Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

सच में फायदेमंद है Reading Therapy, हर रात बस 30 मिनट करके अभिषेक ने कंट्रोल किया नींद न आने की समस्या

How I treat insomnia: गोरखपुर के रहने वाले अभिषेक शुक्ला रात में नींद न आने से परेशान रहते थे और तब उन्होंने रीडिंग थेरेपी शुरू की और अब वे अपने समय पर बिना किसी मुश्किल के सो जाते हैं।

How I treat insomnia: ''हर रात मुझे सोने में दिक्कत होती थी, मेरी आंखों में नींद भरी होती और थकान से शरीर टूट रहा होता और एक झटके से नींद आती और टूट जाती। मुझे समझ नहीं आता कि ये क्यों हो रहा है। कभी नींद आ भी जाती तो टिकती नहीं और कुछ ही घंटों में टूट जाती और फिर लंबे समय तक मैं नींद के लिए परेशान रहता। कई बार इस तरह से बीच रात में जागना मुझे परेशान करता है और अगले दिन मुझे इसकी थकान व चिड़चिड़ाहट महसूस होती।

ये कारवां कई महीनों तक चलता रहा और नींद न आने की इस दिक्कत ने मेरी सेहत को भी प्रभावित करना शुरू किया। फिर एक दिन अचानक दोस्तों के साथ बातचीत में मुझे अहसास हुआ कि मैं भी उनमें से एक तरह इनसोम्निया (Insomnia) का शिकार हो रहा हूं। 'इसके बाद मैंने खुद को इस बढ़ती हुई समस्या से बचाने का निर्णय लिया और इस बीमारी से बचने के उपायों के बारे में रिसर्च की, वीडियो देखे और लोगों के सुझाव सुनें। कुछ सुझावों को मैंने अपने ऊपर लागू करने की कोशिश भी की जैसे कि सोने से पहले लाइट म्यूजिक सुनना, कुछ देर वॉक करना और मेडिटेशन करना। हालांकि, इनमें ये किसी का भी मुझपर बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ। एक दिन मैं सोने से पहले कुछ पढ़ रहा था और सो गया। उस दिन रात में नींद नहीं खुली। अगले दिन भी मैंने यही काम किया और उस रात भी अचानक से मेरी नींद (Reading Therapy benefits for insomnia) नहीं टूटी। इस तरह मैंने रोज ये काम करना शुरू किया।''

इस तरह 30 साल के अभिषेक शुक्ला (Abhishek Shukla) को रीडिंग की आदत ने इनसोम्निया से बचा लिया। आइए, अब विस्तार से जानते हैं कैसे नींद न आने की समस्या में रीडिंग थेरेपी कितनी कारगर है और इस बारे में क्या है Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore की राय।

धीमे-धीमे मुझे जल्दी और लंबी नींद आने लगी

30 साल के अभिषेक शुक्ला (Abhishek Shukla) जो कि पेशे से पत्रकार हैं लगातार नींद न आने की समस्या की वजह से परेशान थे और जब उन्होंने से पहले किताब पढ़ना शुरू किया तो उन्हें जल्दी और बेहतर नींद आने लगी। अभिषेक ने बताया कि ये सच में कारगर है और नींद पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है। जब आप सोने से पहले किताब पढ़ते हैं तो आपकी आंखें धीमे-धीमे थककर चिकलने लगेगी और आप कब सो जाएंगे आपको मालूम भी नहीं पड़ेगा। इतना ही नहीं, धीमे-धीमे आपकी नींद लंबी होती जाएगी और आप नींद के बीच अचानक से नहीं जगेंगे। ऐसा करते-करते 21 दिन में आपकी स्लीप साइकिल सही हो जाएगी और आप हर दिन तय समझ पर सोना शुरू कर देंगे।

MixCollage-19-Dec-2025-04-19-PM-5680

सच में फायदेमंद है रीडिंग थेरेपी: Dr. Pooja Pillai

अभिषेक शुक्ला की कहानी जानकर जब हमने इस बारे में डॉक्टर की राय जाननी चाहिए तो Dr. Pooja Pillai ने बताया कि सोने से पहले लगभग 30 मिनट तक किताब पढ़ना अनिद्रा से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। पढ़ने से मन शांत होता है और रोजमर्रा के तनाव, चिंताओं और अत्यधिक सोच से मुक्ति मिलती है, जो अक्सर लोगों को रात में जगाए रखती है। जब आप कोई शांत और हल्की किताब पढ़ते हैं, तो आपका दिमाग स्क्रीन और तनावपूर्ण विचारों से ध्यान हटाकर किसी आरामदायक गतिविधि पर केंद्रित हो जाता है, जिससे शरीर को आराम करने का संकेत मिलता है। यह आदत चिंता को कम करती है और स्ट्रेस हार्मोन को घटाती है, जिससे स्वाभाविक रूप से नींद आना आसान हो जाता है।

इसे भी पढ़ें: जर्नलिंग ने बदली जि‍ंदगी: सेल्फ हीलिंग से अनिद्रा से राहत तक, पढ़ें मेरा अनुभव और एक्सपर्ट गाइडेंस

पढ़ने से सोने का एक निश्चित समय तय हो जाता है: Dr. Pooja Pillai

आगे Dr. Pillai बताती हैं कि पढ़ने से सोने का एक निश्चित समय तय हो जाता है, जिससे दिमाग पढ़ने को नींद से जोड़ना सीख जाता है और नींद की दिनचर्या में सुधार होता है। मोबाइल फोन या टेलीविजन के विपरीत, किताब पढ़ने से आंखों को नीली रोशनी का सामना नहीं करना पड़ता, जो नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित कर सकती है।

पढ़ने से आती है गहरी नींद: Dr. Pooja Pillai

यह मांसपेशियों को आराम भी देता है और हृदय गति को धीमा करता है, जिससे शरीर गहरी नींद के लिए तैयार होता है। अनिद्रा के रोगियों के लिए (Reading Therapy benefits for insomnia), सोने से पहले नियमित रूप से पढ़ने से नींद आने में लगने वाला समय कम हो सकता है और समय के साथ नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: तनाव और चिंता से राहत देती है किताबे पढ़ने की आदत, जानें मानसिक स्वास्थ्य के लिए कैसे है फायदेमंद

इस प्रकार से ये मानसिक उत्तेजना से बचने के लिए सरल, सकारात्मक या उत्तेजक न होने वाली सामग्री चुनना महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, रीडिंग थेरेपी दवाओं के बिना नींद में सुधार करने का एक सुरक्षित, नेचुरल और प्रभावी तरीका है और जिन लोगों को भी ऐसी कोई भी समस्या हो रही हो उन्हें इसे जरूर ट्राई करना चाहिए।

Read Next

क्या सर्दियों में ज्यादा सोना चाहिए? डॉक्टर से जानें कितनी देर की नींद होती है पर्याप्त

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Dec 19, 2025 16:27 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Dec 19, 2025 16:27 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content