''सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए'', अगर आपके दिमाग में भी यह बात बार-बार चलती रहती है, तो जरूरी नहीं कि यह सिर्फ आपकी मेहनत करने की आदत हो। कई लोग काम, पढ़ाई, करियर, रिलेशन और यहां तक कि अपने लुक्स को लेकर भी चाहते हैं कि सब कुछ उनकी उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल सही हो। Aster RV Hospital, बेंगलुरु के साइकियाट्री और काउंसलिंग सर्विसेज के विजिटिंग कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, छोटी-सी गलती होने पर निराश होना, बार-बार अपने काम को चेक करना या दूसरों से बेहतर करने का दबाव महसूस करना धीरे-धीरे मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।
मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, परफेक्शनिस्ट सोच में व्यक्ति खुद के लिए बहुत ऊंचे मानक तय कर सकता है। जब वह उन मानकों को पूरा नहीं कर पाता, तो उसके मन में असफलता, अपराधबोध या खुद को लेकर नेगेटिव विचार पैदा हो सकते हैं। कुछ लोगों में यही सोच काम को टालने या शुरू करने से बचने का कारण भी बन सकती है, क्योंकि उन्हें गलती होने का डर रहता है।
हर चीज परफेक्ट करने की जिद से मेंटल हेल्थ पर कैसे पड़ता है बुरा असर?
मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, परफेक्शनिज्म में व्यक्ति खुद से बड़ी अपेक्षाएं रख सकता है, उसे लग सकता है कि किसी काम को तभी सफल माना जाएगा, जब उसमें कोई गलती न हो। कई बार व्यक्ति अपनी उपलब्धियों के बावजूद संतुष्ट नहीं हो पाता और उसका ध्यान उन चीजों पर ज्यादा रहता है जो ठीक नहीं हुईं। यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति जो बेहतर काम करना चाहता है, वह परफेक्शनिस्ट नहीं होता। समस्या तब बन सकती है जब पूर्णता की जरूरत इतनी बढ़ जाए कि व्यक्ति के तनाव, आत्मविश्वास, रिश्तों या रोजमर्रा के काम पर असर पड़ने लगे।
1. हर छोटी गलती पर खुद को दोष देना
- मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा बताते हैं कि परफेक्शनिस्ट सोच का एक बड़ा असर यह हो सकता है कि व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करने में मुश्किल महसूस करे।
- उदाहरण के लिए, किसी काम में 10 चीजें अच्छी होने के बावजूद उसका ध्यान केवल उस एक गलती पर अटक सकता है।
- ऐसे में मन में बार-बार यह विचार आ सकता है कि ''मुझसे यह गलती कैसे हो गई?'' या ''मैंने इसे और बेहतर क्यों नहीं किया?'' इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास यानी कॉन्फिडेंस प्रभावित हो सकता है और खुद के प्रति नेगेटिव सोच बढ़ सकती है।
2. काम शुरू करने में परेशानी
- मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा के अनुसार, यह जरूरी नहीं कि परफेक्शनिज्म हमेशा व्यक्ति को ज्यादा काम करने के लिए प्रेरित करे।
- कई बार गलती करने के डर से व्यक्ति किसी काम को शुरू करने में ही टालमटोल करने लगता है।
- उसे लग सकता है कि अगर रिजल्ट बिल्कुल सही नहीं आया तो मेहनत बेकार हो जाएगी। इस वजह से काम टालने की आदत भी बढ़ सकती है। बाद में काम पूरा करने का दबाव और तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
साल 2022 में World Journal of Clinical Cases में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, किशोरों में परफेक्शनिज्म यानी हर चीज में पूर्णता की जिद की आदत बहुत आम है, जो उनके मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है। चूंकि परफेक्शनिज्म को बदलना आसान नहीं है, इसलिए इसके इलाज के लिए किशोरों की सोच, भावनाओं और असफलता को देखने के नजरिए को ध्यान में रखकर खास थेरेपी या इलाज तैयार किए जाने चाहिए।
Perfectionism and mental health
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इस सोच से खुद को बाहर निकालने के लिए मनोचिकित्सक के आसान टिप्स
- मेंटल हेल्थ के लिए यह स्वीकार करना जरूरी है कि हर काम का रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक होना संभव नहीं है।
- अपनी क्षमता के अनुसार अच्छा करने की कोशिश करना हेल्दी हो सकता है, लेकिन हर परिस्थिति को कंट्रोल करने या हर काम को बिल्कुल सही करने की कोशिश मानसिक दबाव बढ़ा सकती है।
- अपनी गलतियों को सीखने का अवसर मानना और जरूरत पड़ने पर दूसरों से मदद लेना इस सोच को बैलेंस करने में मदद कर सकता है।
कब एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए?
मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा सलाह देते हैं कि अगर ''सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए'' वाली सोच के कारण व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है, काम टालता है, नींद प्रभावित होती है या रोजाना के काम करना मुश्किल लगने लगता है, तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए। मनोचिकित्सक व्यक्ति की स्थिति और लक्षणों को समझकर यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि समस्या केवल व्यक्तित्व की प्रवृत्ति है या इसके पीछे कोई अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या भी है।
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निष्कर्ष
हर काम परफेक्ट करने की आदत हमेशा मानसिक मजबूती (Mental strength) की निशानी नहीं होती। जब काम पूरा होने की उम्मीद व्यक्ति को लगातार तनाव, आत्म-आलोचना और असंतोष की ओर ले जाने लगे, तो इस सोच पर ध्यान देना जरूरी है। अपनी गलतियों को स्वीकार करना, वास्तविक लक्ष्य बनाना और जरूरत पड़ने पर मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से मदद लेना हेल्दी तरीके से आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
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FAQ
क्या परफेक्शनिज्म एक मानसिक बीमारी है?
परफेक्शनिज्म अपने आप में जरूरी नहीं कि मानसिक बीमारी हो। यह एक सोच या व्यवहार का पैटर्न हो सकता है।क्या हर काम को बार-बार चेक करना परफेक्शनिज्म है?
जरूरी नहीं लेकिन अगर बार-बार जांच करने के बावजूद व्यक्ति को भरोसा न हो और इससे काम प्रभावित होने लगे, तो एक्सपर्ट से सलाह लें।
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Sep 29, 2026 20:26 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Murali Krishna
