कोरोना के इलाज में अब नहीं इस्तेमाल होगी प्लाज्मा थेरेपी, ICMR ने कहा उतना प्रभावी नहीं है ये इलाज

 कोरोना के इलाज के लिए ICMR ने प्लाज्मा थेरेपी को उतना प्रभावी नहीं बताया है, जितना कि ये माना जा रहा था।आइए जानते हैं देश  में कोरोना से जुड़े अपडट्स

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: May 18, 2021
कोरोना के इलाज में अब नहीं इस्तेमाल होगी प्लाज्मा थेरेपी, ICMR ने कहा उतना प्रभावी नहीं है ये इलाज

भारत में पिछले कुछ दिनों से कोरोना मामलों (Covid-19) में गिरावट आई है। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 2,81,386 नए मामले सामने आए हैं पर 4,106 लोगों की मौत हो गई है। इस तरह कोरोना के मरने वालों का आकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में अभी 35,16,997 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 14.09 प्रतिशत है।  जहां मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 84.81 प्रतिशत है, वहीं, कोविड-19 से मृत्यु दर 1.10 प्रतिशत है। इसी बीच कोरोना के इलाज जुड़े प्रोटाकॉल्स में कुछ बदलाव आया है। दरअसल, कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy)को अब कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल (Covid Treatment Protocol) से बाहर कर दिया गया है। 

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कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी से फायदा नहीं 

Plasma Therapy को कोरोना के इलाज में ना इस्तेमाल न करने का ये फैसला सरकारी टॉस्कफोर्स (ICMR National Covid Task Force) की सिफारिश पर की गई है। दरअसल, ये टास्कफोर्स बहुत दिनों से कोरोना के इलाज में इस्तेमाल हो रहे प्लाज्मा थेरेपी पर गहन अध्ययन कर रही थी।पिछले दिनों कोविड पर बनी  नेशनल टास्कफोर्स की मीटिंग में इस बात पर चर्चा भी हुई, जिसमें  प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाविकता पर बात की गई और कहा गया कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी से फायदा नहीं होता है। इसके बाद ही हेल्थ मिनिस्ट्री के संयुक्त निगरानी समूह ने कोविड 19 मरीजों के मैनेजमेंट के लिए रिवाइज्ड  क्लीनिक गाइडलाइन जारी की है जिसमें कि प्लाज्मा थेरेपी नहीं है। जबकि पहले प्लाज्मा थेरेपी कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में शामिल था और कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में डॉक्टर प्लाज्मा  थेरेपी का इस्तेमाल कर रहे थे। 

बता दें कि कोविड-19 के आईसीएमआर (ICMR)भी इसी पक्ष में है कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी उतना प्रभावी नहीं है जितना कि माना जा रहा था। साथ ही पिछले दिनों ये भी खबर आ रही थी कि प्लाज्मा थेरेपी को प्रोटोकॉल से हटाने के पहले कुछ डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन को पत्र लिखा है और देश में कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल (Covid Treatment Protocol)से प्लाज्मा थेरेपी को बाहर करने की बात कही। पत्र में बताया गया कि कैसे ये पद्धति अतार्किक और गैर-वैज्ञानिक है और इसलिए इसे कोरोना के इलाज में प्रभावी इलाज नहीं माना जा सकता। 

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दिल्ली में घट रहा है कोरोना पॉजिटिविटी रेट 

अब देश  और दुनिया में कोरोना से जुड़े बड़े अपडेट्स (Covid-19 live updates) की बात करें, तो देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना पॉजिटिविटी रेट लगातार गिरावट आ रही है, जो कि लोगों के लिए एक राहत की खबर है। पिछले 24 घंटों में पॉजिटिविटी रेट 8.42% रहा जो कि पिछले महीने की तुलना में सबसे कम है। यहां पिछले 24 घंटे में 4524 नए मामले आए हैं जो कि संकेत है कि स्थिति में सुधार है।  सोमवार को संक्रमण के नए मामलों की संख्या तीन लाख से नीचे आ गई है।

देश में बढ़ रहे हैं ब्लैक फंगस के मामले 

कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।  म्यूकोरमायकोसिस के मामले में इतनी तेजी से बढ़ोतरी देखते हुए सरकारें आतंकित होती जा रही हैं।  सरकारी डाटा के मुताबिक महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के कुछ 1500 मामले हैं, जिसमें 270 मामले पूणे में हैं। ऐसे ही हाला गुजरात के भी हैं जहां 40 लोगों को ब्लैक फंगस हुआ है। ऐसी ही हालात कानपुर के भी हैं, जहां अबतक 50 से ज्यादा मरीज मिले हैं। 

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ब्लैक फंगस (Black Fungus)को लेकर एक चिंताजनक बात ये भी है कि जैसे जैसे इसके मामले बढ़ रहे हैं मार्केट में ब्लैक फंगस के इलाज में दी जाने वाली दवाइयां और इंजेक्शन की कमी हो रही है। सबसे ज्यादा कमी ब्लैक फंगस के इंजेक्शन लिप्सोमोल एंफोटेरिसिन बी की है। हालांकि, तमाम राज्य सरकारें इसे लेकर सचेत हैं और मांग-पूर्ती को आसान बनाने की कोशिश में हैं। 

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