क्या आप भी छोटी-सी बात को लेकर घंटों सोचते रहते हैं? कई बार हमें लगता है कि ज्यादा सोचना समस्या का हल निकालने में मदद करेगा, लेकिन क्या ऐसा हमेशा होता है? Aster RV Hospital, बेंगलुरु के साइकियाट्री और काउंसलिंग सर्विसेज के विजिटिंग कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, अगर दिमाग को आराम देने के बजाय हम हर समय किसी न किसी बात में उलझे रहें, तो इसका असर सिर्फ मूड पर नहीं बल्कि शरीर पर भी पड़ सकता है। लगातार सोचते रहने की आदत को आम बोलचाल में ओवरथिंकिंग कहा जाता है। इसमें व्यक्ति किसी घटना, गलती, रिलेशन, काम या फ्यूचर से जुड़ी बातों को बार-बार अपने दिमाग में दोहराता रहता है।
खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति को पता भी होता है कि वह जरूरत से ज्यादा सोच रहा है, फिर भी विचारों को रोकना आसान नहीं होता। यही स्थिति धीरे-धीरे मानसिक थकान और तनाव को बढ़ा सकती है। साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, लंबे समय तक तनाव और चिंता में रहने का असर शरीर की कई प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
ओवरथिंकिंग (Overthinking) क्या है और यह दिमाग को कैसे घेर लेती है?
साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, ओवरथिंकिंग या बार-बार नेगेटिव विचारों में उलझे रहना तनाव को बढ़ा सकता है और इसका असर नींद, एनर्जी, पाचन और रोजमर्रा के कामों पर दिखाई दे सकता है। किसी घटना या समस्या के बारे में सोचकर उसका हल निकालना नॉर्मल है। समस्या तब होती है जब व्यक्ति एक ही बात को अलग-अलग तरीके से बार-बार सोचता रहता है, लेकिन किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता।
जैसे, ''मैंने ऐसा क्यों कहा?'', ''अगर आगे कुछ गलत हो गया तो?'', ''लोग मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे?'' जैसे विचार लगातार दिमाग में घूमते रह सकते हैं। इस तरह की सोच व्यक्ति को वर्तमान स्थिति से दूर कर देती है। दिमाग लगातार संभावित समस्याओं और नेगेटिव रिजल्ट पर ध्यान देने लगता है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
1. शरीर में तनाव
साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा बताते हैं कि जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो इससे हार्ट रेट बढ़ना, मसल्स में खिंचाव, बेचैनी या थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। अगर तनाव और चिंता लंबे समय तक बनी रहे, तो व्यक्ति को आराम महसूस करना भी मुश्किल हो सकता है। डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, मानसिक तनाव और फिजिकल हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए लगातार परेशान रहने की आदत को केवल ज्यादा सोचने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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2. नींद पर असर
ओवरथिंकिंग का सबसे आम असर नींद पर दिखाई दे सकता है। रात में बिस्तर पर जाने के बाद दिनभर की घटनाओं को याद करना या आने वाले दिनों को लेकर चिंता करना दिमाग को शांत होने नहीं देता। ऐसे में नींद आने में देरी, बार-बार नींद खुलना या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस हो सकती है। नींद पूरी न होने पर अगले दिन ध्यान लगाने, डिसीजन लेने और काम करने में परेशानी हो सकती है। इससे व्यक्ति फिर तनाव महसूस कर सकता है और एक तरह की साइकिल बन जाती है।
3. पाचन और भूख पर असर
तनाव का असर डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में ज्यादा चिंता के दौरान भूख कम हो सकती है, जबकि कुछ लोग तनाव में ज्यादा खाने लगते हैं। पेट में भारीपन, बेचैनी या पाचन से जुड़ी परेशानी भी महसूस हो सकती है। हालांकि, हर पाचन समस्या का कारण ओवरथिंकिंग नहीं होता। अगर पेट से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है, तो इसके अन्य कारणों की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
overthinking effects on health
साल 2025 में Psikologiya Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अनिश्चितता और सामाजिक दबाव के कारण आज के समय में "ओवरथिंकिंग" यानी ज्यादा सोचना एक आम समस्या बन गई है, जो मेंटल और फिजिकल हेल्थ को प्रभावित करती है। इससे निपटने के लिए लोग रिफ्रेमिंग, माइंडफुलनेस जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
कब समझें कि ज्यादा सोचना समस्या बन रहा है?
साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा बताते हैं कि अगर विचारों के कारण व्यक्ति का काम, पढ़ाई, रिलेशन, नींद या रोजमर्रा की एक्टिविटीज प्रभावित होने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। लगातार बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी या हर समय किसी अनहोनी की चिंता भी संकेत हो सकते हैं कि मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है।
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हर वक्त सोचने की आदत को रोकने के लिए साइकेट्रिस्ट के असरदार उपाय
- साइकेट्रिस्ट डॉ. मुरली कृष्णा सलाह देते हैं कि हर विचार को रोकना संभव नहीं है, लेकिन उसके साथ अपना व्यवहार बदला जा सकता है।
- सही डेली रूटीन, पर्याप्त नींद, फिजिकल एक्टिविटी, स्क्रीन से ब्रेक और भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत मददगार हो सकती है।
- किसी समस्या को बार-बार सोचने के बजाय उसे लिखकर उसके समाधान पर ध्यान देना भी फायदेमंद हो सकता है।
- अगर लगातार चिंता और विचारों के कारण जीवन प्रभावित हो रहा है, तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर साइकेट्रिस्ट स्थिति के अनुसार उचित इलाज और थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।
निष्कर्ष
कभी-कभार किसी बात को लेकर ज्यादा सोचना नॉर्मल है, लेकिन जब यही आदत रोजाना की जिंदगी, नींद और फिजिकल हेल्थ को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मानसिक तनाव का असर शरीर पर भी पड़ सकता है। इसलिए लगातार नेगेटिव विचारों में उलझे रहने के बजाय समय रहते एक्सपर्ट की मदद लेना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, दोनों के लिए बेहतर कदम हो सकता है।
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FAQ
क्या ज्यादा सोचने से याददाश्त कमजोर होती है?
लगातार तनाव के कारण फोकस करने में परेशानी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को चीजें याद रखने में कठिनाई महसूस हो सकती है। हालांकि, हर भूलने की समस्या का कारण ओवरथिंकिंग नहीं होता।क्या ज्यादा सोचने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है?
लगातार मानसिक दबाव रहने पर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन महसूस होना संभव है।ओवरथिंकिंग के लिए किस डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
अगर ज्यादा सोचने के कारण नींद, काम या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो साइकोलॉजिस्ट या साइकेट्रिस्ट से सलाह ली जा सकती है।
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Oct 05, 2026 16:06 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Murali Krishna
