क्या दांतों की सफाई (स्केलिंग) कराने से दांत कमजोर हो जाते हैं? इसका जवाब है नहीं, स्केलिंग से दांतों को नुकसान नहीं होता, बल्कि यह उन्हें सुरक्षित रखने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में दांतों पर जमा हानिकारक टार्टर को हटाया जाता है, जिसे केवल ब्रश करने से साफ नहीं किया जा सकता। स्केलिंग (दांतों को प्रोफेशनल तरीके से साफ करने का तरीका) मुंह की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है। दांतों पर जमा प्लाक हटा देने से मसूड़ों की बीमारी और उससे होने वाले हड्डियों के नुकसान के खतरे से बचने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं स्केलिंग दांतों के लिए क्यों जरूरी है और इसे कैसे कराया जाता है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Suman Yadav, Dentist, Oral And Maxillofacial Surgeon At Numed Super Speciality Hospital, Greater Noida से बात की।
साल 2015 में American Dental Association के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि स्केलिंग कराने से मसूड़ों की गंभीर बीमारी क्रॉनिक पीरियोडोंटाइटिस (Chronic Periodontitis) से बचाव में मदद मिल सकती है।अमेरिका में 30 वर्ष से अधिक उम्र के 47.2% वयस्क क्रॉनिक पीरियोडोंटाइटिस से प्रभावित पाए गए।
दांतों की स्केलिंग क्या है?
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दांतों की स्केलिंग एक प्रक्रिया है जिसमें दांतों की सतह, खासकर मसूड़ों के किनारों के आस-पास सफाई की जाती है। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासोनिक स्केलर जैसे विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करके जमे हुए प्लाक यानी टार्टर को हटाया जाता है। इसे नियमित ब्रशिंग और फ्लॉसिंग से पूरी तरह हटाना मुश्किल होता है। स्केलिंग के बाद अक्सर दांतों की पॉलिशिंग भी की जाती है। इससे दांतों की सतह चिकनी होती है और प्लाक को दोबारा जमने से रोकने में मदद मिल सकती है।
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स्केलिंग से दांत कमजोर या ढीले नहीं होते हैं
स्केलिंग के दौरान दांत का कोई हिस्सा नहीं हटाया जाता है ऐसे में यह सोचना कि स्केलिंग से दांत कमजोर या ढीले हो जाएंगे, गलत है। इस प्रक्रिया में केवल टार्टर को साफ किया जाता है। टार्टर धीरे-धीरे मसूड़ों और दांतों को सहारा देने वाली हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। कभी-कभी टार्टर की मोटी परत के सहारे टिके दांत सफाई के बाद थोड़े ढीले महसूस हो सकते हैं। इसकी वजह स्केलिंग नहीं, बल्कि मसूड़ों की बीमारी होती है। सफाई के बाद मसूड़े ठीक होने लगते हैं और आमतौर पर उनकी स्थिति में सुधार होता है।
क्या स्केलिंग से इनेमल को नुकसान पहुंचता है?
नहीं, सही तरीके से की गई नियमित डेंटल स्केलिंग से आमतौर पर दांतों के इनेमल को नुकसान नहीं पहुंचता है। इनेमल दांतों की सबसे बाहरी परत होती है। इनेमल दांतों की अंदरूनी परतों को सड़न, सेंसिटिविटी और नुकसान से बचाने का काम करता है।
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क्या स्केलिंग से दांतों के बीच गैप बन जाते हैं?
नहीं। दांतों के बीच ये खाली जगहें पहले से मौजूद होती हैं, लेकिन टार्टर जमा होने के कारण दिखाई नहीं देतीं। टार्टर हटने के बाद दांतों के बीच की असली जगह नजर आने लगती है। समय पर इलाज कराने से इन जगहों को और बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।
दांतों में दर्द नहीं होने पर सफाई कराने की जरूरत है?
