हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या है और कब पड़ती है इसकी जरूरत? डॉक्टर से जानें पूरी जानकारी

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत गंभीर बीमारियों में पड़ती है। जब यह वाल्व खराब हो जाते हैं तब हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट किया जाता है। 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jun 07, 2021
हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या है और कब पड़ती है इसकी जरूरत? डॉक्टर से जानें पूरी जानकारी

जब हृदय के वाल्व खराब हो जाते हैं तब हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट किया जाता है। यह वाल्व रक्त को हृदय से वापस लौटने से बचाते हैं। इनके खराब होने पर ओपन हार्ट सर्जरी भी की जाती है। यह  सर्जरी मरीज का सीना खोलकर की जाती है। लेकिन अब हाई टेक्नोलॉजी आ गई है। ऐसे में हार्ट को पूरा खोलने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। कानपुर में हृदय रोग संस्थान में कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि हार्ट वाल्व रिल्समेंट सर्जरी की जरूरत तब पड़ती है जब वाल्व में सिकड़ुन आ जाती है या लीकेज हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में मरीज की सांस फूलती है और उसके शरीर में सूजन आ जाती है। सूजन की शुरूआत पैरों से होती है। हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्यों की जाती है। इसकी जरूरत किन बीमारियों में पड़ती है, इसके बारे में सभी जानकारी दी डॉक्टर अवधेश शर्मा ने। 

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वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या है?

डॉक्टर अवधेश शर्मा ने बताया कि हमारे हार्ट में चार चेंबर होते हैं। दो राइट में और दो लेफ्ट साइड में होते हैं। दो लेफ्ट साइड के चेंबर का नाम होता है लेफ्ट एट्रियम और नीचे वाले का नाम होता है लेफ्ट वेंट्रिकल। लेफ्ट एट्रिया में ऑक्सीजनयुक्त रक्त फेफड़ों से आता है। लेफ्ट एट्रिया से लेफ्ट वेंट्रिकल में रक्त माइट्रल वाल्व के माध्यम से जाता है। लेफ्ट वेंट्रिकल से एरोटा नामक धमनी से रक्त पूरे शरीर में जाता है। लेफ्ट वेंट्रिकल और एरोटा के बीच में एक वाल्व होता है जिसे एरोटिक वाल्व कहते हैं। लेफ्ट साइड में दो माइट्रल वाल्व होते हैं। ये लेफ्ट एट्रिया और लेफ्ट वेंट्रिकल के बीच होते हैं। एरोटिक वाल्व लेफ्ट वेंट्रिकल और एरोटा के बीच में होता है। 

राइट साइड में भी दो चेंबर होते हैं। ऊपर वाले को राइट एट्रियम और नीचे वाले चेंबर को राइट वेंट्रिकल कहते हैं। लेफ्ट एट्रिया में ऑक्सीजन युक्त ब्लड होता है। राइट चेंबर डी-ऑक्सीजिनेटिड ब्लड होता है। इस ब्लड में ऑक्सीजन कम होता है। राइट एट्रिया में ऊपर और नीचे वाले हिस्से रक्त आता है। वहां से ये अशुद्ध रक्त राइट एट्रिया से राइट वेंट्रिकल में एक वाल्व जिसे ट्राईक्युस्पिड वाल्व (tricuspid valve) में जाता है। राइट वेंट्रिकल से ये ब्लड एक बड़ी आर्टरी होती है जिसे पल्मोनरी आर्टरी कहते हैं, इसके माध्यम से ये ब्लड फेफड़ों में चला जाता है। ऑक्सीजन युक्त होने के लिए।  जब इन वाल्व में किसी भी वजह से क्षति होती है तब रक्त का प्रवाह बाधित होता है। जिससे सर्जरी की जरूरत पड़ती है। 

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वाल्व का क्या काम है?

वाल्व का काम है कि दोनों चेंबर के रक्त एक दूसरे से मिल न पाएं। ये वाल्व ब्लड को एक चेंबर से दूसरे चेंबर आने से रोकते हैं। इन वाल्व्स की एक तरफा ओपनिंग होती है। उदाहरण के लिए लेफ्ट एट्रिया से माइट्रल वाल्व के माध्यम से रक्त ब्लड लेफ्ट वेंट्रिकल में चला गया तो वापस वो लेफ्ट वेंट्रिकल से लेफ्ट एट्रिया में नहीं आएगा। लेफ्ट वेंट्रिकल से ब्लड एरोटा में चला गया तो वह एरोटा से लेफ्ट वेंट्रिकल में वापस नहीं आ पाएगा। वाल्व का ऐसा काम इसलिए है ताकि ब्लड का फ्लो बना रहे। रक्त का प्रवाह विपरीत दिशा में न हो।

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हार्ट वाल्व खराब क्यों होते हैं?

रूमेटिक हार्ट डिजीज

डॉक्टर अवधेश शर्मा का कहना है कि ये वाल्व में रूमेटिक हार्ट डीजीज के कारण भी हो सकती है। ये एक तरह का हार्ट की मांसपेशियों में संक्रमण होता है। ये उन लोगों में ज्यादा होता है जो अपनी फाइनेंशियल कंडीशन की वजह से हाइजीन का ख्याल नहीं रख पाते। इसमें पहले जोडो़ं की मांसपेशियों में प्रभाव पड़ता है, फिर हार्ट की मांसपेशियों में प्रभाव पड़ता है। इसमें वाल्व में सूजन आ जाती है। ये उनमें सूजन कर देते हैं और वाल्व को खराब कर देते हैं।

जब वाल्व खराब हो जाते हैं तब क्या होता है?

