कोरोना के इलाज की सूची से जल्द हटाया जा सकता है रेमडेसिविर, प्रभावशीलता का नहीं कोई प्रमाण: डॉ. डीएस राणा

कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगा दी गई है। अब इसके बाद कोरोना के इलाज की सूची से रेमडेसिविर इंजेक्शन को भी जल्द ही हटाया जा सकता है। 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 20, 2021
कोरोना के इलाज की सूची से जल्द हटाया जा सकता है रेमडेसिविर, प्रभावशीलता का नहीं कोई प्रमाण: डॉ. डीएस राणा

देश में कोरोना मरीजों के मामलों में अब थोड़ी राहत देखने का मिल रही है। कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन काफी समय से कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remedicivir Injection) का इस्तेमाल किया जाता रहा है। कहा जाता है कि कोरोना मरीजों में इसका इस्तेमाल करने से शरीर में वायरस की संख्या बढ़ती नहीं है। लेकिन इसी बीच अब गंगा राम हॉस्पिटल के चेयरपर्सन डॉक्टर डीएस राणा (Ganga Ram Hospital Chairperson Dr. DS Rana) ने इसे जल्दी हटाए जाने की बात कही हैं। डॉक्टर राणा ने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को कोरोना मरीजों के इलाज की सूची से जल्दी हटाए जाने पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि मरीजों के इलाज में इसकी प्रभावशीलता का अभी तक कोई प्रमाण या सबूत नहीं है। इसके साथ ही आईसीएमआर (ICMR) ने भी कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगा दी है। 

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डॉक्टर राणा के कहते हैं कि कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रेमडेसिविर के बारे में अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चल सके कि यह कोविड-19 के उपचार में काम करता है। इसलिए जिन दवाओं का प्रभाव नहीं है, उन्हें बंद करना होगा। डॉक्टर राणा ने कहा कि एक्सपेरिमेंटल दवाएं, प्लाज्मा थेरेपी (जो बंद हो गई है) या रेमडेसिविर, इन सभी को जल्दी ही कोरोना के इलाज से हटाया जा सकता है। इनके प्रभावीकरण को लेकर अभी तक कोई सबूत नहीं मिले हैं। इस समय केवल 3 दवाएं ही काम कर रही हैं।

  • - रेमडेसिविर को जल्द ही हटाया जा सकता है। अभी तक इसके प्रभावशीलता का कोई सबूत नहीं है।
  • - जो दवाएं कोरोना इलाज में प्रभावशाली नहीं हैं, उन्हें इसकी सूची से हटाना होगा।
  • - इस समय केवल तीन दवाएं ही काम कर रही हैं।

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रेमडेसिविर को लेकर क्या कहते हैं अन्य डॉक्टर (What Other Doctors Say on Remedisvir)

डॉक्टर अरविंद मलिक कहते हैं कि रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है। इबोला वायरस महामारी के समय इस दवा का इस्तेमाल किया गया था। कोरोना मरीजों में इसका इस्तेमाल करने से मरीज के शरीर में वायरस की संख्या बढ़ती नहीं है। यह इंजेक्शन वायरस की नए वायरस को बनने से रोकता है। इस दवा को SARS-COV-2 से लड़ने के लिए उपयोगी बताया गया था। इसलिए इसे इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी।

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  • - डॉक्टर अरविंद कहते हैं कि रेमडेसिविर इंजेक्शन सभी कोरोना मरीजों के लिए फायदेमंद नहीं होता है। यह कुछ ही मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
  • - कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। 
  • - सामान्य लक्षणों वाले मरीजों को यह दवा नहीं दी जाती है। जिन मरीजों का ऑक्सीजन सैचुरेशन कम हो रहा है और सामान्य ऑक्सीजन देने से उसमें सुधार हो जाता है, तो इस इंजेक्शन को देने से बचना चाहिए। 
  • - अगर मरीज को हाई फ्लो ऑक्सीजन देना पड़ रहा हो या वेंटिलेटर पर हो तो ही इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। वेंटिलेटर वाले मरीजों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाता है।

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प्लाज्मा थेरेपी पर क्या कहते हैं डॉक्टर राणा (Dr Rana Says on Plasma Therapy)

प्लाज्मा थेरेपी पर डॉक्टर डीएस राणा ने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी में हम किसी ऐसे व्यक्ति को प्री-फॉरवर्ड एंटीबॉडी देते हैं, जो पहले संक्रमित हो चुका है, जिससे एंटीबॉडी वायरस से लड़ सके। एंटीबॉडी आमतौर पर तब बनते हैं जब कोरोना वायरस हमला करता है। डॉक्टर राणा कहते हैं कि हमने पिछले एक साल में देखा है कि प्लाज्मा देने से मरीज और अन्य लोगों की स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ता है। साथ ही यह आसानी से उपलब्ध भी नहीं होता है। प्लाज्मा थेरेपी वैज्ञानिक आधार पर शुरू की गई थी और सबूतों के आधार पर बंद कर दी गई है। 

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