Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

बर्गर-पिज्‍जा जैसे फास्‍ट फूड्स हैं हार्ट के दुश्‍मन, एक्‍सपर्ट से जानें 7 नुकसान

अगर आप भी फास्‍ट फूड खाने के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाएं। डॉक्‍टर के अनुसार, जो लोग फास्‍ट फूड का ज्‍यादा सेवन करते हैं, उनमें स्‍ट्रोक या हार्ट अटैक का जोख‍िम ज्‍यादा होता है।

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फास्‍ट फूड का सेवन आजकल की सामान्‍य द‍िनचर्या का ह‍िस्‍सा बन चुका है। आए द‍िन लोग प‍िज्‍जा, बर्गर, चाट-पकौड़ी का सेवन करते हैं ज‍िससे वजन बढ़ता है और हार्ट की समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। जैसे-जैसे हार्ट के मामले बढ़ रहे हैं, लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है क‍ि कहीं फास्‍ट फूड का ज्‍यादा सेवन हार्ट की समस्‍याओं का खतरा बढ़ा तो नहीं देता है? नेशनल हार्ट, लंग, एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के मुताब‍िक, फास्‍ट फूड का ज्‍यादा सेवन करने से हार्ट रोग और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है क्‍योंक‍ि इसमें मौजूद फैट, शुगर और सोड‍ियम के कारण धमन‍ियों को नुकसान पहुंचता है।
इस लेख में जानेंगे हार्ट की सेहत के ल‍िए फास्‍ट फूड के नुकसान के बारे में। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietician At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

1. बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है- It Raises Bad Cholesterol

  • फास्‍ट फूड में हाई ट्रान्‍स और सैचुरेटेड फैट्स होते हैं ज‍िससे बैड कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है।
  • फास्‍ट फूड में मौजूद फैट्स के कारण आर्टरीज में प्‍लाक बनने लगता है ज‍िससे हार्ट में ब्‍लड फ्लो कम हो जाता है।

2. ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है- It Increases Blood Pressure

फास्‍ट फूड में स्‍वाद के ल‍िए प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स और ज्‍यादा नमक डाला जाता है। सोड‍ियम के ज्‍यादा होने से वॉटर र‍िट‍ेंशन, ब्‍लड वॉल्‍यूम बढ़ने और आर्टरीज वॉल्‍व में प्रेशर बढ़ सकता है।

3. ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचता है- It Damages Blood Vessels

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Dietician Smita Singh ने बताया क‍ि फास्‍ट फूड का सेवन करने से शरीर में र‍िफाइंड कार्ब्स, अनहेल्‍दी फैट्स, एड‍िट‍िव्‍स की मात्रा बढ़ जाती है ज‍िससे सूजन हो सकती है। सूजन बढ़ने से ब्‍लड वेसल्‍स की इनर लाइन‍िंग को नुकसान पहुंचता है ज‍िससे ब्‍लड वेसल्‍स में ब्‍लॉकेज हो सकता है।

4. वजन और हार्ट की समस्‍याएं बढ़ती हैं- Leads To Weight Gain And Heart Problems

  • फास्‍ट फूड्स में कैलोरी ज्‍यादा होती हैं और फाइबर कम होता है, इससे पेट जल्‍दी नहीं भरता और बार-बार भूख लगती है। इसे ज्‍यादा मात्रा में खाने से वजन बढ़ने लगता है।
  • ज्‍यादा वजन के कारण हार्ट की समस्‍याएं होने लगती हैं।

5. इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस से हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ता है- Increases Risk Of Heart Disease And Insulin Resistance

  • हाई शुगर और र‍िफाइंड कार्ब्स से शुगर स्‍पाइक का खतरा होता है।
  • Dietician Smita Singh ने बताया क‍ि लंबे समय तक फास्‍ट फूड्स का सेवन करेंगे, तो इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी, डायब‍िटीज और हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ जाता है।

6. लिपिड प्रोफाइल बिगड़ती है- Worsening Of Lipid Profile

  • शुगरी ड्र‍िंक्‍स और फास्‍ट फूड में मौजूद र‍िफाइंड कार्ब्स, ट्राइग्लिसराइड्स में बदल जाते हैं। ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल ज्‍यादा होने से ब्‍लड गाढ़ा होता है और आर्टरीज ब्‍लॉक होने का खतरा बढ़ता है।

7. स्‍ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है- Risk Of Heart Attack And Stroke

  • फास्‍ट फूड में हाई फैट, नमक, शुगर मौजूद होता है।
  • इससे ब्‍लड क्‍लॉट, हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

फास्‍ट फूड्स का सेवन करने से स्‍ट्रोक, हार्ट अटैक, बैड कोलेस्‍ट्रॉल, हाई बीपी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं इसल‍िए फास्‍ट फूड से दूर रहें और घर का बना ताजा खाना खाएं।

उम्‍मीद करते हैं क‍ि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।

FAQ

  • फास्‍ट फूड खाने के क्‍या नुकसान हैं?

    फास्‍ट फूड का सेवन करने से डायब‍िटीज, हार्ट ड‍िजीज, खराब डाइजेशन, हाई बीपी, हाई कोलेस्‍ट्रॉल, वेट गेन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • फास्‍ट फूड में कौन से हान‍िकारक तत्‍व मौजूद होते हैं?

    फास्‍ट फूड में प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स, आर्टि‍फ‍िश‍ियल फ्लेवर्स, हाई कैलोरी, ट्रांस फैट, र‍िफाइंड शुगर जैसे हान‍िकारक तत्‍व पाए जाते हैं ज‍िससे हार्ट, मेटाबॉल‍िज्‍म और शरीर पर बुरा असर होता है।
  • ट्रांस फैट क्‍या होता है?

    ट्रांस फैट एक तरह का आर्ट‍िफ‍िश‍ियल फैट है ज‍िससे ऑयल को प्रोसेस करके बनाया जाता है। इसका ज्‍यादा सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और हार्ट ड‍िजीज का खतरा भी बढ़ सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 18, 2025 16:30 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Dec 18, 2025 16:30 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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