दिल की कमजोरी से जुड़ा रोग है डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी, 20 से 60 की उम्र वालों को रहता है ज्यादा खतरा

हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने से डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी जैसा रोग होता है, इस बीमारी का खतरा 20 से 60 साल की उम्र वालों को अधिक होता है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jun 21, 2021Updated at: Jun 21, 2021
दिल की कमजोरी से जुड़ा रोग है डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी, 20 से 60 की उम्र वालों को रहता है ज्यादा खतरा

दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। शरीर में, गर्भ में मौजूद भ्रूण के चार सप्ताह के होने से लेकर मौत तक लगातार बिना रुके काम करने वाला अंग दिल ही होता है। दिल या हृदय की सेहत का उचित ध्यान रखने से शरीर में इससे जुड़ी तमाम बीमारियों से बचा जा सकता है। हालांकि दिल से जुड़ी बीमारियों के बारे में पहले से कोई सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि इससे जुड़ी बीमारियां तमाम तरह की होती है। कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) भी दिल से जुड़ा रोग है जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और इसकी वजह से दिल को काम करने में कठिनाई होती है। कार्डियोमायोपैथी कई तरह की होती है, और इस बीमारी की वजह से हमारा दिल शरीर में सही तरीके से रक्त को पंप नहीं कर पाता है। इस स्थिति के कारण दिल का दौरा, हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं भी हो सकती है। डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy) भी इसका एक प्रकार है, आइए विस्तार से जानते है दिल से जुड़े इस रोग के बारे में।

कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy)

Dilated-Cardiomyopathy-Causes-and-Prevention

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी को समझने से पहले हमें कार्डियोमायोपैथी के बारे में जान लेना चाहिए। कार्डियोमायोपैथी दिल की कमजोरी से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें हमारे दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और जिसकी वजह से हमारा दिल शरीर में सही तरीके से ब्लड सर्कुलेशन नहीं कर पाता है। गौरतलब हो, हमारा दिल तीन परतों से बना होता है, जिसे बाहरी, अंदरूनी और बीच की परत कहते हैं। दिल की इन तीन परतों को विज्ञान की भाषा में एपिकार्डियम (बाहरी परत), एंडोकार्डियम (अंदरूनी परत) और मायोकार्डियम (बीच की परत) के नाम से जाना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कई बार दिल की बीमारी, आनुवंशिक कारणों से या फिर किसी दवा की वजह से दिल में हुए कार्डियक इवेंट दिल की मांसपेशियों में बदलाव पैदा करते हैं। इसकी वजह से हमारे दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और इस स्थिति को कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है।

कार्डियोमायोपैथी के प्रकार (Types of Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी की समस्या जैसे-जैसे दिल में बढ़ती है यह हमारे दिल की मांसपेशियों को कमजोर करती जाती है। इस स्थिति की वजह से दिल सही तरीके से शरीर में ब्लड को पंप नहीं कर पाता है। इसकी वजह से दिल का दौरा और धड़कन से जुड़ी समस्या के होने का खतरा बढ़ जाता है। मुख्यतः कार्डियोमायोपैथी 4 प्रकार की होती है। 

  • रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी (Restrictive Cardiomyopathy)
  • हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी (Hypertrophic Cardiomyopathy)
  • डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy)
  • अरिथमोजेनिक राइट वेंट्रिकुलर डिस्प्लासिआ (Arrhythmogenic Right Ventricular Dysplasia)

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy)

Dilated-Cardiomyopathy-Causes-and-Prevention

डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी की स्थिति में हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इस समस्या में दिल का लेफ्ट वेंट्रिकल प्रभावित होता है। डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी की वजह से दिल का लेफ्ट वेंट्रिकल आकर में बड़ा हो जाता है और मांसपेशियां पतली यानि कि कमजोर हो जाती हैं। इसकी वजह से शरीर में खून के परिसंचरण में दिक्कत होती है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है और सबसे ज्यादा ये मध्यम आयु वर्ग के लोगों में देखी जाती है। इस बीमारी का ज्यादा खतरा 20 से 60 साल की उम्र वाले लोगों को होता है। इसमें जैसे-जैसे हृदय कक्ष (लेफ्ट वेंट्रिकल) फैलता है, हृदय की मांसपेशी सामान्य रूप से सिकुड़ नही पाती और रक्त को अच्छी तरह से पंप नहीं करती हैं। इस बीमारी की वजह से हार्ट फेलियर, अनियमित दिल की धड़कन, लय विकार, रक्त के थक्के आदि समस्याएं हो सकती हैं।

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डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण (Dilated Cardiomyopathy Causes)

