Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

चाट-समोसा जैसे स्‍ट्रीट फूड्स हार्ट को करते हैं खोखला, इन 5 नुकसान से बि‍गड़ सकती है द‍िल की हेल्‍थ

स्‍ट्रीट फूड्स जैसे चाट, गोलगप्‍प, चाउम‍िन, मोमोज, समोसे वगैरह का सेवन हार्ट के ल‍िए हान‍िकारक माना जाता है। इन चीजों का सेवन करने से हाई कोलेस्‍ट्रॉल, हार्ट अटैक और हार्ट की बीमार‍ियों का खतरा बढ़ जाता है।

हम भारतीय लोगों को स्‍ट्रीट फूड खाना बहुत पसंद है। चाहे वो कुरकुरा गोलगप्‍पा हो या चटपटी चाट हो, समोसा और चटनी खाकर तो आत्‍मा ही संतुष्‍ट हो जाती है। कई लोग ऐसे भी हैं जो हर द‍िन चाट-पकौड़ी जैसे स्‍ट्रीट फूड्स का लुत्‍फ उठाते हैं। स्‍ट्रीट फूड्स में तेल, म‍ि‍र्च-मसालों से फ्लेवर जरूर आता है, लेक‍िन ये हमारी सेहत के ल‍िए जरा भी अच्‍छे नहीं है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि स्‍ट्रीट फूड्स का ज्‍यादा सेवन करने से हार्ट की सेहत खराब हो सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुता‍ब‍िक, भारत में स्‍ट्रीट फूड्स अक्‍सर खराब गुणवत्ता वाले तेल या इंग्रीड‍िएंट्स के साथ बनाए जाते हैं। इनमें इस्‍तेमाल होने वाले खराब क्वालिटी के तेल के कारण हार्ट अटैक, हाई कोलेस्‍ट्रॉल या कार्ड‍ियोवैस्‍कुलर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में जानेंगे हार्ट हेल्‍थ के ल‍िए स्‍ट्रीट फूड्स खाने के नुकसान। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के लि‍ए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

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1. हाई कोलेस्‍ट्रॉल लेवल- High Cholesterol Level

स्‍ट्रीट फूड्स को खराब क्वालिटी वाले तेल से तैयार क‍िया जाता है और अनहेल्‍दी फैट्स का ज्‍यादा सेवन करने से बैड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। लंबे समय तक बैड कोलेस्‍ट्रॉल चेस्‍ट पेन, हार्ट ड‍िजीज या अन्‍य हार्ट से संबंधि‍त समस्‍याओं का कारण बनता है।

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2. हार्ट अटैक का खतरा- Heart Attack Risk

बर्गर, फ्राइज वगैरह को डीप-फ्राई करके बनाया जाता है। इससे तेल की अत‍िर‍िक्‍त मात्रा शरीर में जाती है। इससे ब्‍लड वेसल्‍स में फैट इकट्ठा होने लगता है ज‍िससे ब्‍लॉकेज हो जाता है। इस ब्‍लॉकेज के कारण हार्ट अटैक आ सकता है। स्‍ट्रीट फूड्स का लगातार सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने लगता है। यह भी एक कारण है क‍ि आजकल युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

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3. हाई ब्‍लड प्रेशर- High Blood Pressure

स्‍ट्रीट फूड्स में नमक, मसाले ज्‍यादा होते हैं। सोड‍ियम की मात्रा ज्‍यादा होने से शरीर में वॉटर र‍िटेंशन की समस्‍या हो सकती है ज‍िससे ब्‍लड वेसल्‍स पर दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। हाई बीपी, हार्ट ड‍िजीज का एक कारक माना जाता है। लंबे समय तक बीपी ज्‍यादा रहने से आर्टरीज को नुकसान पहुंचता है और इससे स्‍ट्रोक, हार्ट फेल‍ियर या अन्‍य हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ जाता है।

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4. ब्‍लड वेसल्‍स में सूजन- Inflammation Of Blood Vessels

स्‍ट्रीट फूड्स में खराब क्वालिटी वाला तेल या आर्ट‍िफ‍िश‍ियल रंंग म‍िलाए जाते हैं। इससे ब्‍लड वेसल्‍स की इनर लाइन‍िंग डैमेज हो जाती है ज‍िससे ब्‍लड वेसल्‍स में सूजन हो सकती है। सूजन के कारण हार्ट का ब्‍लड सर्कुलेशन खराब हो सकता है। इस वजह से हार्ट की बीमारी का खतरा दोगुना हो जाता है। इस वजह से हार्ट कमजोर हो जाता है और लाइफस्‍टाइल बीमार‍ियों का खतरा बढ़ जाता है।

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5. वजन बढ़ने से हार्ट पर दबाव बढ़ना- Heart Strain Due To Weight Gain

स्‍ट्रीट फूड्स में कैलोरी ज्‍यादा होती हैं। जो लोग स्‍ट्रीट फूड्स का ज्‍यादा सेवन करते हैं उनका वजन बढ़ जाता है। ज्‍यादा वजन के कारण हार्ट को ज्‍यादा ब्‍लड पंप करना पड़ता है ताक‍ि पूरी बॉडी में ऑक्‍सीजन का सप्‍लाई हो सके। मोटापे का हाई कोलेस्‍ट्रॉल, डायब‍िटीज और हाइपरटेंशन से गहरा संबंध है। इसल‍िए वजन बढ़ने से हार्ट पर दबाव भी बढ़ता है और हार्ट के काम करने की क्षमता घटने लगती है।

न‍िष्‍कर्ष:

स्‍ट्रीट फूड्स जैसे चाट-गोलगप्‍पे, चाउम‍िन, मोमोज वगैरह का सेवन हार्ट की सेहत के ल‍िए हान‍िकारक माना जाता है। इनका सेवन करने से ब्‍लड वेसल्‍स में सूजन, वजन बढ़ने से हार्ट पर दबाव, हार्ट अटैक, हाई कोलेस्‍ट्रॉल, हाई बीपी वगैरह का खतरा बढ़ जाता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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