Mon Oct 5, 2026 | 02:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Murali Krishna , Consultant Psychiatrist

किसी कमरे में घुसते ही बात भूल जाना कोई बीमारी नहीं: जानें क्या है 'Doorway Effect' और दिमाग ऐसा क्यों करता है?

कमरे में पहुंचकर अचानक याद न रहना कि क्यों आए थे, कभी-कभी ध्यान भटकने की वजह से हो सकता है। यहां डॉक्टर से जानिए, कब ऐसी भूलने की आदत सामान्य है और कब ध्यान देना चाहिए।
किसी कमरे में घुसते ही बात भूल जाना कोई बीमारी नहीं: जानें क्या है 'Doorway Effect' और दिमाग ऐसा क्यों करता है?किसी कमरे में घुसते ही बात भूल जाना कोई बीमारी नहीं: जानें क्या है 'Doorway Effect' और दिमाग ऐसा क्यों करता है?

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी काम से कमरे में गए और वहां पहुंचते ही भूल गए कि आखिर यहां क्यों आए थे? कुछ सेकंड तक सोचने के बाद अचानक याद आता है कि आपको क्या करना था। Aster RV Hospital, बेंगलुरु के साइकियाट्री और काउंसलिंग सर्विसेज के विजिटिंग कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो जरूरी नहीं कि आपकी याददाश्त कमजोर हो रही हो। इसके पीछे दिमाग की एक नॉर्मस प्रोसेस Doorway Effect हो सकती है।

मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, जब हम एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, तो हमारा दिमाग नए वातावरण के हिसाब से सोच बदल सकता है। इसी दौरान कुछ पल के लिए पहले से चल रहा विचार या काम हमारी एक्टिव याददाश्त से हट जाता है। इसलिए दूसरे कमरे में पहुंचते ही यह याद नहीं रहता कि हम वहां किस काम से आए थे।

कमरे में जाते ही क्यों भूल जाते हैं कि क्यों आए थे?

मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, कई बार ऐसा होता है कि आप किसी काम से दूसरे कमरे में जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचते ही अचानक याद नहीं रहता कि आप यहां क्यों आए थे। कुछ सेकंड सोचने के बाद बात याद आ जाती है और आप अपना काम कर लेते हैं। यह अनुभव काफी आम है और हर बार इसे कमजोर याददाश्त या किसी बीमारी का संकेत नहीं माना जाता है। मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, इसके पीछे डोरवे इफेक्ट (Doorway Effect) जैसी एक नॉर्मल मेंटल प्रोसेस भी हो सकती है।

डोरवे इफेक्ट क्या है (What is Doorway Effect)

  • डोरवे इफेक्ट का मतलब ऐसी स्थिति से है, जब एक जगह से दूसरी जगह जाने के दौरान व्यक्ति को कुछ पल के लिए यह याद नहीं रहता कि वह वहां किस काम से आया था।
  • उदाहरण के लिए, आप कमरे से उठकर रसोई में पानी लेने जाते हैं, लेकिन रसोई में पहुंचते ही कुछ सेकंड के लिए भूल जाते हैं कि आपको क्या लेना था।
  • ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि हमारा दिमाग किसी काम को याद रखने के लिए आस-पास के वातावरण और उस समय की परिस्थितियों से मिलने वाले संकेतों का इस्तेमाल करता है।
  • जब हम एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हैं, तो वातावरण बदल जाता है और दिमाग का ध्यान नए चाजों की ओर चला जाता है।
  • डॉ. मुरली कृष्णा के मुताबिक, हमारा दिमाग एक समय में कई तरह की सूचनाओं को संभाल रहा होता है।
  • किसी काम को करते हुए अगर हम अचानक दूसरी जगह जाते हैं, तो हमारा ध्यान नए वातावरण, आवाजों, चीजों या किसी दूसरे विचार की तरफ जा सकता है।
  • इस दौरान जिस काम के लिए हम कमरे में आए थे, वह थोड़ी देर के लिए हमारी एक्टिव याददाश्त से बाहर हो सकता है। अक्सर कुछ सेकंड रुकने, वापस उसी जगह जाने या पहले की एक्टिविटी के बारे में सोचने पर वह बात दोबारा याद आ जाती है।