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण हर मामलों में अलग-अलग हो सकते हैं। इस बीमारी की वजह दिल से जुड़ी समस्याएं, दवाएं और कुछ अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। ज्यादातर लोगों में यह समस्या आनुवंशिक भी होती है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

  • डायबिटीज (Diabetes)
  • कोरेनरी हार्ट डिजीज (Coronary Heart Disease)
  • हृदय के वाल्व से जुड़ी समस्या (Heart Valve Abnormalities)
  • दिल पर असर करने वाली दवाएं (Drugs that Affect the Heart)
  • पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी (Postpartum Cardiomyopathy)
  • दिल का दौरा (Heart Attack)
  • हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
  • वायरल संक्रमण (हृदय की मांसपेशियों से जुड़े) (Viral Infection)
  • शराब (Alcohol)

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के लक्षण (What are the Symptoms of Dilated Cardiomyopathy?)

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डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या के शुरुआती दिनों में इसे लक्षण न के बराबर होते हैं। कुछ लोगों में तो इसके लक्षण बिल्कुल भी पता नहीं चल पाते, जिसके बाद तमाम तरह की जांच से इसका पता लगाया जाता है। डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • सांस फूलने की समस्या 
  • पैरों, टखनों और पेट में सूजन
  • थकान
  • व्यायाम करने की क्षमता में कमी
  • सीने में दर्द या धड़कन तेज होना
  • सांस की अचानक कमी
  • बेहोशी
  • कमजोरी या आलस्य
  • खांसी

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के जोखिम (What are the Risk Factors of Dilated Cardiomyopathy?)

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के प्रमुख जोखिम इस प्रकार हैं।

  • कार्डियक अरेस्ट या दिल से जुड़ी बीमारी।
  • ल्यूपस आदि की वजह से हृदय की मांसपेशियों की सूजन।
  • हेमोक्रोमैटोसिस
  • न्यूरोमस्कुलर विकार।
  • लंबे समय तक अत्यधिक शराब या अवैध नशीली दवाओं का सेवन।

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की वजह से होने वाली दिक्कतें (Dilated Cardiomyopathy Complications)

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की वजह से होने वाली प्रमुख दिक्कतें इस प्रकार से हैं।

  • दिल की धड़कन रुकना -  डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की स्थिति में हमारा हृदय शरीर में सही तरीके से खून का परिसंचरण नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से दिल की धड़कन के रुकने जैसी समस्या हो सकती है।
  • हृदय वाल्व की समस्या -  डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी बाएं वेंट्रिकल के बढ़ने से आपके हृदय के वाल्वों में दिक्कतें आती हैं और ये अपना काम ठीक तरीके से नहीं कर पाते हैं।
  • दिल का दौरा -  डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या में अचानक दिल का दौरा पड़ने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इस सबसे प्रमुख कारण शरीर सही तरीके से खून का प्रवाह न हो पाना होता है।
  • रक्त के थक्के (एम्बोली) - बाएं वेंट्रिकल में रक्त के जमा होने से रक्त के थक्के बन सकते हैं, जो रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं और महत्वपूर्ण अंगों में रक्त के प्रवाह को ब्लाक कर देते हैं। ये रक्त के थक्के स्ट्रोक, दिल का दौरा आदि का कारण भी होते हैं। 

डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी से बचाव (How Do You Prevent Dilated Cardiomyopathy?)

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कार्डियोमायोपैथी की समस्या से ग्रसित लोग जिनमें इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं उन्हें तुरंत उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन इसके अलावा दूसरे मामलों में उपचार जरूरी होता है। डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या में इलाज के साथ-साथ जीवनशैली में कुछ बदलाव फायदेमंद होते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए आपको अपने जीवनशैली में ये बदलाव जरूर करने चाहिए।

  • धूम्रपान से बचें।
  • शराब का सेवन कम मात्रा में या बिल्कुल भी न करें।
  • बिना प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी अवैध ड्रग्स या दवा न लें।
  • स्वस्थ और संतुलित भोजन लें।
  • ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के स्तर को संतुलित रखें।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • तनाव, चिंता आदि से दूर रहें
  • वजन कम रखें।

इस प्रकार आप इन आदतों को अपनाकर डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या से बाख सकते हैं। दिल की सेहत पर हमारी आदतों और खानपान का विशेष असर पड़ता है, इसलिए ऐसी आदतों या खानपान से बचना चाहिए जो दिल के फायदेमंद नही हों। डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी एक हृदय रोग है जो दिल के बाएं वेंट्रिकल में होता है। कई बार इस बीमारी के कोई खास लक्षण शरीर में नही दिखते हैं इसलिए इसका पता कई तरह की जांच के बाद चल पाता है। इस समस्या से बचने के लिए आपके खानपान की आदतें और जीवनशैली बहुत महत्वपूर्ण होती है।

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