हां। मसूड़ों की बीमारी होने पर अक्सर शुरुआती चरणों में दर्द नहीं होता। बीमारी बढ़ने पर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मसूड़ों से खून आना, मुंह से बदबू आना और मसूड़ों का पीछे हटना इसके शुरुआती चेतावनी संकेत हैं। इसलिए दर्द न होने पर भी दांतों और मसूड़ों की नियमित जांच और जरूरत के अनुसार सफाई कराना जरूरी है।
दांतों की स्केलिंग कराने से मसूड़ों की बीमारी से बचाव होता है
दांतों की नियमित सफाई न कराने पर मसूड़ों के किनारों पर प्लाक और टार्टर जमा हो सकते हैं। इससे मसूड़ों में सूजन (जिंजिवाइटिस) या पायरिया हो सकता है। इन समस्याओं के कारण मसूड़े पीछे हट सकते हैं और दांतों की जड़ का हिस्सा खुल सकता है। स्केलिंग इन बीमारियों को कंट्रोल करने में मदद करती है।
नियमित स्केलिंग क्यों जरूरी है?
दांतों की नियमित जांच के दौरान कई लोगों को हर साल या छह महीने में स्केलिंग कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसकी जरूरत हर व्यक्ति के मसूड़ों की स्थिति, टार्टर जमने की दर और मुंह की सेहत पर निर्भर करती है।
1. दांतों की सुंदरता बढ़ती है
स्केलिंग से दांतों की सतह पर जमा कुछ बाहरी दाग हट सकते हैं। ये दाग चाय, कॉफी, तंबाकू और धूम्रपान के कारण हो सकते हैं। इससे दांत साफ दिखाई देते हैं और मुस्कान बेहतर लग सकती है।
2. मुंह से दुर्गंध आने की समस्या दूर होती है
प्लाक और टार्टर में मौजूद बैक्टीरिया दुर्गंध पैदा कर सकते हैं। इन्हें हटाने से मुंह से दुर्गंध आने की समस्या कम हो सकती है।
3. दांतों की सड़न का खतरा घटता है
प्लाक और टार्टर हटाने से मुंह साफ रहता है। इससे मसूड़ों की बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। हालांकि, स्केलिंग अकेले दांतों की सड़न को पूरी तरह नहीं रोकती।
निष्कर्ष:
प्रोफेशनल ढंग से दांतों की सफाई की प्रक्रिया को स्केलिंग कहा जाता है। कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि इससे दांतों की परत को नुकसान पहुंचता है और दांत कमजोर हो जाते हैं। जबकि दांतों की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए स्केलिंग जरूरी है। इससे प्लाक हटाने में मदद मिलती है, मुंह की दुर्गंध दूर होती है, दांत की ऊपरी परत पर जमा टार्टर हटता है जिससे दांत स्वस्थ रहते हैं। स्केलिंग के दौरान दांत का कोई हिस्सा नहीं हटाया जाता है ऐसा सोचना कि स्केलिंग से दांत कमजोर या ढीले हो जाएंगे, गलत है। कई लोगों को लगता है कि स्केलिंग से दांतों के बीच गैप बन जाते हैं, जबकि यह धारणा भी गलत है। अगर आपके दांत में दर्द या कोई तकलीफ नहीं भी है, तो भी डॉक्टर कुछ लोगों को साल में एक बार या हर छह महीने में एक बार स्केलिंग कराने की सलाह देते हैं।
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FAQ
दांतों की स्केलिंग (सफाई) एक दर्दनाक प्रक्रिया है?
नहीं यह दर्दनाक प्रक्रिया नहीं है। दांतों की सफाई के दौरान हल्की सेंसिटिविटी महसूस हो सकती है। हालांकि, अगर आपके मसूड़ों में सूजन है या कोई अन्य समस्या है, तो स्केलिंग के दौरान थोड़ी असहजता या दर्द महसूस हो सकता है।क्या दांतों की स्केलिंग से उनमें सेंसिटिविटी बढ़ जाती है?
दांतों की सफाई के बाद कुछ लोगों को सेंसिटिविटी महसूस हो सकती है। सफाई के बाद होने वाली यह सेंसिटिविटी कुछ समय में ठीक हो जाती है। लंबे समय से टार्टर से दांत की सतह ढकने के कारण ऐसा महसूस होता है।
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Oct 19, 2026 19:58 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Suman Yadav
