Can Autism Improve With Age : ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है, जो व्यक्ति के सामाजिक, संचार और व्यवहार संबंधी कौशलों पर असर डालती है। ऑटिज्म के कारण व्यक्ति को दूसरों के साथ बातचीत करने और सामाजिक स्थितियों में सही तरह से व्यवहार करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऑटिज्म एक विकास से जुड़ी गंभीर समस्या है, जो बचपन से ही व्यक्ति में पाई जा सकती है। इस स्थिति में बच्चे की बातचीत करने और दूसरों से घुलने-मिलने की क्षमता में कमी आ सकती है। अब जैसा कि हमने आपको बताया कि यह बीमारी बचपन से ही हो सकती है, तो कई लोगों एक मन में यह सवाल आ सकता है कि बढ़ती उम्र के साथ ऑटिज्म की समस्या ठीक हो सकती है या नहीं? आइए इस सवाल का जवाब डॉ. विभा गोयल, सलाहकार मनोचिकित्सक, लिवासा अस्पताल मोहाली (Dr Vibha Goel, Consultant Psychiatrist, Livasa Hospital Mohali) से जान लेते हैं।
ऑटिज्म की समस्या किन कारणों से फैलती है?- What are the Reasons for the Problem of Autism
अगर ऑटिज्म के कारणों को समझने की कोशिश करें, तो अभी तक ऑटिज्म के सही कारणों को लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं है। हालांकि, कई अलग स्टडी के मुताबिक, यह डिसऑर्डर कुछ अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारणों से होता है। ऐसे में मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग के विकास में समस्याएं हो सकती हैं। जैसे-
- दिमाग के विकास को कंट्रोल करने वाले जीन में कोई गड़बड़ी हो सकती है।
- बॉडी सेल्स और दिमाग के बीच संपर्क बनाने वाले जीन में समस्या हो सकती है।
- गर्भावस्था में वायरल इंफेक्शन या हवा में फैले प्रदूषण कणों के सम्पर्क में आने से भी यह समस्या हो सकती है।
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ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?- What are the Symptoms of Autism
ऑटिज्म होने पर शरीर में कई लक्षण नजर आ सकते हैं। आमतौर पर व्यक्ति को किसी भी उम्र में ऑटिज्म होने का पता चल सकता है, लेकिन इसे "विकासात्मक विकार" कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण आमतौर पर जीवन के पहले दो वर्षों में नजर आते हैं। इसके लक्षणों में शामिल हैं:
- शब्दों को बार-बार बोलना या दोहराना
- लगातार किसी चीज की तरफ इशारा करना
- आंखों में आंखें मिलाकर न देखना या आई-कॉन्टैक्ट न बनाना
- बातचीत करने में परेशानी
- किसी भी चीज में रुचि न दिखाना
क्या ऑटिज्म की समस्या बढ़ती उम्र के साथ ठीक होती है?- Does the Problem of Autism Get Cured With Increasing Age
डॉ. विभा गोयल ने हमें बताया कि एक मनोचिकित्सक होने के नाते, मैंने देखा है कि उम्र के साथ ऑटिज्म कैसे बदल सकता और बेहतर हो सकता है। अगर सही समय पर सहायता और सही इलाज किया जाता है, तो इस बीमारी में सुधार किया जा सकता है। ऑटिज्म से बचाव के लिए आप तीन तरह की थेरेपी पर फोकस कर सकते हैं:
- एप्लाइड बिहेवियरल एनालिसिस (ABA)
- ज्वाइंट अटेंशन (JA)
- सोशल स्किल-कम्युनिकेशन (SC)
इन तीनों चीजों पर फोकस करते हुए ऑटिज्म से उबरने की कोशिश की जा सकती है। इससे सामाजिक कौशल और व्यवहार बेहतर बनता है। साथ ही, 30% बच्चों में 3 से 11 वर्ष की आयु के बीच ऑटिज्म के लक्षण घटते नजर आ सकते हैं। इसके अलावा, 70% बच्चों को ABA थेरेपी से फायदा होता है। ऑटिज्म के लक्षणों में लिंग की भी जरूरी भूमिका होती है, क्योंकि लड़कियां अक्सर लड़कों की तुलना में अपने लक्षणों को ज्यादा प्रभावी ढंग से छिपा लेती हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि ऑटिज्म से पीड़ित कई व्यक्तियों में उम्र बढ़ने के साथ लक्षणों में सुधार दिखता है, लेकिन उन्हें अपने पूरे जीवन में अक्सर अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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कुल मिलाकर, सभी का शरीर और स्थिति अलग होती है। ऐसे में अगर आप प्रभावी उपचार करवाना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी डॉक्टर से सलाह लें। इससे आप पर्सनल ट्रीटमेंट प्लान बना पाएंगे और सही तरह से जीवन बिता पाएंगे। आमतौर पर सही इलाज मिलने पर उम्र के साथ इस बीमारी के लक्षण कम हो सकते हैं। हालांकि, कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जब व्यक्ति को अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।