किडनी हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है, जिसका काम शरीर के वेस्ट प्रोडक्ट्स को छानकर बाहर निकालना है। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida कहते हैं कि अगर आप अपनी लाइफस्टाइल में छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखें जैसे नमक कम खाएं, पाना सही मात्रा में पिएं और डाइट अच्छी रखें, तो आपको किडनी से जुड़ी समस्याओं से परेशान नहीं होना पड़ेगा। हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि आप किडनी की बीमारी के शुरुआती संकेतों के बारे में जानें ताकि आप समय रहते ही इसे खराब होने से बचा सकें। क्या हैं ये संकेत, जानते हैं इस बारे में Dr. Shashank M S, Consultant - Urology and Renal transplant, Aster CMI Hospital, Bengaluru से।
किडनी की बीमारी के ये 10 संकेत
Dr. Shashank M S कहते हैं कि गुर्दे की बीमारी धीरे-धीरे विकसित हो सकती है, खासकर शुरुआती चरणों में कई लोगों को गुर्दे की कार्यक्षमता में काफी गिरावट आने तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। फिर भी, कुछ चेतावनी संकेत हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है जैसे-
1. शरीर के इन हिस्सों में सूजन
डॉ. शशांक कहते हैं कि जब किडनी में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा कर लेते हैं, तो आंखों, टखनों, पैरों या टांगों के आसपास सूजन आ सकती है। इसलिए अगर आपके पैरों के आस-पास सूजन हो रही है, तो नजरअंदाज न करें क्योंकि यह किडनी की बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
2. पेशाब में बदलाव
डॉ. शशांत कहते हैं कि किडनी का काम शरीर के अतिरिक्त पदार्थों को फिल्टक करना है इसलिए जब इसका कामकाज बिगड़ता है तो पेशाब में बदलाव, जैसे रात में बार-बार पेशाब आना, असामान्य रूप से बार-बार पेशाब आना या पेशाब की मात्रा कम होना, किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को नजरअंदाज न करें और रेगुलर हर कुछ दिन पर हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
3. झागदार पेशाब
झागदार पेशाब कभी-कभी पेशाब में अतिरिक्त प्रोटीन का संकेत दे सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप पेशाब के रंग और टैक्सचर पर ध्यान दें कि अगर यह झागदार आ रहा है तो यह किडनी की बीमारी का संकते हो सकता है।
4. पेशाब में खून आना
डॉ. अक्षय चुग कहते हैं कि पेशाब में खून आना, जिससे पेशाब गुलाबी, लाल या भूरा दिख सकता है, के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। इसे हेमट्यूरिया कहते हैं। होता यह है कि जब किडनी की छोटे-छोटे इकाइयों में सूजन आ जाती है तो पेशाब में खून लीक होने लगता है और यह इस बात का संकेत है कि किडनी का कामकाज सही से नहीं हो रहा।
इसे भी पढ़ें: किडनी में खराबी होने पर पेशाब में दिख सकते हैं ये 6 बदलाव, डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच?