साल 2016 में Memory जर्नल में प्रकाशित जानकारी से पता चलता है कि किसी कमरे या दरवाजे से केवल कल्पना में गुजरने से भी चीजें भूलने की समस्या (location updating effect) हो सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जब प्रतिभागियों ने मानसिक रूप से (मन ही मन) एक दरवाजे को पार करने की कल्पना की, तो उन्हें चीजें याद रखने में उतनी ही परेशानी हुई जितनी असल में चलने पर होती है। इस प्रकार, यह स्टडी 'इवेंट हॉरिजन मॉडल' की इस बात की पुष्टि करती है कि भूलने की यह घटना केवल आंखों से देखने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हमारा दिमाग कमरों में बदलाव को कैसे समझता है, इस पर आधारित है।

forgetting why you entered a roomforgetting why you entered a room

इसे भी पढ़ें: बार-बार चीजें भूलना कब है चिंता की बात? डाॅक्‍टर से जानें किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

क्या हर बार ऐसा होना चिंता की बात है?

मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, सिर्फ कभी-कभार कमरे में जाकर अपना काम भूल जाना आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होता। खासकर तब, जब कुछ समय बाद बात याद आ जाए और रोजाना के दूसरे काम नॉर्मल तरीके से किए जा रहे हों। नींद की कमी, तनाव, बहुत ज्यादा काम, लगातार मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल और एक साथ कई काम करने की आदत भी फोक्स को प्रभावित कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में छोटी-छोटी बातें भूलना ज्यादा महसूस हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: भूलने की बीमारी को कहें अलविदा, तेजपत्ता बनेगा आपका ब्रेन टॉनिक

कब इसे सामान्य भूलने की आदत न मानें?

मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा सलाह देते हैं कि अगर भूलने की समस्या बार-बार होने लगे और उसका असर डेली लाइफ पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए, बार-बार जरूरी चीजें खोना, हाल की बातचीत याद न रहना, परिचित जगहों या रास्तों में कंफ्यूज होना या सामान्य काम करने में असामान्य परेशानी होना ज्यादा गंभीर संकेत हो सकते हैं।

इसी तरह, अगर व्यक्ति को अपने व्यवहार या याददाश्त में बदलाव खुद महसूस हो रहा है और यह समस्या लगातार बढ़ रही है, तो डॉक्टर या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है। केवल कमरे में जाने के बाद किसी काम का याद न रहना अपने आप में किसी मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं है।

फोकस और याददाश्त बेहतर रखने के लिए क्या करें?

  • मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा सलाह देते हैं कि पर्याप्त नींद लेना, एक समय में एक काम पर फोकस करना और जरूरी कामों के लिए नोट्स या रिमाइंडर का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है।
  • अगर आप किसी काम से कमरे से उठकर जा रहे हैं, तो रास्ते में उस काम को मन में दोहराना भी मदद कर सकता है।
  • तनाव कम करने और नियमित फिजिकल एक्टिविटी करने से भी फोकस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
  • सबसे जरूरी बात यह है कि कभी-कभार होने वाली ऐसी छोटी भूल को लेकर तुरंत डरने की जरूरत नहीं है।

निष्कर्ष

कमरे में पहुंचते ही यह भूल जाना कि आप वहां क्यों आए थे, कई बार Doorway Effect और ध्यान के अस्थायी बदलाव से जुड़ा नॉर्मल अनुभव हो सकता है। अगर बात कुछ सेकंड में याद आ जाती है और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही हो या दूसरे कामों में भी बदलावों के साथ दिखाई दे रहे हों, तो एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या तनाव की वजह से बातें ज्यादा भूल सकते हैं?

    ज्यादा तनाव के दौरान फोकस प्रभावित हो सकता है, जिससे सामान्य चीजें भी याद रखने में मुश्किल लग सकती हैं।
  • बार-बार चीजें भूलने पर किस डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

    अगर भूलने की समस्या लगातार बनी हुई है, तो शुरुआत में जनरल फिजीशियन से सलाह ली जा सकती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक की सलाह ली जा सकती है।
  • याद करने की सबसे अच्छी ट्रिक कौन सी है?

    जरूरी काम को नोट करना, रिमाइंडर लगाना या काम को मन में दोहराना ध्यान बनाए रखने और छोटे काम याद रखने में मदद कर सकता है।

Read Next

→ गैस, दरवाजा या लॉक बार-बार चेक करते हैं? डॉक्टर से जानें ये सिर्फ आदत है या एंग्जायटी

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 05, 2026 12:15 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Oct 05, 2026 12:15 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Murali Krishna