिड़चिड़ापन क्यों आने लगा है? डॉक्टर से जानें 7 संभावित कारण

छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन हमेशा स्वभाव से जुड़ा नहीं होता। नींद की कमी, तनाव, खान-पान और कुछ पोषक तत्वों की कमी भी इसकी वजह हो सकती है। यहां जानें, चिड़चिड़ापन बढ़ने के कारण और कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

क्या आपको इन दिनों छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगा है? घर में किसी की मामूली बात बुरी लगना, ऑफिस में छोटी गलती पर झुंझलाना, ट्रैफिक में जल्दी परेशान हो जाना या बिना किसी बड़ी वजह के पूरे दिन मूड खराब रहना, अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे केवल आपका बदलता स्वभाव मानकर नजरअंदाज न करें। मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा की कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल बताती हैं कि लगातार चिड़चिड़ापन शरीर और मेंटल हेल्थ से जुड़े कई कारणों का संकेत हो सकता है। डॉ. निहारिका जायसवाल के अनुसार तनाव, नींद की कमी, चिंता, खान-पान में गड़बड़ी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं मूड को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार व्यक्ति को खुद भी समझ नहीं आता कि वह पहले की तुलना में इतना जल्दी क्यों नाराज हो रहा है।

हर छोटी बात पर चिड़चिड़ापन क्यों आता है?

डॉ. निहारिका जायसवाल के अनुसार, शरीर में लंबे समय से दर्द, किसी पुरानी बीमारी या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से भी मूड प्रभावित हो सकता है। जब शरीर लगातार असहज रहता है, तो व्यक्ति की सहनशीलता कम हो सकती है और वह सामान्य परिस्थितियों में भी जल्दी चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है।

1. लगातार तनाव

डॉ. निहारिका जायसवाल के अनुसार, काम का दबाव, परिवार से जुड़ी चिंता, आर्थिक परेशानियां या निजी जीवन में तनाव लंबे समय तक बना रहे तो व्यक्ति का मूड प्रभावित हो सकता है। लगातार तनाव शरीर को लंबे समय तक अलर्ट मोड में रख सकता है, जिससे बेचैनी, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

2. नींद पूरी न होने पर झुंझलाहट

अगर रोज पर्याप्त या अच्छी क्वालिटी वाली नींद नहीं ले रहे हैं, तो इसका असर केवल थकान तक सीमित नहीं रहता। नींद की कमी भावनाओं को कंट्रोल करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिसके कारण छोटी बात पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। अगर आपको झुंझलाहट होती है तो अपनी नींद पूरी करें।

3. बहुत ज्यादा कैफीन भी जिम्मेदार

दिनभर में बार-बार चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक लेने की आदत भी कुछ लोगों में बेचैनी और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकती है। खासकर अगर कैफीन का सेवन ज्यादा हो और नींद भी प्रभावित हो रही हो, तो यह समस्या और बढ़ सकती है। जिन लोगों को चिड़चिड़ेपन की समस्या होती है उन्हें कैफीन और शराब से परहेज करना चाहिए।

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4. लंबे समय तक भूख के कारण चिड़चिड़ापन

खाने के बीच बहुत लंबा अंतराल होने पर कुछ लोगों में ब्लड शुगर कम होने के साथ भूख, कमजोरी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। इसलिए नियमित अंतराल पर बैलेंस भोजन करना जरूरी है।

5. थायराइड में गड़बड़ी

डॉ. निहारिका जायसवाल बताती हैं कि थायराइड हार्मोन में बदलाव भी मूड को प्रभावित कर सकता है। खासकर हाइपरथायरायडिज्म में घबराहट, बेचैनी और चिड़चिड़ापन के साथ तेज धड़कन, ज्यादा पसीना, वजन कम होना और गर्मी ज्यादा लगना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

6. एंग्जायटी

अगर दिमाग में लगातार किसी बात की चिंता चलती रहती है, तो व्यक्ति छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी जल्दी परेशान या चिड़चिड़ा हो सकता है। एंग्जायटी के साथ बेचैनी, ध्यान लगाने में परेशानी और नींद से जुड़ी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं।

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7. डिप्रेशन का संकेत

डिप्रेशन में भी कुछ लोगों में लगातार चिड़चिड़ापन, गुस्सा या छोटी बात पर रोना आ सकता है। अगर इसके साथ किसी काम में रुचि कम होना, थकान, नींद या भूख में बदलाव और निराशा बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

साल 2016 में Journal of the American Academy of Child & Adolescent Psychiatry में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, चिड़चिड़ापन (irritability) पर वैज्ञानिक और क्लिनिकल रिसर्च लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या इसे एक अलग विकार या बीमारी माना जा सकता है और क्या यह भविष्य की मानसिक समस्याओं का सटीक अनुमान लगा सकता है। इस स्टडी में इसी बात की जांच की गई है-

  • रिसर्च के नतीजों से पता चलता है कि चिड़चिड़ापन एक स्थिर और अलग लक्षण है, जिसका संबंध लंबे समय में डिप्रेशन और एंग्जायटी से होता है।
  • आनुवंशिक (जेनेटिक) और न्यूरोलॉजिकल स्टडीज से यह भी साबित हुआ है कि यह माता-पिता से बच्चों में आ सकता है और इसके पीछे दिमाग के कुछ खास हिस्सों का अलग तरीके से काम करना जिम्मेदार होता है।
  • हालांकि, इसके इलाज के लिए अभी और अधिक सटीक रिसर्च की जरूरत है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

डॉ. निहारिका जायसवाल की सलाह है कि अगर चिड़चिड़ापन कई हफ्तों से लगातार बना हुआ है, रोजमर्रा के काम या रिश्तों पर असर डाल रहा है या इसके साथ नींद में लगातार बदलाव, बहुत ज्यादा चिंता, उदासी, तेज धड़कन, अचानक वजन घटना-बढ़ना या अन्य शारीरिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे केवल स्वभाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर जरूरी चेकअप और इलाज की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष

हर छोटी बात पर चिड़चिड़ापन होना हमेशा गुस्सैल स्वभाव की निशानी नहीं होता। इसके पीछे तनाव, नींद की कमी, कैफीन, लंबे समय तक भूखे रहना, थायराइड, एंग्जायटी, डिप्रेशन या कोई शारीरिक समस्या हो सकती है। इसलिए यदि यह बदलाव लगातार महसूस हो रहा है, तो इसके मूल कारण को समझना जरूरी है। सही नींद, बैलेंस भोजन, तनाव को कम करने की कोशिश और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह समस्या को समझने में मदद कर सकती है।

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FAQ

  • क्या अकेलापन व्यक्ति को ज्यादा गुस्सैल बना सकता है?

    लंबे समय तक सोशल दूरी या अकेलेपन के दौरान भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर मूड और व्यवहार पर पड़ सकता है।
  • क्या चिड़चिड़ापन उम्र बढ़ने के साथ सामान्य है?

    सिर्फ उम्र बढ़ने को लगातार चिड़चिड़ेपन की वजह नहीं माना जाना चाहिए। उम्र के साथ नींद, हार्मोन, दवाओं और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों की भूमिका हो सकती है।
  • चिड़चिड़ापन और गुस्से में क्या अंतर है?

    चिड़चिड़ापन अक्सर छोटी बातों पर जल्दी परेशान या झुंझलाने की स्थिति है, जबकि गुस्सा एक ज्यादा तेज इमोशनल रिएक्शन हो सकता है। दोनों एक साथ भी दिखाई दे सकते हैं।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 11, 2026 11:47 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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