जब वाल्व डैमेज हो जाते हैं तब वे पूरी तरह से न खुल पाते हैं और बंद हो पाते हैं। इन वाल्व में सिकुड़न आ जाती है। जिस वजह से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और रक्त जमने लगता है। उदाहरण के लिए माइट्रल वाल्व में सिकुड़न आ जाती है। जिस वजह से लेफ्ट एट्रिया से लेफ्ट वेंट्रिकल में ब्लड नहीं जा पाएगा। जिससे पूरा ब्लड लेफ्ट एट्रिया में भर जाएगा। जिस वजह से फेफड़ों पर बैक प्रेशर पड़ेगा और व्यक्ति सांस फूलेगी और पूरे शरीर में पानी भर जाएगा। सूजन आने लगेगी।

ऐसे ही अगर किसी की एरोटिव वाल्व में सिकुड़न आ जाए तो लेफ्ट वेंट्रिकल से एरोटा में ब्लड नहीं जा पाएगा। जब एरोटा में ब्लड नहीं जाएगा तो पूरे शरीर को ब्लड की सप्लाई नहीं मिल पाएगी। जिससे मरीज को दर्द होगा, चक्कर आएंगे और सांस फूलेगी। सूजन की वजह से सिकुड़न भी हो सकती है और लिकेज भी हो सकती है। जब ये वाल्व बंद नहीं हो पाते तो ब्लड आगे की जगह पीछे चला जाात है। इस लीकेज को रिजर्जिटेशन (regurgitation) कहते हैं। अगर माइट्रल वाल्व में लीकेज हो रहा है तो इसे माइट्रल रिजर्जिटेशन कहते हैं और एरोटिक वाल्व में हो रहा है तो उसे एरोटिक रिजर्जिटेश लीकेज कहते हैं। इसी तरह से राइट साइड में होता है। वाल्व खराब होने के निम्न कारण भी होते हैं।

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अनियंत्रित हापरटेंशन

हाइपरटेंशन में भी वाल्व डैमेज होती हैं। 

अनियंत्रित बीपी

अगर किसी का बीपी बहुत ज्यादा है तो हार्ट को ज्यादा पंप करना पड़ता है। जब किसी वाल्व पर ज्यादा दबाव लगेगा तो उस वाल्व में डैमेज हो जाएगा। 

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अनियंत्रित ब्लड शुगर

इसमें वाल्व में कैल्शियम डिपोजिट हो जाते हैं। 

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक में भी वाल्व में कमजोरी आ जाती है। इसमें हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। जिससे वाल्व में डिफेक्ट आ जाता है। 

बढ़ती उम्र 

बढ़ती उम्र में वाल्व खराब होने लगती हैं। 

वाल्व के सिकुड़न या लीकेज होने पर लक्षण

  • सांस फूलना
  • सीने में दर्द
  • थकान
  • शरीर में सूजन

ऐसे पेशेंट को हृदय रोग से संपर्क करना चाहिए। 

इलाज

टेस्ट और दवाएं

डॉक्टर मरीज का इको करते हैं। जिससे सिकुड़न और लीकेज का पता लगाते हैं। इसमें माइल्ड, मोडरेट और सीवेयर कंडीशन देखते हैं। इसमें डॉक्टर शरीर से पानी निकालने वाली दवाएं देते हैं। इन सभी से लक्षणों पर कंट्रोल किया जाता है। ये परमानेंट निदान नहीं हैं। 

माइट्रल वाल्वॉटमी 

वाल्व में चूना नहीं हो तो उसकी बैल्युइनिंग की जाती है। माइट्रल वाल्ववॉटमी प्रक्रिया होती है। जिससे बड़ी धमनी के सारे बैलून ले जाकर वाल्व में लगा देते हैं फिर उसे बैलून को फुला देते हैं। इससे पेशेंट को 10 से 15 साल तक के लिए आराम मिल जाता है। यह इलाज सिकुड़ने  शुरूआती चरण में किया जाता है। 

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी

गंभीर सिकुड़न होने पर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की जाती है। लीकेज में डायरेक्ट सर्जरी की जाती है। ज्यादातर केसिस में सिकुड़न और लीकेज साथ-साथ चलता है। इसलिए वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की जाती है। 

कैसे की जाती है वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी?

डॉक्टर अवधेश शर्मा के मुताबिक ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है। पूरा सीना खोला जाता है। फिर हार्ट को खोलकर खराब वाल्व को निकालते है और नया वाल्व लगाते हैं। नए वाल्व में एक मेटेलिक वाल्व होते हैं और दूसरे एनिमल टिशुज के होते हैं। मेटेलिक वाल्व लंबे समय तक चलते हैं और टिशु वाल्व 10-15 साल में दोबार खराब हो जाते हैं। मेटेलिक वाल्व लगने के बाद पेशेंट को जिंदगी भर खून पतला करने वाली दवाएं खानी होती हैं। ये दवाएं दूसरी बीामारियां पैदा करती हैं। इसलिए टिशु वाल्व सर्जरी की जाती है। 

तावी (TAVI) टेक्नीक

एरोटिक स्टिनोसिस का इलाज पहले सिर्फ ओपन हार्ट सर्जरी से ही होता था। लेकिन आजकल नई टेक्नीक आ गई है। जिसमें हार्ट को ओपन करने की जरूरत नहीं पड़ती।

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत गंभीर बीमारियों में पड़ती है। जब यह वाल्व खराब हो जाते हैं तब हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट किया जाता है। 

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