
अगर डाइट वही है, दिनचर्या भी पहले जैसी है, फिर भी वजन लगातार बढ़ता जा रहा है और समझ नहीं आ रहा कि वजह क्या है, तो इसके पीछे सिर्फ आलस या गलत खानपान ही जिम्मेदार नहीं होता। कई बार शरीर का हार्मोनल सिस्टम चुपचाप बिगड़ने लगता है और उसका पहला असर वजन पर दिखता है। खासतौर पर महिलाएं जब यह कहती हैं कि मैं कम खाती हूं फिर भी मोटी हो रही हूं तो डॉक्टर सबसे पहले हार्मोन की जांच की सलाह देते हैं। इन्हीं हार्मोनों में एक अहम नाम है प्रोलैक्टिन का। प्रोलैक्टिन को अक्सर सिर्फ प्रेग्नेंसी और स्तनपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन असल में यह हार्मोन पुरुषों और महिलाओं दोनों के शरीर में मौजूद होता है और मेटाबॉलिज्म से लेकर एनर्जी लेवल तक को प्रभावित करता है। जब इसका लेवल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर में ऐसे बदलाव होने लगते हैं जिन्हें हम सामान्य थकान, तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस लेख में यशोदा अस्पताल, हैदराबाद के सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डॉ. जयादित्य घोष (Dr. Jayaditya Ghosh, Consultant Endocrinologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad) से जानिए, हाई प्रोलैक्टिन से वजन बढ़ता है या घटता है?
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हाई प्रोलैक्टिन से वजन बढ़ता है या घटता है? - High prolactin effect weight gain or loss
डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि प्रोलैक्टिन का लेवल शरीर के हार्मोनल संतुलन से जुड़ा होता है और जब यह सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे हाई प्रोलैक्टिन या हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया कहा जाता है। हाई प्रोलैक्टिन से वजन बढ़ता है या घटता है? इस सवाल का सीधा जवाब देते हुए डॉक्टर गुंजन कहती हैं कि ज्यादातर मामलों में हाई प्रोलैक्टिन से वजन बढ़ता है, न कि घटता। प्रोलैक्टिन बढ़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जिससे शरीर में फैट जमा होने लगता है। साथ ही, यह थायराइड हार्मोन के कामकाज को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में भूख कम लगने या तनाव के कारण वजन घट भी सकता है, लेकिन यह आम नहीं है।
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महिलाओं में हाई प्रोलैक्टिन
महिलाओं में हाई प्रोलैक्टिन का असर ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। डॉ. जयादित्य घोष के मुताबिक, इस स्थिति में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, पीसीओएस जैसे लक्षण उभर सकते हैं और वजन तेजी से बढ़ने लगता है, खासकर पेट और कमर के आसपास। कई महिलाओं को डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम करने में कठिनाई होती है, जिसका एक बड़ा कारण हार्मोनल असंतुलन होता है।
पुरुषों में हाई प्रोलैक्टिन
पुरुषों में हाई प्रोलैक्टिन की समस्या को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डॉक्टर गुंजन बताती हैं कि पुरुषों में इससे थकान, लो लिबिडो, मसल लॉस और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हार्मोनल गड़बड़ी के कारण शरीर में फैट प्रतिशत बढ़ने लगता है और मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

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डॉक्टर की सलाह
अगर बिना वजह वजन बढ़ रहा हो, पीरियड्स में गड़बड़ी हो या लगातार थकान बनी रहे, तो प्रोलैक्टिन लेवल की जांच जरूरी हो जाती है। ब्लड टेस्ट के जरिए इसका पता लगाया जाता है। डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि सही दवाओं, लाइफस्टाइल बदलाव और तनाव कंट्रोल से प्रोलैक्टिन लेवल को सामान्य किया जा सकता है, जिससे वजन भी धीरे-धीरे संतुलित होने लगता है।
हाई प्रोलैक्टिन को कंट्रोल करने के लिए पर्याप्त नींद, योग, बैलेंस डाइट और नियमित एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। कैफीन और जंक फूड से दूरी बनाना भी फायदेमंद होता है। डॉक्टर गुंजन सलाह देती हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई हार्मोनल दवा न लें।
निष्कर्ष
हाई प्रोलैक्टिन एक हार्मोनल समस्या है, जिसका सीधा असर वजन और संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। ज्यादातर मामलों में इससे वजन बढ़ता है और वजन कम करना मुश्किल हो जाता है। डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, समय पर जांच और सही इलाज से न केवल प्रोलैक्टिन लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है, बल्कि वजन और हार्मोनल संतुलन भी वापस पाया जा सकता है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
हाई प्रोलैक्टिन के मुख्य लक्षण क्या हैं?
महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना, वजन बढ़ना, ब्रेस्ट से दूध आना, थकान और मूड स्विंग्स इसके आम लक्षण हैं। पुरुषों में लो लिबिडो, कमजोरी और वजन बढ़ना देखा जा सकता है।हाई प्रोलैक्टिन की जांच कैसे होती है?
ब्लड टेस्ट के जरिए प्रोलैक्टिन लेवल की जांच की जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर अन्य जांच की सलाह भी दे सकते हैं।क्या हाई प्रोलैक्टिन को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?
सही दवाओं, लाइफस्टाइल बदलाव और तनाव कंट्रोल से प्रोलैक्टिन लेवल को सामान्य किया जा सकता है।
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Jan 05, 2026 14:51 IST
Published By : Akanksha Tiwari