
Breast Cancer Tests: जिस तरह से दुनियभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि यह बीमारी तेजी से महिलाओं में आम होती जा रही है। अगर आंकड़ों की बात करें, तो WHO के अनुसार, साल 2022 में दुनियाभर में करीब 6 लाख 70 हजार महिलाओं की मृत्यु हुई थी और भारत के आंकड़े भी काफी निराशाजनक है। National Cancer Registry Programme Report के अनुसार, भारत में साल 2022 में करीब 2 लाख से ज्यादा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हुआ था। इससे पता चलता है कि ब्रेस्ट कैंसर की समस्या कितनी तेजी से पैर पसार रही है। ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने के कारणों में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि महिलाएं लक्षणों को शुरुआती स्टेज में पहचान नहीं पाती। कई बार लक्षण इतने हल्के होते हैं कि महिलाएं इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। इसलिए हमने जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल की आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मानिनी पटेल (Dr. Manini Patel, Obstetrics & Gynaecology, Senior Consultant, Apollo Spectra, Jaipur) से बात की।
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ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण कौन से हैं?
डॉ. मानिनी पटेल कहती हैं, “शुरुआती स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर का पता लग जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि जितनी जल्दी पहचान होती है, इलाज उतना ही सफल रहता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।”
- ब्रेस्ट में गांठ महसूस होना
- ब्रेस्ट के आकार में बदलाव
- निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज आना
- स्किन के रंग या बनावट बदलना
- बगल या कॉलर बोन के पास सूजन

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ब्रेस्ट कैंसर की 4 जरूरी टेस्ट कौन से हैं?
डॉ. मानिनी पटेल ने महिलाओं को 4 जरूरी टेस्ट बताए हैं।
मैमोग्राम
ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए सबसे बेहतर तरीका मैमोग्राम है। यह एक लो-डोज एक्स-रे टेस्ट है जो ब्रेस्ट टिश्यू के अंदरूनी हिस्सों की साफ तस्वीर देता है। इससे बहुत छोटे ट्यूमर या गांठ का भी पता चल सकता है जो हाथ से महसूस नहीं होती। इसे 40 साल से ऊपर की महिलाओं को हर साल या दो साल में एक बार मैमोग्राम कराना चाहिए। जिन महिलाओं की फैमिली हिस्ट्री हैं, उन्हें यह टेस्ट पहले से ही कराना चाहिए। मैमोग्राम ब्रेस्ट कैंसर की सबसे शुरुआती और सटीक जांच है, जिससे इलाज समय रहते शुरू किया जा सकता है।
अल्ट्रासाउंड
जब मैमोग्राम में कोई असामान्य गांठ दिखती है, तो अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है। इसमें ब्रेस्ट के टिश्यू को समझा जाता है। यह जांच ध्वनि तरंगों से की जाती है जो ब्रेस्ट टिश्यू के अंदर की बनावट को दिखाती है। इससे पता चलता है कि गांठ सॉलिड है या सिस्ट है। जिन महिलाओं के ब्रेस्ट टिश्यू बहुत ज्यादा होते हैं, तो अल्ट्रासाउंड सबसे कारगर तरीका है। इसमें महिला को किसी भी तरह का दर्द नहीं होता और डॉक्टर को गांठ समझने में मदद मिलती है।
एमआरआई
अगर अल्ट्रासाउंड के जरिए महिला की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो MRI की सलाह दी जाती है। इस तकनीक में मैगनेटिक तरंगों और कंप्यूटर के जरिए ब्रेस्ट का पूरा व्यू दिखता है। यह जांच जांच हाई-रिस्क पेशेंट्स के लिए खासतौर पर की जाती है, जिनकी ब्रेस्ट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री होती है या जिनमें BRCA1 /BRCA2 जैसे जीन म्यूटेशन पाए गए हों। MRI से कैंसर फैलने की पोजीशन और आसपास के टिश्यू की स्थिति समझने में मदद मिलती है।
बायोप्सी
यह कैंसर की लास्ट वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है। जब किसी जांच में गांठ या संदिग्ध हिस्सा दिखाई देता है, तो बायोप्सी के जरिए उस टिश्यू का सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। इस जांच से पता चलता है कि गांठ बाइजीन (benign) है या कैंसर (malignant) वाली है। बायोप्सी से स्पष्ट होता है कि कैंसर का प्रकार क्या है और इसका इलाज किस तरह होना चाहिए। इसलिए अगर डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं तो मरीज को तुरंत बायोप्सी करा लेनी चाहिए।
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ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन जरूर करें
डॉ. मानिनी कहती हैं कि हर महिला को 30 साल की उम्र के बाद हर महीने एक बार अपने ब्रेस्ट की जांच जरूर करनी चाहिए। यह जांच आईने के सामने की जाती है, जिसमें आकार, त्वचा या निप्पल में किसी बदलाव को ध्यान से देखा जाता है। अगर किसी भी तरह की कोई दिक्कत दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। शुरुआती पहचान करके ही बचाव किया जा सकता है।
निष्कर्ष
डॉ. मानिनी कहती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर की जांच सिर्फ बीमारी का पता लगाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन बचाने के लिए है। इसलिए सही समय पर की गई जांच से कैंसर के इलाज की सफलता बढ़ सकती है। महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहना चाहिए। किसी भी तरह के बदलावों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए यह चार टेस्ट कराना बहुत महत्वपूर्ण है।
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Oct 15, 2025 14:13 IST
Modified By : Aneesh RawatOct 15, 2025 14:13 IST
Published By : Aneesh Rawat