5. लगातार हाई बीपी रहना
अगर आपको लगातार हाई बीपी की समस्या रहती है को यह किडनी की बीमारी की वजह से हो सकती है। National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases के अनुसार, रीनल हाइपरटेंशन या रीनोवैस्कुलर हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसकी वजह से शरीर का बीपी बढ़ा हुआ रहता है। दरअसल, इस यह स्थिति तब होती है जब किडनी की सिकुड़ी हुई धमनियां तरल पदार्थों और अपशिष्ट पदार्थों को ठीक से फिल्टर नहीं कर पातीं और ऐसे हार्मोन छोड़ती हैं जो शरीर को ब्लड प्रेशर बढ़ाने का संकेत देती हैं।
6. एनीमिया होना
डॉ. चुग कहते हैं कि बहुत लोग ध्यान नहीं देते पर गुर्दे की बीमारी के कारण एनीमिया होने या अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने पर असामान्य थकान या कमजोरी विकसित हो सकती है। अगर यह दिक्कत लंबे समय तक रहती है और इसके साथ शरीर में सूजन जैसे लक्षण है तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि यह किडनी के खराब कामकाज से जुड़ा हुआ हो सकता है।
7. भूख से जुड़ी समस्याएं
जब किसी भी व्यक्ति को किडनी की बीमारी होती है तो उसती भूख प्रभावित होती है और उसे मतली या उल्टी की समस्या होती है। National Kidney Foundation के अनुसार, किडनी की बीमारी में मुख्य रूप से भूख कम हो जाती है क्योंकि खून में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं और भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जैसे कि घ्रेलिन यानी वह हार्मोन जो भूख बढ़ाता है, इसमें कमी आ सकती है।
kidney_issues
8. लगातार खुजली या त्वचा का सूखापन
गुर्दे की कार्यक्षमता में काफी कमी आने पर लगातार खुजली या त्वचा का सूखापन हो सकता है और यह किडनी की बीमारी का सीधा संकेत हो सकता है। इसे किसी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर आपके शरीर में लगातार खुजली हो रही है तो इस मतलब है कि किडनी अपना काम सही से नहीं कर रही और खून में फास्फोरस, कैल्शियम और पैराथायराइड हार्मोन (PTH) बढ़ गया है। इसके अलावा खून में यूरिया और क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ने से भी खुजली जैसी समस्या होती है।
9. मांसपेशियों में ऐंठन
डॉ. शशांक कहते हैं कि मांसपेशियों में ऐंठन, विशेष रूप से टांगों में किडनी की बीमारी का संकते हो सकता है। दरअसल, जैसे ही किडनी का कामकाज प्रभावित होता है शरीर का तरल पदार्थ या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन बिगड़ जाता है जिससे मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या होने लगती है।
इसे भी पढ़ें: पेशाब के रंग में बदलाव को न करें नजरअंदाज, डॉक्टर से जानें कौन सा रंग किस समस्या का संकेत है?
10. एनीमिया की दिक्कत
किडनी की बीमारी के कारण एनीमिया या अपशिष्ट पदार्थों के जमाव होने पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या नींद में खलल पड़ सकता है। इनमें से कोई भी लक्षण अकेले किडनी की बीमारी की पुष्टि नहीं करता है और कई लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षणों की अनुपस्थिति गुर्दे की समस्याओं को खारिज नहीं करती है।
जांच है जरूरी:
डॉ. शशांक कहते हैं कि डायबिटीज, हाई बीपी और हृदय रोग या किडनी की बीमारी के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को अपने डॉक्टर से उचित जांच के बारे में बात करनी चाहिए। दो प्रमुख परीक्षण हैं सीरम क्रिएटिनिन के लिए रक्त परीक्षण, जिसका उपयोग ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR) का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है और मूत्र एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन अनुपात (UACR) जो असामान्य प्रोटीन रिसाव का पता लगाता है। इसमें मूत्र विश्लेषण और रक्तचाप मापन की भी सिफारिश की जा सकती है।
निष्कर्ष:
अंत में डॉक्टर का सुझाव है कि किडनी को हेल्दी रखने के लिए ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इसके अलावा नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) जैसी दवाओं के अनावश्यक उपयोग से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और अतिरिक्त नमक का सेवन सीमित करें ताकि आपकी किडनी सुरक्षित और स्वस्थ रहे। साथ ही मूत्र उत्पादन में भारी कमी, गंभीर सांस फूलना, भ्रम या तेजी से बिगड़ती सूजन होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। बीमारी का जल्दी पता लगना इसे बढ़ने से रोक सकता है और इससे जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
FAQ
किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान किस चीज से होता है?
अगर आपका बीपी बढ़ा रहा है या आपको शुगर की समस्या हो, तो यह आपके किडनी के कामकाज को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है और इन्हीं से किडनी को ज्यादा नुकसान है।किडनी खराब होने का सबसे पहला संकेत क्या है?
किडनी खराब होने का सबसे पहला संकेत है आपके पेशाब से जुड़ी गड़बड़ियां, इसलिए पेशाब से जुड़े किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर को दिखाएं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 20, 2026 09:00 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
-1792454905401.webp)