Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए इंटरवल वॉकिंग है फायदेमंद, जानें करने का तरीका

डायब‍िटीज में इंंटरवल वॉक‍िंग फायदेमंद मानी जाती है इसकी मदद से शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है और वेट लॉस भी होता है। जानें इसे करने का तरीका और फायदे।

डायबिटीज होने पर व्‍यक्‍त‍ि को शुगर लेवल को मैनेज करने में परेशानी होती है। इसे मैनेज करने के लिए दवा, सही खानपान और नियमित फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी बहुत जरूरी होती है। शुगर लेवल कंट्राेल करने के ल‍िए एक्‍सरसाइज करना फायदेमंंद होता है, लेक‍िन एक एक्‍सरसाइज है ज‍िसे करने से शुगर लेवल पर अच्‍छा असर देखा जाता है और वह है इंटरवल वॉकिंग। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो भारी एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं। डायब‍िटीज में इंटरवल वॉकिंग के फायदे और इसे करने का तरीका जानने के ल‍िए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।

इंटरवल वॉकिंग क्या है?

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इंटरवल वॉक‍िंग का मतलब है तेज और सामान्‍य स्‍पीड से बारी-बारी करके करना। इसका मतलब है कुछ म‍िनट तेज चलें, फि‍र कुछ म‍िनट धीमी गत‍ि से चलें और फ‍िर कुछ म‍िनट धीमी गत‍ि से चलें। यह साधारण वॉकि‍ंग से ज्‍यादा असरदार माना जाता है क्‍योंक‍ि इसमें शरीर ज्‍यादा एक्‍ट‍िव रहता है।

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डायबिटीज में कैसे फायदेमंद है इंटरवल वॉकिंग?

  • इंटरवल वॉकिंग की मदद से इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने में मदद म‍िलती है। इससे शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • खाने के बाद इंटरवल वॉकिंग करने से पोस्‍ट मील शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • डायबिटीज मैनेजमेंट में वजन को कंंट्रोल करना जरूरी है। इंंटरवल वॉक‍िंग के जर‍िए कैलोरी बर्न करके वेट लॉस करने में मदद म‍िलती है।
  • इंटरवल वॉकिंग हार्ट हेल्‍थ को बेहतर बनाती है ज‍िससे डायब‍िटीज के कारण होने वाली हार्ट की समस्‍याओं से बचाव होता है।
  • इंटरवल वॉकिंग से थकान कम होती है और शरीर ज्यादा एक्टिव महसूस करता है।

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इंटरवल वॉकिंग कैसे करें?

इसे शुरू करना बहुत आसान है। अपने अनुसार धीरे-धीरे इसकी आदत बना सकते हैं-

  • पांच मिनट सामान्य गति से चलकर वार्म अप करें।
  • एक से दो म‍िनट तेज गत‍ि से चलें।
  • फि‍र दो से तीन म‍िनट आराम से चलें।
  • इस चक्र को 20–30 मिनट तक दोहराएं।
  • अंत में पांच मिनट कूल-डाउन करें।
  • शुरुआत में कम समय से शुरू करें और धीरे-धीरे समय और स्‍पीड बढ़ाएं।

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किन बातों का ध्यान रखें?

  • वॉकिंग से पहले और बाद में ब्लड शुगर लेवल को चेक करें।
  • बहुत ज्यादा खाली पेट या बहुत भारी खाना खाने के तुरंत बाद वॉक न करें।
  • आरामदायक जूते पहनें।
  • पानी जरूर पिएं।
  • अगर चक्कर, कमजोरी या ज्यादा थकान महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

इंंटरवल वॉक‍िंग के जर‍िए शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और पोस्‍ट मील शुगर लेवल को भी कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। रोज 20 से 30 म‍िनट सामान्‍य ओर तेज स्‍पीड से वॉक करने की प्रैक्‍ट‍िस करें।

FAQ

  • डायब‍िटीज को कंट्रोल करने वाले योग कौन से हैं?

    डायब‍िटीज में वज्रासन, मंडूकासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम वगैरह कर सकते हैं। इन योग से ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद म‍िलती है।
  • डायबि‍टीज में कौन सी एक्‍सरसाइज करें?

    डायबि‍टीज में तेज चलना, साइक्लिंग और हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सबसे फायदेमंद मानी जाती हैं। रोज 20 से 30 मिनट नियमित एक्सरसाइज करने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 06, 2026 18:31 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 06, 2026 18:31 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Payal Asthana

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