Wed Oct 7, 2026 | 01:36 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

हर वक्त अलर्ट रहने की आदत शरीर को कर सकती है परेशान, जानें नर्वस सिस्टम पर असर

हर समय अलर्ट या सतर्क रहने की आदत तनाव बढ़ा सकती है और नींद, ध्यान के साथ नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। यहां डॉक्टर से जानिए, इसके संकेत और शरीर पर असर क्या होता है?
हर वक्त अलर्ट रहने की आदत शरीर को कर सकती है परेशान, जानें नर्वस सिस्टम पर असरहर वक्त अलर्ट रहने की आदत शरीर को कर सकती है परेशान, जानें नर्वस सिस्टम पर असर

कभी-कभी आस-पास की परिस्थितियों को लेकर सतर्क यानी अलर्ट रहना नॉर्मल है, लेकिन अगर व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के हर समय खतरे, परेशानी या किसी अनहोनी के लिए तैयार रहने लगे, तो यह शरीर और दिमाग दोनों पर असर डाल सकता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, लगातार अलर्ट रहने की स्थिति में शरीर का स्ट्रेस सिस्टम बार-बार एक्टिव हो सकता है। इससे नींद, फोकस, डाइजेशन और एनर्जी पर भी असर पड़ सकता है। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर नर्वस सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से समझिए कि लगातार चौकन्ना रहने की आदत कब नॉर्मल अलर्टनेस से आगे बढ़कर शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

हर समय अलर्ट रहने से नर्वस सिस्टम पर क्या असर पड़ता है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, ''हर समय अलर्ट रहने की स्थिति में दिमाग लगातार आस-पास के खतरे या समस्या को खोजता रहता है। व्यक्ति छोटी-सी आवाज, किसी के व्यवहार या सामान्य शारीरिक बदलाव को भी खतरे के संकेत की तरह लेने लगता है। कई बार व्यक्ति को लगता है कि अगर वह लगातार सतर्क नहीं रहा तो कुछ गलत हो सकता है। तनाव वाली परिस्थितियों में कुछ समय के लिए ऐसा होना शरीर का नॉर्मल रिएक्शन हो सकता है लेकिन जब बिना किसी खतरे के भी दिमाग लगातार चौकन्ना बना रहे, तो यह चिंता और लंबे समय तक बने तनाव से जुड़ा हो सकता है।''

  • डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि हमारा शरीर तनाव की स्थिति में खुद को खतरे से निपटने के लिए तैयार करता है। इस दौरान शरीर का स्ट्रेस रिएक्शन एक्टिव होता है और हार्ट रेट, सांस लेने की स्पीड तथा मसल्स में तनाव जैसे बदलाव हो सकते हैं।
  • अगर व्यक्ति लंबे समय तक इसी तरह की मेंटल अलर्टनेस में रहता है, तो शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय नहीं मिल पाता। इससे बेचैनी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
  • हर वक्त सतर्क रहने की आदत का असर नींद पर भी दिखाई दे सकता है। व्यक्ति बिस्तर पर जाने के बाद भी दिनभर की बातों या आने वाली संभावित समस्याओं के बारे में सोचता रह सकता है।
  • इससे दिमाग को शांत होने में समय लगता है और नींद आने में परेशानी हो सकती है।
  • नींद पूरी न होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और फोकस में कमी महसूस हो सकती है। इस तरह तनाव और खराब नींद एक-दूसरे को बढ़ाने वाली साइकिल बन सकती है।

साल 2006 में Clinical Neurophysiology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, अलर्टनेस या सजगता कोई एक साधारण स्थिति नहीं है, बल्कि यह नर्वस सिस्टम और तनाव से जुड़ी होती है। इसलिए इसे केवल एक पैमाने पर नहीं आंका जा सकता।

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नर्वस सिस्टम पर असर के लक्षण

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि लगातार तनाव या ज्यादा अलर्टनेस का असर केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं रहता है। कुछ लोगों को दिल की धड़कन तेज महसूस होना, पसीना आना, मसल्स में खिंचाव, पेट की परेशानी या बार-बार बेचैनी जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का कारण हमेशा तनाव ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर लक्षण बार-बार हो रहे हैं या रोजाना के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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लगातार अलर्ट रहने की आदत को कैसे कम करें?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी सलाह देते हैं कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप किन परिस्थितियों में जरूरत से ज्यादा अलर्ट हो जाते हैं। नियमित नींद, पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी, गहरी सांस लेने की टेक्नीक और दिन में कुछ समय स्क्रीन से दूरी बनाने से शरीर को आराम देने में मदद मिल सकती है। अगर लगातार चिंता, डर या बेचैनी बनी रहती है और काम, रिलेशन या नींद पर असर पड़ रहा है, तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इसके पीछे मौजूद कारणों को समझकर उचित इलाज या काउंसलिंग की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष

हर समय सतर्क यानी अलर्ट रहना शरीर के सेफ्टी रिस्पॉन्स का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अगर दिमाग बिना किसी वास्तविक खतरे के लगातार अलर्ट मोड में बना रहे, तो इससे मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ सकती है। नर्वस सिस्टम को भी तनाव के साथ-साथ आराम और रिकवरी की जरूरत होती है। इसलिए बार-बार होने वाली बेचैनी, नींद की समस्या या शारीरिक लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय उनके कारण को समझना जरूरी है।

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FAQ

  • क्या चौकन्ना रहने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है?

    लंबे समय तक तनाव रहने और आराम न मिलने की स्थिति में कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन या मूड में बदलाव देखने को मिल सकता है।
  • क्या सतर्क रहने से मानसिक थकान हो सकती है?

    लगातार किसी संभावित खतरे पर ध्यान लगाए रखने से दिमाग को आराम का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे मानसिक थकान महसूस हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 07, 2026 11:52 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti